रेलवे द्वारा वृक्षों की शिफ्टिंग की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई

बिलासपुर में रेलवे द्वारा वृक्षों की शिफ्टिंग की सूचना देकर किया गया वृक्षों का कटाव गंभीर रूप से पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। मौके पर मिले सूखे ठूंठ और लकड़ियों के टुकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि रेलवे ने पेड़ों को स्थानांतरित करने के बजाय उन्हें काट दिया। वन विभाग की टीम शिकायत मिलने के बाद मौके पर पहुंची और पाया कि बड़ी संख्या में ठूंठ मौजूद थे।

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जब टीम ने मौके पर उपस्थित ठेकेदार और कर्मचारियों से कटाई के संबंध में अनुमति के दस्तावेज मांगे, तो वे उपलब्ध नहीं करा सके। हालांकि, कुछ पेड़ों को नई जगह पर शिफ्ट किया गया था, लेकिन अधिकांश वृक्ष सूख चुके थे। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पेड़ों का स्थानांतरण आसान नहीं होता, और ऐसे प्रयासों की सफलता की कोई गारंटी नहीं होती।

जांच में पता चला कि रेलवे वंदे भारत ट्रेनों के बेहतर रखरखाव के लिए एक डिपो का निर्माण कर रही है, जिसके चलते वृक्षों की कटाई की गई। जांच करने वाले वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एफसीआई गोदाम के पास कई वृक्षों के ठूंठ और कटे लकड़ी के टुकड़े मिले हैं, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कितनी बड़ी संख्या में वृक्षों को काटा गया है।

विभाग ने बताया कि वृक्षों को दोबारा लगाने की प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। सही तरीके से पेड़ उखाड़े नहीं गए और न ही मिट्टी का परीक्षण किया गया। प्लांटेशन के लिए जरूरी प्रक्रियाओं में मिट्टी परीक्षण और गोबर का उपयोग शामिल हैं, जो नहीं किया गया।

जांच के दौरान एक ट्रैक्टर भी देखा गया, जो कटे पेड़ों की लकड़ियों का परिवहन कर रहा था। यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है कि यदि रेलवे शिफ्टिंग की योजना बना रही थी, तो कटे लकड़ियों का डंप कहां किया जा रहा है। वन विभाग इस मामले की गहन जांच कर रहा है।

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