भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने दंतेवाड़ा जिले में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) पर हाल ही में हुए माओवादी हमले को राजनीतिक रंग देने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना की है।
छत्तीसगढ़ में माओवादी उग्रवाद से निपटने को लेकर भाजपा, कांग्रेस ट्रेड बार-बार कटघरे में हैं I
छत्तीसगढ़ में माओवादी उग्रवाद से निपटने को लेकर भाजपा, कांग्रेस ट्रेड बार-बार कटघरे में हैं I
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने दंतेवाड़ा जिले में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) पर हाल ही में हुए माओवादी हमले को राजनीतिक रंग देने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की आलोचना की है। 26 अप्रैल को माओवादियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में 10 डीआरजी जवानों और एक चालक की जान चली गई थी, जब जवान तलाशी अभियान के बाद लौट रहे थे। बघेल के इस बयान कि पहले जवान कैंप में शहीद होते थे, लेकिन अब लड़ते-लड़ते शहीद हो जाते हैं, पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिंह ने कहा कि वर्तमान स्थिति की तुलना अतीत से नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने माओवादियों के खिलाफ अपनी लड़ाई में अपार बहादुरी का परिचय दिया था, एक समय था जब छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा संभाग में लोग डर के मारे रहते थे, लेकिन पिछली सरकार ने नागरिकों के पक्ष में चीजों को बदल दिया।
‘इट कुड हैव बीन मी’: दंतेवाड़ा नक्सल हमले में जीवित बचे व्यक्ति ने सुनाई डरावनी कहानी
‘इट कुड हैव बीन मी’: दंतेवाड़ा नक्सल हमले में जीवित बचे व्यक्ति ने सुनाई डरावनी कहानी I खुद एक पुलिस वाले के बेटे, युवराज ने शुरुआती झटकों के बाद अपनी नर्वस पकड़ ली। नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान उनके द्वारा रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो अब वायरल हो गया है। यदि स्थानीय पुलिस और एनआईए इस मामले को अपने हाथ में लेती है तो इसका साक्ष्य संबंधी महत्व हो सकता है I
यह मैं हो सकता था,” दंतेवाड़ा नक्सल हमले में मौत के बारे में सोचा जाने से एक जीवित व्यक्ति को छोड़ने से इंकार कर दिया गया, जिसने बुधवार को 11 लोगों की जान ले ली।
एक नागरिक, युवराज 8 जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और एक घायल संदिग्ध नक्सली के साथ अपनी स्कॉर्पियो चला रहा था। उनका वाहन तीन के काफिले में दूसरा था- पहला तूफ़ान था और दूसरा एक पिक-अप वैन था जिसने विस्फोट कर दिया।
पिकअप काफिले की आखिरी गाड़ी थी लेकिन अरहानपुर थाने से एक किलोमीटर आगे युवराज की स्कॉर्पियो से आगे निकल गई। कुछ ही मिनट बाद पिक-अप वैन के टुकड़े-टुकड़े हो गए।
युवराज ने GOLDEN36GARH को बताया, “मैं सुन्न हो गया था, मेरे सामने का वाहन धीमी गति से जमीन से उठा और फिर उसके टुकड़े-टुकड़े हो गया।”
आईईडी विस्फोट के समय को याद करते हुए उन्होंने कहा, “आम पांडुम उत्सव मनाया जा रहा था और ग्रामीणों ने लकड़ी के ढांचों को खड़ा कर दिया था… मैं ऐसे ही एक ढाँचे पर चला गया और लकड़ी का एक टुकड़ा वाहन में फंस गया… मैं धीमा हो गया और पिकअप मेरे पीछे वाले वाहन ने ओवरटेक किया… जब पिकअप वाहन में विस्फोट हुआ तो मैं पानी का घूंट पी रहा था।”
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार को दंतेवाड़ा में पुष्पांजलि समारोह के दौरान पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर को ले जाते हुए
छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का संकल्प, माओवादियों के खिलाफ लड़ाई होगी तेज
छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का संकल्प, माओवादियों के खिलाफ लड़ाई होगी तेज I माओवादियों के खिलाफ लड़ाई न केवल जारी रहेगी बल्कि तेज होगी, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को माओवादी आईईडी विस्फोट में मारे गए 10 पुलिसकर्मियों और एक नागरिक चालक को श्रद्धांजलि देने के बाद गुरुवार को कसम खाई।
बघेल ने एक जवान के ताबूत को अपना कंधा दिया और उसे एक वाहन तक ले गए। 11 पीड़ितों के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव ले जाया जा रहा है। बघेल ने कहा, “हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हम नक्सलियों के खिलाफ और भी अधिक तीव्रता से लड़ेंगे। हमारे जवान माओवादियों को उनके मूल क्षेत्रों में मार रहे हैं। पिछले साढ़े चार वर्षों में, 75 पुलिस शिविरों में नक्सलियों के मुख्य क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं, जबकि पहले, शिविर केवल बफर जोन में स्थापित किए गए थे। वास्तव में पुवर्ती क्षेत्र, जिसे माओवादी कमांडर हिड़मा का मुख्यालय माना जाता है, अब चारों ओर से सुरक्षा शिविरों से घिरा हुआ है। ऑपरेशन के दौरान जवानों को कई दिनों तक कई किलोमीटर जाना पड़ता था, लेकिन अब सड़क संपर्क और कैंपों ने इसे आसान बना दिया है I
