भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग के साथ आज कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हो रही है। यह मुलाकात उस समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास तेज हो गए हैं।
हाल ही में, भारत और चीन ने अपने सीमा विवाद को लेकर एक समझौता किया है, जो पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद उत्पन्न स्थिति को सुलझाने में मदद करेगा। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पुष्टि की थी कि भारत और चीन के बीच समझौते के तहत 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल की जाएगी। इसके बाद, चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर मुहर लगाई, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने स्वीकार किया है कि एलएसी पर चार वर्षों से चल रहे विवाद को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। उन्होंने बताया कि चीन अब भारत के साथ मिलकर इन समझौतों को लागू करने का कार्य करेगा।
इससे पहले, कजान में पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी मुलाकात हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा की। पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच संबंध विशेषाधिकार प्राप्त हैं और ये तेजी से विकसित हो रहे हैं। इस बैठक में एक दिलचस्प क्षण तब आया जब पुतिन ने यह कहा कि उन्हें लगता है कि मोदी बिना अनुवाद के उनकी बातें समझते हैं, जो दोनों के बीच गहरे रिश्तों का संकेत है।
यह मुलाकात और दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल एशिया के लिए, बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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