
कुत्तों के हमले के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश, प्रशासन से समाधान की मांग
उज्जैन शहर में आवारा कुत्तों के हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला गणेश नगर में रहने वाले 17 वर्षीय सोनू शर्मा की दुखद मौत का है। 20 दिन पहले सोनू को एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद उसका उपचार जिला अस्पताल और पुष्पा मिशन अस्पताल में चला। बाद में, गंभीर स्थिति के कारण उसे इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, इलाज के बावजूद सोनू की तबीयत बिगड़ती गई, और 6 सितंबर 2024 को उसकी मौत हो गई। सोनू, जो अपने परिवार की आर्थिक मदद करता था, अब इस घटना का शिकार बन गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में दुख और गुस्सा व्याप्त है।
उज्जैन में बढ़ती डॉग बाइट घटनाएं
यह घटना उज्जैन में लगातार बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं का एक और उदाहरण है। पिछले कुछ महीनों में कई लोग आवारा कुत्तों के हमलों का शिकार हुए हैं, जिनमें महाकाल के दर्शन करने आए श्रद्धालु भी शामिल हैं। यह मुद्दा इतना गंभीर हो चुका है कि विधानसभा में भी इस पर चर्चा हो चुकी है। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए सरकारी प्रयास किए गए हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि समस्या जस की तस बनी हुई है।
उज्जैन नगर निगम के अनुसार, पिछले पांच सालों में 15,235 कुत्तों की नसबंदी की गई है, और इस दौरान 24,901 डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। नसबंदी और टीकाकरण पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आवारा कुत्तों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य अधिकारी संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि एक कुत्ते की नसबंदी पर 1200 रुपये से अधिक खर्च आता है। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था, जिससे कुत्तों की संख्या में स्थायी कमी नहीं हो पा रही है।
स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश
सोनू शर्मा की मौत के बाद से क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुत्तों के हमलों के डर से वे बाहर निकलने से कतराते हैं, खासकर बच्चे और बुजुर्ग। लोग नगर निगम से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग कर रहे हैं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
उज्जैन में आवारा कुत्तों के हमलों से निपटने के लिए जरूरी है कि सरकार और प्रशासन इस दिशा में और ठोस कदम उठाए।
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