
बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से शुरू हुआ सार्वजनिक गणेशोत्सव
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हर साल भगवान गणेश का जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इसी परंपरा के तहत, शनिवार से घरों और पंडालों में भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और शहर भक्ति में डूब जाएगा। खास बात यह है कि बिलासपुर में गणेशोत्सव का इतिहास 94 साल पुराना है। इसका आरंभ 1920 में तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर से हुआ था, जहां महाराष्ट्र से प्रेरित स्थानीय परिवारों ने पहली बार सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमा स्थापित की।

बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से शुरू हुए इस उत्सव में धार्मिक और बौद्धिक कार्यक्रमों का आयोजन होता था। 10 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, प्रवचन, और परिसंवाद आयोजित किए जाते थे, जो दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। धीरे-धीरे, गणपति की भक्ति पूरे शहर में फैल गई और अब यह उत्सव सभी वर्गों द्वारा मनाया जाता है।
तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर समिति के सचिव संजीव बाटवे बताते हैं कि प्रारंभ में गणेश चतुर्थी का उत्सव सिर्फ घरों तक सीमित था। महाराष्ट्रीयन परिवारों द्वारा इसे समाज तक पहुंचाया गया, जहां 1930 से सार्वजनिक गणेशोत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में नागरिक परिसंवाद भी होते थे, जिनकी प्रतीक्षा नगर के लोग किया करते थे।

गणेशोत्सव अब धार्मिक आस्था का पर्व बन चुका है, और शहर के हर गली-मोहल्ले में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी।
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