बिलासपुर में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा, पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल

बिलासपुर में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा, पुलिस प्रशासन की नाकामी पर उठे सवाल

बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र में चाकूबाजी की एक और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। पेंडारी निवासी दीपांशु साहू, पिता संतोष साहू, को अज्ञात युवकों ने चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमले के दौरान दीपांशु की अंतड़ियां बाहर आ गईं, जिससे उसकी हालत अत्यधिक नाजुक हो गई है।

गंभीर रूप से घायल दीपांशु को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा में भर्ती कराया गया, जहाँ से उसकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उसे सिम्स (छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) बिलासपुर रेफर किया गया। वहां डॉक्टर उसकी जान बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। घटना के बाद से शहर में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।

प्रशासन की विफलता और कानून व्यवस्था पर सवाल

पिछले एक महीने के अंदर यह जिले में हुई पांचवीं बड़ी वारदात है। चार हत्याओं और चाकूबाजी की घटनाओं के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिले में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। आए दिन अपराधियों द्वारा खुलेआम ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन पुलिस इन पर काबू पाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है।

पुलिस की ढिलाई और सरकार की उदासीनता

चाकूबाजी की इस घटना के बाद इलाके के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि पुलिस घटनाओं के बाद केवल औपचारिक जांच करती है, लेकिन अपराधियों को पकड़ने या उन पर सख्त कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही। पिछले एक महीने में हुई हत्याओं के आरोपी अब तक फरार हैं, और ऐसा लगता है कि कानून व्यवस्था का डर अपराधियों के बीच खत्म हो गया है।

शहरवासियों ने सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार की तरफ से भी अपराध नियंत्रण के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से बार-बार अपील किए जाने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था जस की तस बनी हुई है।

बढ़ते अपराध और सुरक्षा का सवाल

बिलासपुर, जिसे कभी शांतिप्रिय शहर माना जाता था, अब अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। पिछले कुछ समय में हत्याएं, लूटपाट और चाकूबाजी जैसी घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। इस साल के आंकड़े दिखाते हैं कि छोटे से लेकर बड़े अपराधों में शहर की स्थिति तेजी से बिगड़ी है, लेकिन पुलिस प्रशासन की कमजोर रणनीति और लचर सुरक्षा व्यवस्था ने जनता की चिंता बढ़ा दी है।

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता ने सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो रहे हैं? क्यों पुलिस उन्हें समय पर गिरफ्तार करने या अपराध रोकने में असफल हो रही है? इन सब सवालों का जवाब अब तक पुलिस या प्रशासन की तरफ से नहीं मिला है।

जनता का गुस्सा और सरकार से मांग

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब तक पुलिस प्रशासन में सुधार नहीं किया जाएगा और सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक ऐसे अपराध होते रहेंगे। लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, और शहर के कई हिस्सों में रात के समय सन्नाटा छा जाता है क्योंकि लोगों में डर बना हुआ है।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल अपराधियों को पकड़ने के बजाय, पुलिस को अपराधों को रोकने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, शहर में निगरानी बढ़ाने और गश्त करने की जरूरत है ताकि अपराधियों पर लगाम लगाई जा सके।

बिलासपुर के शांत माहौल को बचाने के लिए अब जनता प्रशासन और सरकार से कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

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