
बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी का आदिवासी समाज को संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के जमुई में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। धरती आबा के नाम से प्रसिद्ध बिरसा मुंडा जनजातीय समाज के महानायक और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “भगवान बिरसा मुंडा ने समाज को नई दिशा दी। उन्होंने न केवल अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए भी आंदोलन किया। उनका जीवन हम सभी को प्रेरणा देता है।” उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय समाज का योगदान देश की संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य रहा है।
बिरसा मुंडा का जीवन और योगदान
15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलीहातु गांव में जन्मे बिरसा मुंडा ने अपने अल्प जीवनकाल में अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई आंदोलन खड़े किए। वे आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित थे। उन्होंने ‘उलगुलान’ (क्रांति) का नेतृत्व किया, जो एक संगठित आंदोलन था। यह आंदोलन जनजातीय समाज की भूमि और अधिकारों को बचाने के लिए लड़ा गया।

बिरसा मुंडा ने शिक्षा प्राप्त की और अपने समुदाय को जागरूक करने का कार्य किया। वे आदिवासी समाज के भीतर व्याप्त अंधविश्वासों और कुरीतियों के खिलाफ खड़े हुए। उनके विचार और नेतृत्व ने जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर और संगठित बनने की प्रेरणा दी।
नरेंद्र मोदी का भाषण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन संदेश यह है कि समाज में हर व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “आज का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। बिरसा मुंडा जैसे वीर स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक हमारे गौरव हैं। उनकी 150वीं जयंती का यह वर्ष उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर है।”
जनजातीय गौरव दिवस की महत्ता
भारत सरकार ने 2021 में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य जनजातीय समाज के योगदान को सम्मान देना और उनकी संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।
प्रधानमंत्री ने बिरसा मुंडा की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और जनजातीय समुदाय के लोगों के साथ संवाद भी किया। इस कार्यक्रम ने बिरसा मुंडा के विचारों और आदिवासी समाज के अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता दिलाने का कार्य किया है।
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