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  • पानी के डर के पीछे की वजहें और उसके उपचार

    पानी के डर के पीछे की वजहें और उसके उपचार

    पानी के डर के पीछे की वजहें और उसके उपचार

    हाइड्रोफोबिया, यानी पानी से डर, एक गंभीर स्थिति है जो कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है। इसका मुख्य कारण रैबीज वायरस का संक्रमण है। रैबीज से संक्रमित व्यक्ति पानी के संपर्क में आते ही असहनीय दर्द और ऐंठन का अनुभव करता है, जिससे पानी का डर बढ़ जाता है। इसे रैबीज के लक्षणों में से एक माना जाता है और समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति घातक हो सकती है।

    हालांकि, हाइड्रोफोबिया सिर्फ रैबीज तक सीमित नहीं है। कई बार लोग पिछले ट्रॉमेटिक अनुभवों के कारण भी पानी से डरने लगते हैं, जैसे कि डूबने की घटना या तैराकी न आना। इसे “Aquaphobia” कहा जाता है और यह मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कुछ लोग अनियंत्रित स्थिति, जैसे गहरे पानी, तालाब या समुद्र की लहरों से डरने लगते हैं, जिससे उनका डर और भी बढ़ जाता है।

    मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सकों का कहना है कि हाइड्रोफोबिया का इलाज संभव है। अगर यह डर रैबीज के कारण उत्पन्न होता है, तो एंटी-रैबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन का उपयोग करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, मानसिक कारणों से होने वाले पानी के डर का इलाज काउंसलिंग और थेरेपी से किया जा सकता है।

    इसलिए, पानी के डर को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता लें, ताकि इस डर को दूर किया जा सके और स्वस्थ जीवन जीया जा सके।

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  • रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में आवारा कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, जहां हर दिन औसतन 160 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। कई लोग झाड़-फूंक के भरोसे रह जाते हैं, जबकि समय पर इलाज न कराने पर यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्तों के काटने पर तुरंत एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है, क्योंकि रैबीज संक्रमण का कोई प्रभावी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर टीकाकरण से 100% बचाव संभव है।

    जिले में हर महीने करीब 4000 लोग कुत्तों के हमले से घायल हो रहे हैं। पिछले पांच सालों में डॉग बाइट के मामलों में दोगुना वृद्धि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, श्वान के काटने के बाद अगर समय पर उपचार नहीं लिया गया तो रैबीज का संक्रमण हाइड्रोफोबिया जैसी खतरनाक बीमारी में बदल सकता है, जो मृत्यु का कारण बनती है। 

    रैबीज एक घातक वायरस जनित बीमारी है, जो कुत्तों और अन्य जंगली जानवरों की लार के संपर्क से फैलती है। डॉक्टर मनोज बंसल के अनुसार, कुत्तों के काटने पर रैबीज वैक्सीन के साथ इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन भी दिया जाता है, खासकर गंभीर घावों की स्थिति में। इसलिए, कुत्तों के काटने पर जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है, ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सके।

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