
चुनाव से पहले राम रहीम को मिली पैरोल
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले पैरोल मिल गई है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। चुनाव आयोग ने 30 सितंबर 2024 को राम रहीम की पैरोल को मंजूरी दी थी, लेकिन इसे तीन शर्तों के साथ लागू किया गया है। पहली शर्त यह है कि जेल से बाहर आने के बाद राम रहीम हरियाणा में नहीं रह सकते। दूसरी शर्त के अनुसार, वह किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते, और तीसरी शर्त के तहत वह सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार नहीं कर सकते।
कांग्रेस ने उठाई चिंता
राम रहीम की पैरोल का विरोध करते हुए कांग्रेस ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है। कांग्रेस का कहना है कि राम रहीम की जेल से रिहाई चुनाव को प्रभावित कर सकती है, इसलिए उन्हें आचार संहिता के दौरान पैरोल न दी जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि राम रहीम के प्रभाव से हरियाणा की 36 विधानसभा सीटों पर चुनाव के परिणाम बदल सकते हैं।
पैरोल का इतिहास
राम रहीम पहले भी कई बार पैरोल पर बाहर आ चुके हैं। 2017 में सजा मिलने के बाद से वह 10 बार पैरोल या फरलो पर रिहा हो चुके हैं। इसी साल जनवरी में वह 50 दिनों की पैरोल पर रिहा हुए थे, और अगस्त में उन्हें 21 दिनों की फरलो पर छोड़ा गया था। इससे पहले, नवंबर 2023 में भी राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राम रहीम को 21 दिनों की फरलो दी गई थी।
पैरोल के लिए आवेदन
इस बार राम रहीम ने 5 अक्टूबर को अपने पिता की पुण्यतिथि के लिए पैरोल का आवेदन किया था। इस पर चुनाव आयोग ने उन्हें तीन शर्तों के साथ पैरोल दी। हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि यह पैरोल सीधे तौर पर चुनाव से जुड़ी हुई है और इसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
हरियाणा में विधानसभा चुनाव 5 अक्टूबर को होंगे, और इसके नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
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