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  • दांतों को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के बेहतरीन तरीके

    दांतों को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के बेहतरीन तरीके

    सही खानपान और देखभाल से रखें अपने दांतों को फिट और फ्रेश

    दांतों की सेहत पर खानपान और नियमित देखभाल का गहरा असर पड़ता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में दांतों की देखभाल अक्सर नजरअंदाज की जाती है, लेकिन सही खानपान और देखभाल के उपाय अपनाकर आप अपने दांतों को न केवल स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि उनकी चमक भी बरकरार रख सकते हैं। दंत चिकित्सक डॉ. सुरेन्द्र अग्रवाल के अनुसार, दांतों की देखभाल में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है:

    1. पौष्टिक आहार पर ध्यान दें

    दांतों की मजबूती और स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम और फास्फोरस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए अपने आहार में डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर, और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। साथ ही, नट्स और बीन्स भी आपके दांतों के लिए लाभकारी हैं। चीनी युक्त और अम्लीय खाद्य पदार्थ, जैसे कोल्ड ड्रिंक्स और कैन्ड फूड्स, दांतों की सड़न और अन्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं, इसलिए इनसे परहेज करें।

    2. ब्रश करने की सही आदतें अपनाएं

    स्वस्थ दांत और मसूड़े बनाए रखने के लिए रोजाना दो बार ब्रश करना जरूरी है। इसके लिए नर्म ब्रिसल वाले टूथब्रश का उपयोग करें और दांतों के बीच में फंसे भोजन के कणों को हटाने के लिए फ्लॉस का उपयोग करें। दांतों को ब्रश करने के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें, जो दांतों को मजबूत और कैविटी से बचाने में मदद करता है।

    3. नियमित दंत जांच करवाएं

    दांतों की नियमित जांच करवाना दांतों की सेहत के लिए बहुत आवश्यक है। यह आपको किसी भी संभावित समस्या का समय पर पता लगाने में मदद करता है और उचित इलाज कराता है। अपने दांतों की सफाई और चेक-अप के लिए साल में दो बार दंत चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। यदि दांतों में कोई परेशानी हो, तो विशेषज्ञ से सलाह में लापरवाही न बरतें।

    4. जीवनशैली में सुधार करें

    दांतों की देखभाल के साथ-साथ जीवनशैली में भी सुधार करना आवश्यक है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इन आदतों को कम करने या छोड़ने का प्रयास करें। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन भी दांतों की सेहत के लिए लाभकारी है।

    इन सरल लेकिन प्रभावशाली उपायों को अपनाकर आप अपने दांतों को न केवल स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि उनकी चमक भी बनाए रख सकते हैं। अपनी दांतों की देखभाल में कोई भी कोताही न बरतें और नियमित रूप से जांच करवाएं ताकि आपके दांत हमेशा स्वस्थ और खूबसूरत बने रहें।

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  • शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपवास है लाभदायक

    शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपवास है लाभदायक

    शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आधुनिक दृष्टिकोण से उपवास है लाभदायक

    भारत में उपवास की परंपरा का प्रभाव स्वास्थ्य पर, आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान की रोशनी में नए सिरे से देखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अलावा, उपवास अब वैज्ञानिक और चिकित्सा समुदाय में भी व्यापक रूप से स्वीकृत हो रहा है।

    हाल ही में किए गए शोध से पता चला है कि उपवास न केवल शारीरिक डिटॉक्स के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपवास के दौरान शरीर में जमा वसा का उपयोग होता है, जिससे हानिकारक विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। इस प्रक्रिया के चलते आंतरिक अंगों की सफाई होती है, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और व्यक्ति की कार्यक्षमता में सुधार होता है।

    डायबिटीज और मोटापे जैसी बीमारियों की रोकथाम में भी उपवास की भूमिका पर नए अध्ययन प्रकाश डाल रहे हैं। नियमित उपवास से ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर संतुलित रहता है, जो इन बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है। इसके अलावा, उपवास से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर के वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

    मन के लिए, उपवास एक शांति और आत्मनियंत्रण का साधन बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपवास के दौरान मानसिक स्पष्टता और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है, जिससे व्यक्ति अधिक सक्रिय और मानसिक रूप से सजग महसूस करता है।

    इस नई समझ के साथ, उपवास केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए एक प्रभावी उपाय के रूप में उभर रहा है। धर्म और विज्ञान का यह संगम, उपवास को एक नई दिशा में ले जा रहा है, जिससे यह परंपरा आज के समय में भी प्रासंगिक बनी हुई है।

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  • फेफड़ों के कैंसर का मस्तिष्क में फैलाव: लक्षण और उपचार

