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  • निजात अभियान को फ़िल्मी सितारों ने किया समर्थन

    फ़िल्मी सितारों ने किया समर्थन

    रायपुर पुलिस के ड्रग विरोधी अभियान में सितारों की भागीदारी बढ़ी

    रायपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ड्रग, नारकोटिक्स और अवैध नशे के खिलाफ निजात अभियान को अब बॉलीवुड और टीवी जगत के कई प्रसिद्ध कलाकारों का समर्थन मिल रहा है। इन कलाकारों ने वीडियो संदेश के माध्यम से युवाओं और समाज के अन्य वर्गों से नशे से दूर रहने की अपील की है।

    फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, आदित्य पंचोली, अदा शर्मा, प्रभु देवा, अरबाज खान, राजपाल यादव, पीयूष मिश्रा, और वीरेंद्र सक्सेना जैसे बड़े नाम इस अभियान के समर्थन में आगे आए हैं। इसके अलावा, टीवी कलाकार सुनील ग्रोवर, भगवान तिवारी, शाहवर अली, और गायक कैलाश खेर, हंसराज रघुवंशी, कविता कृष्णमूर्ति जैसे कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी इस मुहिम में शामिल होकर नशे के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की है।

    छत्तीसगढ़ के विधायक और अभिनेता अनुज शर्मा, प्रमुख गायक-कलाकार प्रकाश अवस्थी, राकेश शर्मा, मोना सेन, लोक गायिका ममता चंद्राकर, तीजन बाई, दिलीप षडंगी, सुनील तिवारी, अंचल शर्मा, जाकिर हुसैन, गोपाल सिंह, और योगेश अग्रवाल भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हो गए हैं और उन्होंने पुलिस की सहायता करने की अपील की है।

    फरवरी महीने से शुरू किए गए इस अभियान के तहत अब तक स्कूल, कॉलेज, शहर और गांव में कुल 1402 जनजागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। ‘निजात’ नाम से जारी रैप सांग और रंग-बिरंगे नशा विरोधी गीत युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, और इस अभियान का असर लोगों पर खासकर युवाओं पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

    अभियान के बढ़ते समर्थन को देखते हुए अन्य सेलिब्रिटी भी इससे जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं। रायपुर पुलिस के इस प्रयास से समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और इसे जड़ से खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

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  • दोपहिया वाहन यात्रियों के लिए नया नियम हुआ लागू

    दोपहिया वाहन यात्रियों के लिए नया नियम हुआ लागू

    विशाखापट्टनम में दोपहिया वाहन के पीछे बैठने वाले के लिए 1 सितम्बर से हेलमेट अनिवार्य

    आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश के बाद, विशाखापट्टनम में दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए नियम का उल्लंघन करने पर 1035 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है।

    अब दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ उनके पीछे बैठने वाले यात्रियों को भी हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। इस आदेश का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली गंभीर चोटों को कम करना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल आईएसआई मार्क वाला हेलमेट ही मान्य होगा। सस्ता या निम्न गुणवत्ता का हेलमेट पहनने पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है।

    विशाखापट्टनम में इस नियम के सख्ती से पालन की तैयारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से शहर में सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी। मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में पहले से ही इस नियम का सख्ती से पालन हो रहा है, और अब विशाखापट्टनम में भी इसे लागू किया जा रहा है।

    इस निर्णय के बाद विशाखापट्टनम के नागरिकों को अपने सुरक्षा उपायों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि वे संभावित दंड से बच सकें और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

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  • रायपुर के तेलीबांधा में शव मिलने से दहशत, पुलिस ने शुरू की जांच

    रायपुर के तेलीबांधा में शव मिलने से दहशत, पुलिस ने शुरू की जांच

    गोपी यादव की मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस, आत्महत्या या हत्या की आशंका

    रायपुर के तेलीबांधा इलाके में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां आबकारी भवन के पीछे एक युवक का कंकाल मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। मृतक की पहचान गोपी यादव के रूप में की गई है, जो पिछले एक महीने से लापता था।

    पुलिस को मौके पर एक फांसी का फंदा भी मिला है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि युवक ने आत्महत्या की हो सकती है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और यह स्पष्ट नहीं है कि मौत आत्महत्या की वजह से हुई है या हत्या हुई है।

    कंकाल मिलने की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। पुलिस ने सबूत एकत्र कर लिए हैं और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिससे मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल, पुलिस ने आत्महत्या की आशंका के आधार पर मामला दर्ज किया है, लेकिन हत्या की संभावनाओं की भी जांच की जा रही है।

