मड़वारानी मंदिर के विरोध प्रदर्शन में उतरे ग्रामीण

madvaraani mandir
protest for mandvarani temple

मड़वारानी मंदिर को लेकर टकराव, पहले मूर्ति स्थापना की मांग पर अड़े ग्रामीण

कोरबा-चाम्पा मुख्य मार्ग पर सड़क निर्माण कार्य के लिए माँ मड़वारानी मंदिर को तोड़ने की प्रशासनिक योजना से स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। मंदिर के पास ही एक नया मंदिर निर्माणाधीन है, जहाँ भविष्य में विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा के साथ मूर्ति स्थापना की जानी है। लेकिन, पुराने मंदिर को हटाने के प्रयास को लेकर सैकड़ों ग्रामवासी सड़क पर धरने पर बैठ गए हैं।

मंदिर हटाने के लिए जिला प्रशासन का दल-बल लेकर पहुँचना, ग्रामीणों के लिए अप्रत्याशित रहा। बड़ी संख्या में लोग विरोध में इकट्ठा हो गए और बिना पूर्व सूचना मंदिर तोड़ने पर आपत्ति जताई। युवा नेता अजय कंवर सहित ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नए मंदिर में माँ की मूर्ति का विधिवत प्रतिष्ठापन नहीं हो जाता, तब तक पुराने मंदिर को तोड़ने नहीं दिया जाएगा। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े इस मंदिर के प्रति प्रशासन को संवेदनशील होना चाहिए।

मड़वारानी मंदिर की कहानी ग्रामीणों में पीढ़ियों से प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, माँ मड़वारानी विवाह के मंडप को छोड़कर यहाँ आ गई थीं। इसी दौरान, बरपाली-मड़वारानी रोड पर चलते हुए उनके शरीर से हल्दी एक बड़े पत्थर पर गिरी, जिससे वह पत्थर पीला हो गया और इस स्थल को “मड़वारानी” के नाम से पहचाना जाने लगा। बुजुर्गों के अनुसार, इस स्थान का धार्मिक महत्व गाँव के लोगों के लिए गहरा है।

मौजूदा हालात में, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि पहले नए मंदिर में मूर्ति स्थापना पूरी हो, तभी पुराने मंदिर को हटाने का काम शुरू हो। प्रशासन के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य को जल्द पूरा करना जरूरी है, लेकिन ग्रामीण इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

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