बाढ़ के बाद डायरिया का कहर, सुकमा के गांवों में स्वास्थ्य संकट

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के चितलनार गांव में पिछले 10 दिनों के भीतर सात ग्रामीणों की मौतें हो चुकी हैं। यह मौतें उल्टी और दस्त की समस्याओं के कारण हुई हैं, जिससे जनजातीय समुदाय के लोगों में दहशत फैल गई है। मृतकों में दूधी मासा, जिरमिट्टी पति लछिन्दर, सुकलु, दशमी पति सुरेंद्र, सुकड़ी पति सुकलु, सुकड़ी पति बिट्ठल और सेतुराम शामिल हैं। इस गांव में हर 12 घंटे में एक ग्रामीण की मौत हो रही है, और कई अन्य लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

Young boy lying in bed with stomachache (Diarrhea)

ग्रामीणों का मानना है कि हाल ही में आई बाढ़ के बाद गांव में डायरिया फैल गया है, जिसके कारण यह मौतें हो रही हैं। गांव के सरपंच के पति हिड़मा ने बताया कि सेतुराम की हालत रात में अचानक बिगड़ी और अगली सुबह उनकी मौत हो गई। गांव के लोगों में डर और चिंता का माहौल है क्योंकि मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

चितलनार गांव के अलावा सुकमा के अन्य इलाकों में भी इसी प्रकार की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले महीने कोंटा विकासखंड के इतकल गांव में पांच ग्रामीणों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पिछले चार वर्षों में इस क्षेत्र में 44 से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने गांव में मेडिकल टीम भेजी है, जिसने 127 ग्रामीणों की जांच की है। जांच में नौ लोग डायरिया से पीड़ित पाए गए हैं, जबकि कई लोगों को बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि टीम में सिर्फ रुरल मेडिकल असिस्टेंट (आरएमए) को भेजा गया है, जिससे इलाज में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके हैं।

सुकमा के ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही मौतों ने प्रशासन की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

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