भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन अपने रुख को न्यूट्रल कर दिया है। यह संकेत है कि आरबीआई भविष्य में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इस बीच, देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), ने आरबीआई के निर्णय का इंतजार किए बिना अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में कमी की है।
एसबीआई ने 15 अक्टूबर से 15 नवंबर, 2024 तक एमसीएलआर में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इसके अनुसार, ओवरनाइट एमसीएलआर 8.20% पर स्थिर है, जबकि एक महीने की दर 8.45% से घटाकर 8.20% कर दी गई है। छह महीने की एमसीएलआर 8.85% और एक साल की एमसीएलआर को 8.95% पर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, दो साल का एमसीएलआर 9.05% और तीन साल का एमसीएलआर 9.1% है।
इस कटौती का असर होम लोन और अन्य रिटेल लोन की ब्याज दरों पर देखने को मिलेगा। एमसीएलआर वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को ऋण दे सकते हैं। वर्तमान में, एसबीआई का बेस रेट 10.40% है, जो 15 सितंबर, 2024 से लागू है। इस तरह की कटौतियों के चलते बाजार में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में अन्य बैंक भी अपने लोन रेट्स को कम कर सकते हैं।
आरबीआई ने 9 अक्टूबर को अपनी पॉलिसी का ऐलान करते हुए लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। लेकिन न्यूट्रल रुख अपनाते हुए ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिए हैं। मौजूदा रेपो रेट 6.50% है, जो पिछले कुछ महीनों से स्थिर बना हुआ है।
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