
रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें
मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में आवारा कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, जहां हर दिन औसतन 160 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। कई लोग झाड़-फूंक के भरोसे रह जाते हैं, जबकि समय पर इलाज न कराने पर यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्तों के काटने पर तुरंत एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है, क्योंकि रैबीज संक्रमण का कोई प्रभावी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर टीकाकरण से 100% बचाव संभव है।
जिले में हर महीने करीब 4000 लोग कुत्तों के हमले से घायल हो रहे हैं। पिछले पांच सालों में डॉग बाइट के मामलों में दोगुना वृद्धि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, श्वान के काटने के बाद अगर समय पर उपचार नहीं लिया गया तो रैबीज का संक्रमण हाइड्रोफोबिया जैसी खतरनाक बीमारी में बदल सकता है, जो मृत्यु का कारण बनती है।
रैबीज एक घातक वायरस जनित बीमारी है, जो कुत्तों और अन्य जंगली जानवरों की लार के संपर्क से फैलती है। डॉक्टर मनोज बंसल के अनुसार, कुत्तों के काटने पर रैबीज वैक्सीन के साथ इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन भी दिया जाता है, खासकर गंभीर घावों की स्थिति में। इसलिए, कुत्तों के काटने पर जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है, ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सके।
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