रेत माफियाओं का बुलंद हौसला, बंद घाटों से जारी अवैध खनन

जांजगीर-चांपा जिले में रेत घाटों पर चार महीने से जारी प्रतिबंध आज से हटने जा रहा है, जिससे रेत की किल्लत में कुछ कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, प्रतिबंध के दौरान भी रेत माफिया ने हसदेव, महानदी और अन्य सहायक नदियों के घाटों से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन जारी रखा। जिले में फिलहाल केवल पांच रेत घाट वैध रूप से खनिज विभाग के रिकॉर्ड में संचालित हैं, जबकि आठ नए रेत घाटों को शुरू करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

अवैध रेत खनन

जिले के नौ रेत घाट, जो पिछले दो साल से बंद हैं, वहां से भी बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन हो रहा है। इन बंद घाटों से माफिया लगातार रेत निकालकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिले के पीथमपुर, हथनेवरा, शिवरीनारायण, तनौद, देवरघटा, बसंतपुर, किकिरदा और बलौदा क्षेत्र के रेत घाटों का ठेका दो साल पहले समाप्त हो चुका है, और इन घाटों पर अब अवैध गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।

रेत माफिया के बुलंद हौसले

रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बिना रॉयल्टी दिए नदियों से रेत निकाल रहे हैं और इसे खुलेआम बेच रहे हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों पर इन माफियाओं का दबाव बना हुआ है, जिससे उन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। राजस्व और खनिज विभाग के अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद भी वे कार्रवाई करने में असफल रहे हैं।

अवैध उत्खनन का बढ़ता नेटवर्क

शिवरीनारायण में तहसीलदार ने दो बार 200-200 ट्रिप रेत जब्त की थी, लेकिन अवैध उत्खनन फिर भी नहीं रुका। जेसीबी और अन्य भारी उपकरणों से रात-दिन रेत निकाली जा रही है और हाइवा ट्रकों में लोड कर इसे बेचा जा रहा है। ठेकेदारों ने अनुमति से अधिक मात्रा में रेत डंप करके रखा हुआ था, जिससे उनका अवैध कारोबार चलता रहा।

जिले के रेत घाटों में बढ़ते अवैध उत्खनन को देखते हुए प्रशासनिक सख्ती की जरूरत है ताकि माफियाओं के हौसले पस्त हो सकें और सरकार को होने वाले राजस्व के नुकसान पर रोक लगाई जा सके।

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