
छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए कुछ अहम फैसलों के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। इन फैसलों में जनजातीय समुदाय के उत्थान और किसानों की भलाई के साथ-साथ उपभोक्ता कल्याण से जुड़े कई निर्णय शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित होंगे।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृति मिलना ऐतिहासिक कदम है। इस अभियान से देश के 63,000 से अधिक आदिवासी बहुल गांवों के साथ-साथ आकांक्षी जिलों के आदिवासी गांवों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के जनजातीय भाई-बहनों के जीवन स्तर में सुधार होगा और वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।
कृषि और उपभोक्ता हितों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय
मुख्यमंत्री साय ने ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)’ योजना को 2025-26 तक जारी रखने के निर्णय का स्वागत किया। इस योजना के तहत 35,000 करोड़ रुपए के वित्तीय पैकेज से किसानों को लाभकारी मूल्य प्राप्त होंगे और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता मिलेगी। उन्होंने इसे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी कदम बताया।
इसके अलावा, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों के तहत रबी सीजन के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों की सस्ती दरों पर आपूर्ति के लिए केंद्रीय कैबिनेट द्वारा उठाए गए कदम की भी सराहना की। इससे प्रदेश के अन्नदाताओं को उचित मूल्य पर उर्वरक मिलेंगे, जिससे खेती की लागत कम होगी और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग
मुख्यमंत्री ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कैबिनेट के फैसलों की भी सराहना की। चंद्रयान-4 मिशन, वीनस ऑर्बिटर मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और गगनयान फॉलो-ऑन मिशन को स्वीकृति देने के निर्णय से भारत की अंतरिक्ष शक्ति को नया आयाम मिलेगा। साय ने इसे देश के वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।
एक देश एक चुनाव का स्वागत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक देश, एक चुनाव’ प्रस्ताव को स्वीकृति दिए जाने पर भी प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से देश में चुनावी खर्च कम होगा, राजनीतिक स्थिरता आएगी, और संसाधनों का राष्ट्रहित में बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह निर्णय भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने को और मजबूत करेगा और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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