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  • बिलासपुर में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक, हर दिन दर्जनों हो रहे घायल

    बिलासपुर में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक, हर दिन दर्जनों हो रहे घायल

    बिलासपुर में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक, हर दिन दर्जनों हो रहे घायल

    बिलासपुर में बढ़ा आवारा कुत्तों का आतंक, हर दिन दर्जनों हो रहे घायल

    बिलासपुर शहर में अब तब आवारा इंसानों से लोग परेशान हो रहे थे जहाँ आये दिन चोरी-लूटपाट और चाकूबाजी की घटनाओं ने लोगों का जीना दूभर कर दिया था। लेकिन इस चौंकाने वाली खबर यह आ रही है कि बिलासपुर शहर में आवारा कुत्तों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। जानकारी के मुताबिक़, मौजूदा समय में शहरी क्षेत्र में कुत्तों की संख्या 10,000 के पार पहुंच चुकी है। इन आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक ने राहगीरों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बताया जा रहा है कि ठंड के मौसम में इनकी हिंसक प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

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    देर रात बढ़ रहा कुत्तों का आंतक

    देर रात होते ही शहर की सुनसान सड़कों पर झुंड बनाकर कुत्ते राहगीरों पर हमला कर रहे हैं। इस बीच जिला अस्पतालों से खबर आई है की हर रोज 20 से 30 लोग कुत्ते काटने का शिकार हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुत्ते अक्सर झुण्ड में लोगों पर हमला कर रहे हैं I

    ये इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित

    बिलासपुर शहर में कुत्तों का आतंक शहर के स्मार्ट रोड (व्यापर विहार), श्रीकांत वर्मा मार्ग, सीएमडी चौक, लिंक रोड, सिंधी कॉलोनी रोड, नेहरु नगर मुख्य मार्ग, जगमल चौक, मोपका रोड, सरकंडा-सीपत रोड, सरकंडा मुख्य मार्ग और तालापारा मार्गों पर कुत्तों के हमले के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।  

    निजी अस्पतालों का रिकॉर्ड नहीं

    बिलासपुर शहर में 150 से अधिक निजी नर्सिंग होम हैं, जहां कुत्ते काटने के मामले सामने आते हैं। हालांकि, इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। शहर में कुत्तों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है लेकिन नगर निगम द्वारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए अब तक कोई खास कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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  • रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में आवारा कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, जहां हर दिन औसतन 160 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। कई लोग झाड़-फूंक के भरोसे रह जाते हैं, जबकि समय पर इलाज न कराने पर यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्तों के काटने पर तुरंत एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है, क्योंकि रैबीज संक्रमण का कोई प्रभावी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर टीकाकरण से 100% बचाव संभव है।

    जिले में हर महीने करीब 4000 लोग कुत्तों के हमले से घायल हो रहे हैं। पिछले पांच सालों में डॉग बाइट के मामलों में दोगुना वृद्धि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, श्वान के काटने के बाद अगर समय पर उपचार नहीं लिया गया तो रैबीज का संक्रमण हाइड्रोफोबिया जैसी खतरनाक बीमारी में बदल सकता है, जो मृत्यु का कारण बनती है। 

    रैबीज एक घातक वायरस जनित बीमारी है, जो कुत्तों और अन्य जंगली जानवरों की लार के संपर्क से फैलती है। डॉक्टर मनोज बंसल के अनुसार, कुत्तों के काटने पर रैबीज वैक्सीन के साथ इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन भी दिया जाता है, खासकर गंभीर घावों की स्थिति में। इसलिए, कुत्तों के काटने पर जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है, ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सके।

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