    फेफड़ों के कैंसर का मस्तिष्क में फैलाव: लक्षण और उपचार

    हाल ही में कैंसर के मामलों में तेज वृद्धि देखी जा रही है, और इसके पूर्ण इलाज के लिए अब तक कोई दवा उपलब्ध नहीं है। फेफड़ों का कैंसर, जो एक प्रमुख चुनौती बन चुका है, अब मस्तिष्क में मेटास्टेसिस के लक्षण दिखाने लगा है।

    मेटास्टेसिस क्या है?
    मेटास्टेसिस वह स्थिति है जब कैंसर अपने मूल अंग के अलावा शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है। फेफड़ों के कैंसर में, यह मेटास्टेसिस अक्सर मस्तिष्क को प्रभावित करता है। नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) से पीड़ित लगभग 10 प्रतिशत मरीजों में यह समस्या देखी जाती है।

    लक्षण:

    • सिर दर्द: लगातार और गंभीर सिर दर्द होना।
    • दौरे: मेटास्टेसिस के संकेत के रूप में दौरे आना।
    • याददाश्त कमजोर होना: भूलने की बीमारी और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई।
    • व्यवहार में परिवर्तन: चिड़चिड़ापन और व्यवहार में बदलाव।

    उपचार विकल्प:

    • टारगेटेड थैरेपी: कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर उनका उपचार।
    • रेडिएशन थेरेपी: Whole-brain radiation therapy (WBRT) या Stereotactic Radiosurgery (SRS) का उपयोग।
    • सिस्टमेटिक कीमोथेरेपी: मेटास्टेसिस और अन्य कैंसर के उपचार के लिए।
    • पैलिएटिव केयर: कैंसर के लक्षणों से राहत प्रदान करने में मदद।

    कैंसर की इस बढ़ती चुनौती के बीच, समय पर उपचार और सही जानकारी महत्वपूर्ण हो गई है।

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  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की आबादी में हुई बढ़ोतरी

    शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की आबादी में हुई बढ़ोतरी

    आजकल शहर से लेकर गाँव तक झोलाछाप डॉक्टरों का सुनामी आ गया है I हर जगह झोलाछाप डॉक्टर्स अपनी क्लिनिक खोलकर बैठ गये हैं I कई मरीज इन झोलाछाप डॉक्टरों से अपना इलाज करा कर अपनी जान गवाँ रहे हैं I प्रशासन इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई भी करती है लेकिन कुछ समय बाद फिर से झोलाछाप डॉक्टर फिर से एक्टिव हो जाते हैं I

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अवैध रूप से झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा क्लिनिक चलाया जा रहा है I स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार के दिन छापामारी करना शुरू कर दिया I छापामारी की खबर सुनकर झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक बंद करके गायब हो गये I कई डॉक्टरों ने तो क्लिनिक के बाहर लगे बोर्ड तक को छुपा दिया ताकि बचा जा सके I दरअसल स्वास्थ्य विभाग के पास झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिकों की अधिकृत कोई सूची नहीं है इसलिए यह लंबे समय से कार्रवाई से बचते आ रहे हैं।  झोलाछाप डॉक्टरों से गलत दवाइयों और इंजेक्शन ले लेने से मरीजों को दवाइयों से साइड इफेट और कुछ तो जान तक गवां दे रहे हैं I

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.आरके राजौरिया ने तीन टीम के साथ पिंटो पार्क, दीनदयाल नगर क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान तीन टीम 13 जगहों पर सर्च अभियान किये I मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. राजौरिया ने कहा कि कार्रवाई जारी रहेगी। अवैध तरीके से किसी भी क्लीनिक का संचालित नहीं होने दिया जा रहा है I

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  • मानसून शुरू होते ही छत्तीसगढ़ में डायरिया ने पसारा अपना पैर

    मानसून शुरू होते ही छत्तीसगढ़ में डायरिया ने पसारा अपना पैर

    इन दिनों छत्तीसगढ़ में डायरिया तेजी से अपना पैर पसार रहा है I राज्य के शासकीय और निजी अस्पतालों में डायरिया मरीजों में 30% बढ़ोतरी हुई है I इस बीमारी से ज्यादातर बच्चे पीड़ित हैं I छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से स्टॉप डायरिया अभियान चलाया जा रहा है लेकिन इस अभियान का कोई असर नहीं दिख रहा है I छत्तीसगढ़ में जनवरी से लेकर अब तक डायरिया के 10,830 मरीज मिल चुके हैं। इसमें सबसे अधिक बीजापुर के 1,306 तथा रायपुर के 1,036 शामिल हैं। डायरिया से अब तक 5 लोगों की मौत भी हो चुकी है I लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस बात को ख़ारिज कर दे रहा है I

    छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र अम्बेडकर अस्पताल में प्रतिदिन 25 से 30 तथा जिला अस्पताल में 15 बच्चे प्रतिदिन इलाज कराने पहुंच रहे हैं। राहत की बात तो यह है ज्यादातर बच्चे ओपीडी में दवा लेकर ठीक हो जा रहे हैं I

    डॉक्टर्स का कहना है कि बरसात में कई बीमारियों का खतरा बना रहता है डायरिया भी उन्हीं बिमारियों में से एक है I दूषित पानी पीने से, दूषित खाना खाने से डायरिया आसानी से लोगों में घर कर जाता है I यह बिमारी ज्यादातर बच्चों के लिए खतरनाक होता है इसलिए बरसात के मौसम में खान-पान में सावधानी बरतना बहुत जरुरी है I

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  • अम्बेडकर अस्पताल में अब लम्बी लाइन से जल्द मिलेगा छुटकारा

    अम्बेडकर अस्पताल में अब लम्बी लाइन से जल्द मिलेगा छुटकारा

    डॉ. भीम राव अम्बेडकर मेमोरियल अस्पताल मरीज घर बैठे ले सकेंगे डॉक्टर से अपोइंटमेंट

    छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े अस्पताल डॉ. भीम राव अम्बेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल में जो लोग दूर-दूर से इलाज कराने आते हैं उनके लिए एक अच्छी खबर है I अब मरीजों को अस्पताल में डॉक्टर से मिलने के लिए पर्ची कटवाकर लम्बी लाइन लगने की जरूरत नहीं पड़ेगा I क्योंकि अस्पताल प्रबंधन इससे बचने के लिए आनलाइन सुविधा शुरू रहा है I इसका ट्रायल शुरू हो भी गया है I अब मरीज घर बैठे डॉक्टर से अपना अपोइंटमेंट ले सकते है I ओपीडी पर्ची के लिए आभा एप्प पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा I जिससे होगा ये की मरीज को टोकन नंबर मिल जायेगा I इसके लिए अस्पताल में अलग से काउंटर बन रहा है I बस प्ले स्टोर से आभा एप्प डाउनलोड कर पंजीयन कर सकते हैं I

    दरअसल, टोकन सिस्टम नहीं होने से अस्पताल में मरीजों को लम्बी लाइन लगना पड़ता था I टोकन सिस्टम हो जाने से यह समस्या खत्म हो जाएगा I फिर भी जिन मरीजों को टोकन नहीं कटवाना है उन्हें काउंटर पर लाइन लगाना होगा I आभा आईडी बनाने से मरीजों को एक और फायदा मिलेगा I पहले फाइल गुम हो जाने से मरीज दूसरे डॉक्टर से अपना इलाज कराने चले जाते थे इसके दूसरे डॉक्टर को इस बीमारी के सम्बन्ध में कब क्या इलाज हुआ इस सम्बन्ध में डेटा नहीं रहता लेकिन आभा एप्प में रजिस्ट्रेशन से यह समस्या खत्म हो जाएगा क्योंकि इसमें मरीज का सारा डेटा रहेगा I

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  • अपने सेहत को दें लम्हें चंद आइये जानते हैं पानी पीना कितना है फ़ायदेमंद

    अपने सेहत को दें लम्हें चंद आइये जानते हैं पानी पीना कितना है फ़ायदेमंद

    हमारे दैनिक जीवन में पानी का कितना महत्व है हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं | शरीर को स्वस्थ्य बनाये रखने के लिए रोजाना प्रयाप्त मात्रा में पानी अवश्य पीना चाहिए I पानी की कमी से हमारे शरीर में कई तरह के बीमारियों का होने का खतरा बना रहता है I कम पानी पीने से शरीर के आंतरिक अंगों के ख़राब होने का खतरा रहता है जिससे पाचन से सम्बंधित समस्याएँ हो सकती हैं I इसलिए दिन में 5 से 8 गिलास हो सके तो 1-1 घंटे के अंतराल में 1 गिलास पानी पीने की आदत डालें I हालाँकि पानी पीने का भी एक तरीका होता है, कभी भी खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए और न ही जल्दबाजी में पीना चाहिए | पानी हमेशा बैठकर और आराम से पीना चाहिए I रात्रि के समय ज्यादा मात्रा में पानी पीने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे किडनी डैमेज होने का खतरा रहता है I खाना खाने के लगभग आधे घंटे के बाद पानी पीने से खाना अच्छे से पचता है I

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