महानदी का जलस्तर गिरने पर बढ़ी रेत उत्खनन की अवैध गतिविधियां

महानदी का जलस्तर गिरने पर बढ़ी रेत उत्खनन की अवैध गतिविधियां

सितम्बर माह शुरू होते ही रेत माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं क्योंकि इन दिनों महानदी का जलस्तर कम हो गया है। अवैध रेत खनन और परिवहन के इस कारोबार में लगे माफिया बेखौफ होकर उत्खनन कर रहे हैं, जिसके चलते करोड़ों की लागत से बने बैराज का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो बैराज का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।

अवैध उत्खनन के तरीके में भी बदलाव आया है। पहले जेसीबी और चैन माउंटेन मशीनों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत का उत्खनन किया जा रहा है। महानदी के तट पर प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का उत्खनन करते हुए देखे जा सकते हैं।

स्वीकृति का अभाव

शिवरीनारायण में रेत घाट के लिए स्वीकृति का अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। महानदी के भोगहापारा घाट का ठेका खत्म हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी यहां बेखौफ उत्खनन कार्य जारी है। सुबह से लेकर देर रात तक सैकड़ों ट्रैक्टर अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर रहे हैं, जिससे महानदी की स्थिति बेजान होती जा रही है।

खर्च और राजस्व की हानि

अवैध उत्खनन से माफिया मनमानी कीमतों पर रेत बेचकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। इस स्थिति के कारण शासन को भी लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। विभागीय अधिकारी इस अवैध कार्य पर कार्रवाई करने में असमर्थता जता रहे हैं, जिससे रेत माफिया प्रशासन के नाक के नीचे अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। अगर जल्द ही इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो महानदी और इसके आस-पास के क्षेत्र की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

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