    गोपी यादव के परिवार से संपर्क कर उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की सच्चाई सामने आएगी और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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  • डॉक्टरों द्वारा गलत उपचार से महासमुंद में 6 साल की बच्ची की मौत

    नवजीवन अस्पताल की दवाओं के ओवरडोज़ से 6 साल की बच्ची की मौत, स्टाफ हुआ फरार

    छत्तीसगढ़ केमहासमुंद जिले के तुमगांव स्थित नवजीवन अस्पताल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां छह वर्षीय बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्ची को उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में दिए गए दवाओं के ओवरडोज के कारण उसकी मौत हुई।

    घटना के बाद अस्पताल में सन्नाटा पसर गया, और डॉक्टरों सहित पूरा स्टाफ अचानक गायब हो गया। बच्ची के पिता ने शिकायत दर्ज करवाई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बच्ची का पोस्टमार्टम भी किया जा रहा है, ताकि मौत के असली कारणों का पता चल सके।

    अस्पताल के प्रबंधन ने भी इस लापरवाही को स्वीकार किया है। इस घटना ने महासमुंद जिले में निजी अस्पतालों की गुणवत्ता और उनके प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोरोना काल के बाद जिले में कई निजी अस्पताल और मेडिकल दुकानें खुल गई हैं, जिनमें से कई नर्सिंग होम एक्ट के मानकों को पूरा नहीं करते।

    यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है, और प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की पूरी जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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  • मोहनलाल ने मलयालम फिल्म उद्योग में संकट पर जताई चिंता

    मोहनलाल ने मलयालम फिल्म उद्योग में संकट पर जताई चिंता, AMMA को अकेले दोष देना बताया गलत

    अभिनेता मोहनलाल ने मलयालम फिल्म उद्योग में चल रहे संकट पर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (AMMA) को दोष देना सही नहीं है, बल्कि हेम समिति की रिपोर्ट के लिए पूरे उद्योग को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। मोहनलाल ने इस रिपोर्ट का स्वागत किया और उद्योग के सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे इसका भविष्य बेहतर हो सके।

    उद्योग का बड़ा संकट: मोहनलाल ने AMMA की आलोचना को बताया गलत

    केरल क्रिकेट लीग के उद्घाटन के दौरान, मोहनलाल ने कहा कि मलयालम फिल्म उद्योग इस समय बड़े संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी “पावर ग्रुप” का हिस्सा नहीं हैं और उन्हें ऐसे समूहों की कोई जानकारी नहीं है। मोहनलाल ने तर्क किया कि फिल्म उद्योग के सभी मुद्दों के लिए एकजुट होकर जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि यह केवल फिल्मों का नहीं, बल्कि समाज के सभी क्षेत्रों का मुद्दा है।

    AMMA का परिवार जैसा स्वरूप: मोहनलाल ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की वजह बताई

    मोहनलाल ने कहा कि AMMA एक ट्रेड यूनियन की तरह काम नहीं करता, बल्कि यह एक ऐसा परिवार है, जिसे कलाकारों की मदद के लिए बनाया गया था। उन्होंने AMMA के अध्यक्ष पद से इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि उन्हें और AMMA की कार्यकारिणी समिति को हर बात के लिए दोषी ठहराया जा रहा था, जबकि वास्तव में पूरी इंडस्ट्री जवाबदेह है।

    उद्योग के ढहने की आशंका: मोहनलाल ने सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की

    मोहनलाल ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यह उद्योग, जो हजारों लोगों को रोजगार देता है, कहीं ढह न जाए। उन्होंने कहा कि गलती करने वाले को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उद्योग में सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाए। मोहनलाल ने इस बात का भी समर्थन किया कि जूनियर कलाकारों के लिए एक एसोसिएशन बने, क्योंकि रिपोर्ट के जारी होने के बाद इन कलाकारों ने उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इस समय मलयालम फिल्म उद्योग को पुनर्निर्माण की आवश्यकता है, और मोहनलाल ने इस दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है।

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  • गूगल रिव्यू के नाम पर करोड़ों की ठगी आरोपी सूरत से पकड़ा गया

    आरोपी नरेंद्र कुंडलिया

    गूगल रिव्यू के नाम पर करोड़ों की ठगी आरोपी नरेंद्र कुंडलिया सूरत से पकड़ा गया

    रायपुर में 29.49 लाख रुपये की ठगी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। नरेंद्र हिम्मत भाई कुंडलिया नामक व्यक्ति ने गूगल रिव्यू के नाम पर ठगी का जाल बिछाया था। आरोपी को गुजरात के सूरत से पकड़ा गया है। उसने रायपुर निवासी श्वेता मेहरा से 29.49 लाख रुपये ठग लिए थे।

    पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी के खिलाफ देशभर के 48 से अधिक पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा, उसकी 500 से अधिक यूपीआई आईडी और बैंक अकाउंट होल्ड किए जा चुके हैं। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन, सिम कार्ड, और बैंक खाते भी जब्त कर लिए हैं।

    ठगी का तरीका यह था कि पीड़िता को व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर, गूगल रिव्यू देने के बदले पैसे कमाने का लालच दिया गया। पहले टास्क पूरा करने पर कुछ पैसे दिए गए, लेकिन बाद में ज्यादा पैसे मांगकर पीड़िता से बड़ी रकम ठग ली गई। पुलिस ने आरोपी के नए खरीदे गए 74 लाख रुपये के घर को भी जब्त कर लिया है और अन्य शामिल लोगों की तलाश जारी है।

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  • मवेशियों के चलते सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है वृद्धि

    मवेशियों के चलते सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि, पुलिस विभाग के आंकड़ों से खुलासा

    जुलाई 2023 में बिलासपुर हाई कोर्ट ने सड़क पर मवेशियों के विचरण को लेकर गहरी चिंता जताई थी और प्रशासन को सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इस मामले में कुछ कदम उठाए भी गए, लेकिन इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    पुलिस विभाग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में सड़क दुर्घटनाओं से मौतों की दर 5.6 प्रतिशत थी, जो इस साल की पहली छमाही में बढ़कर 8.72 प्रतिशत हो गई है। सड़क पर मवेशियों के चलते होने वाली दुर्घटनाओं के कारण हर वर्ष अनेक जानें जा रही हैं। पिछले पांच वर्षों में राज्य में 404 यात्रियों की मौत हो गई और 129 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पिछले जुलाई महीने में ही नौ लोग दुर्घटना के शिकार हुए हैं।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार और नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के सहयोग से जुलाई-अगस्त 2023 के दौरान सड़क से 26,713 मवेशियों को हटाया गया था। इसके बावजूद, मवेशियों के चलते होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है, जिससे आम जनता में रोष बढ़ रहा है।

    शहर की प्रमुख सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। मुख्य मार्गों के साथ-साथ गली-मुहल्लों में भी मवेशियों का कब्जा देखा जा सकता है, जिससे वाहनों की आवाजाही के साथ-साथ पैदल यात्रियों को भी खतरा है। कई बार मवेशियों के आपस में भिड़ने से आसपास के लोगों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    पुलिस के आंकड़ों से खुलासा

    पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में 5,834 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 6,166 हो गई थी। इस साल जुलाई तक सड़क दुर्घटनाओं में 3,629 लोगों की जान जा चुकी है, जो एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है। प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद स्थिति में सुधार ना होने से, इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता है।

    मवेशियों की सड़कों से प्रभावी रूप से हटाने के लिए और भी कड़े कदम उठाने की ज़रूरत है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।

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  • मैनपाट में हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत

    मैनपाट में हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत

    ग्रामीण की मौत के बाद मैनपाट में तनाव, वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

    सरगुजा जिले के मैनपाट वन परिक्षेत्र के दांतीढाब के पास एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां जंगल में एक ग्रामीण का शव बरामद किया गया है। माना जा रहा है कि उसकी मौत हाथी के हमले से हुई है। मृतक की पहचान 55 वर्षीय नारद यादव के रूप में हुई है, जो नर्मदापुर पटेलपारा का निवासी था।

    भैंस चराने गया ग्रामीण वापस नहीं लौटा

    शनिवार को नारद यादव अपनी भैंसों को चराने के लिए दांतीढाब के बांसहिया जंगल गया था। शाम तक जब वह वापस नहीं लौटा, तो उसके परिवार और वन विभाग ने उसकी खोजबीन शुरू की। अंततः उसका शव जंगल में पाया गया, लेकिन आसपास एक हाथी के मौजूद होने के कारण शव को तुरंत बाहर नहीं निकाला जा सका।

    दूसरे दिन निकाला गया शव

    रविवार सुबह, जब हाथी जंगल से दूर चला गया, तब जाकर शव को बाहर निकाला गया। शव की हालत देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि नारद यादव की मौत हाथी के हमले से हुई है। क्षेत्र में एक अकेला हाथी पिछले कई दिनों से घूम रहा था, और ऐसा माना जा रहा है कि यह वही हाथी इस घटना का कारण बना।

    वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

    इस घटना के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वन विभाग द्वारा हाथियों की निगरानी सही तरीके से नहीं की जा रही है और ग्रामीणों को हाथी की उपस्थिति की जानकारी समय पर नहीं दी जा रही है। यदि हाथी के विचरण की सटीक जानकारी मिलती, तो इस प्रकार की दुखद घटना से बचा जा सकता था।

    मैनपाट क्षेत्र में इस तरह की घटनाओं से ग्रामीणों में डर का माहौल है और वे वन विभाग से इस मामले में सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

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  • धमतरी में तेंदुए के हमले से खौफ सुरक्षा के किये गये कड़े इंतजाम

    धमतरी में तेंदुए के हमले से खौफ सुरक्षा के किये गये कड़े इंतजाम

    धमतरी में तेंदुए का आतंक आंगन में खेल रही बच्ची की ले ली जान

    छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक खौफनाक घटना सामने आई है, जहां एक तेंदुए ने तीन साल की मासूम बच्ची पर हमला कर उसकी जान ले ली। घटना 30 अगस्त की शाम की है, जब बच्ची अपने घर के आंगन में खेल रही थी। तेंदुए ने अचानक हमला कर बच्ची को उठा लिया और उसे नोंचकर मार डाला। घटना से गांव में दहशत फैल गई है।

    घटना के बाद, उसी रात तेंदुआ गांव में फिर से नजर आया और उसने एक बुजुर्ग व्यक्ति पर भी हमला कर दिया। बुजुर्ग बुधराम कमार घर के अंदर खाट पर सो रहे थे, जब तेंदुए ने उन पर हमला किया। हालांकि, उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर घरवालों ने तेंदुए को भागने पर मजबूर कर दिया। इस हमले में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए नगरी सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    वन विभाग और पुलिस ने गांव में सुरक्षा के इंतजाम किए हैं, लेकिन तेंदुए के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। तेंदुआ एक अन्य गांव, खुदुरपानी में भी एक पालतू कुत्ते को शिकार बना चुका है। वन विभाग के अधिकारी गांवों में जाकर लोगों को सजग कर रहे हैं और तेंदुए पर निगरानी बनाए हुए हैं।

    इस घटना से पूरा इलाका दहशत में है, और वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए सक्रिय हो गई है।

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  • कोविड-19 की नई लहर का संकेत, क्या फिर होगी कोविड-19 की नई लहर?

    कोविड-19 की नई लहर का संकेत, क्या फिर होगी कोविड-19 की नई लहर?

    कोविड-19 की नई लहर का संकेत, क्या फिर होगी कोविड-19 की नई लहर?

    अमेरिका और दक्षिण कोरिया में कोविड-19 के मामलों में तेजी से वृद्धि देखने को मिल रही है, जिससे संक्रमण के फैलने की आशंका बढ़ गई है। यह स्थिति वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है, और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। WHO ने देशों को सतर्क रहने और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।

    केपी वेरिएंट का प्रभाव

    हाल के प्रकोप केपी वेरिएंट के कारण हुआ है, जो ओमिक्रान वेरिएंट से संबंधित है। यह वेरिएंट विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि इसके फैलने की गति और गंभीरता अधिक हो सकती है। हालांकि भारत में अभी स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इसके लिए पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए। शिव नादर विश्वविद्यालय के वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर दीपक सहगल ने चेतावनी दी है कि भारत में एक और लहर आ सकती है और इस पर नियंत्रण पाने के लिए पहले से ही तैयारी करनी चाहिए।

    भारत में कोरोना के मामले

    भारत में हाल के दिनों में कोविड-19 के केसों में बढ़ोतरी देखी गई है। 2023 में केपी.2 वेरिएंट का पहला मामला दिसंबर में ओडिशा में सामने आया था, और इसके बाद से कई राज्यों में कोरोना के मामलों में वृद्धि हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भारत में फिलहाल 279 सक्रिय कोरोना मामले हैं। हालांकि स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन कोविड-19 की पिछली लहरों में लाखों लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम सतर्क रहें।

    अंतर्राष्ट्रीय स्थिति और भारत की तैयारी

    मेरिका के 25 राज्यों में कोरोना संक्रमण में वृद्धि हो रही है, और दक्षिण कोरिया में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जून और जुलाई के बीच भारत में कोविड-19 के 908 नए मामले सामने आए और 2 मौतें हुई हैं। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत में भी स्थिति को लेकर सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।

    सारांश में, कोविड-19 के मामलों में यह बढ़ोतरी एक बार फिर से वैश्विक स्वास्थ्य के लिए चुनौती पेश कर रही है, और सभी देशों को, विशेषकर भारत को, इस दिशा में सजग रहने की जरूरत है।

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