मुख्यमंत्री ने शहीद जवानों और मारे गए चालक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने मीडिया से कहा, “राज्य की विकास नीतियों के कारण माओवादियों को पीछे धकेल दिया गया और कुछ इलाकों तक सीमित कर दिया गया। इस तरह की घटना दो साल के अंतराल के बाद हुई है, जो बस्तर में माओवादियों के कम होते प्रभाव को दर्शाता है। ताजा हमला। माओवादियों ने हताशा में हमारे जवानों पर हमला किया था. पिछले चार साल में बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सड़कें बनाई जा रही हैं और कैंप लगाए जा रहे हैंI’
छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक कांग्रेस 2023 का आयोजन 3 और 4 मई को होगा
छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक कांग्रेस 2023 का आयोजन 3 और 4 मई को होगा I राज्य की युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 18वीं छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक कांग्रेस-2023 का आयोजन छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सी.सी.ओ.एस.टी.) एवं पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के इस राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालय को NAAC ’ए’ रेटिंग प्राप्त है और यह DST-पर्स द्वारा वित्त पोषित है। यह आयोजन 3 और 4 मई को होना है।
रायपुर : छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीसीओएसटी) और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, एनएएसी ‘ए’ और डीएसटी-पर्स द्वारा वित्तपोषित छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय 18वीं छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक कांग्रेस-2023 का आयोजन 3 मई और 4 मई को करेगा. राज्य की युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देना। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस उभरते उत्साही युवा शोधकर्ताओं के लिए सही मंच प्रदान करना और उन्हें अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए बढ़ावा देना है। 28 फरवरी को भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा ‘रमन प्रभाव’ की खोज को चिह्नित करने के लिए हर साल युवा वैज्ञानिक कांग्रेस का आयोजन किया जाता है। कृषि विज्ञान, कृषि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, पृथ्वी और वायुमंडलीय विज्ञान, रसायन इंजीनियरिंग, चिकित्सा और दवा विज्ञान, भौतिकी, पर्यावरण विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान आदि सहित 18 विषयों में शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पात्र होने के लिए 28 फरवरी, 2023 को पुरुष उम्मीदवार की आयु 32 वर्ष और महिला उम्मीदवार की 35 वर्ष होनी चाहिए। इसी प्रकार विज्ञान विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के बाद शोध का अनुभव दो वर्ष का होना चाहिए।
आरक्षण का असर बीए, बीकॉम व बीएससी वाले सरकारी कॉलेजों के एडमिशन में होगी देरी
आरक्षण विवाद का असर इस साल बीए, बीकॉम और बीएससी के सरकारी कॉलेजों पर भी पड़ रहा है। नया रोस्टर जारी नहीं होने की वजह से इन सभी कॉलेजों में प्रवेश में देर होगी। इसका असर पढ़ाई पर भी होगा। पिछली बार आरक्षण का असर इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक समेत अन्य कॉलेजों के एडमिशन पर पड़ा था। इसकी वजह से इन कोर्स की आधी से ज्यादा सीटें खाली रह गई थी।
नए शिक्षा सत्र यानी 2023-24 में इस विवाद के असर से सभी सरकारी कॉलेजों के एडमिशन प्रभावित होगा। रोस्टर जारी नहीं होने की वजह से अब तक यह तय नहीं है कि छात्रों किस सिस्टम से प्रवेश दिया जाएगा। रविवि समेत अन्य राजकीय विवि से जुड़े राज्य में करीब 250 सरकारी कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में यूजी व पीजी में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा नहीं होती बल्कि बारहवीं में मिले नंबरों के आधार पर ग्रेजुएशन में प्रवेश दिया जाता है।
इसके बाद ग्रेजुएशन में मिले नंबरों के आधार पर पीजी में प्रवेश होता है। सभी मेरिट लिस्ट सामान्य व आरक्षित वर्ग के आधार पर तैयार की जाती है। जानकारों का कहना है कि जून के पहले हफ्ते से यूजी में दाखिले के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
लेकिन इस बार आरक्षण में एडमिशन उलझेगा। शासन से इस संबंध में जब तक निर्देश जारी नहीं हो जाते एडमिशन में देरी होगी। पिछली बार आरक्षण विवाद अक्टूबर में सामने आया था। इससे पहले ही कॉलेजों में दाखिले पूरे हो गए थे। इसलिए एडमिशन में इसका कोई असर नहीं हुआ था।
इधर आरक्षण का पेंच, उधर केंद्रीय विवि के लिए होगी प्रवेश परीक्षा : राज्य में आरक्षण विवाद की वजह से प्रवेश परीक्षाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। वहीं दूसरी ओर कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी)- यूजी 2023 की तैयारी की जा रही है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से यह प्रवेश परीक्षा 21 से 31 मई तक ली जाएगी। इस परीक्षा से केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर समेत देश के अन्य केंद्रीय और राजकीय विवि में प्रवेश दिए जाएंगे। इसके लिए फॉर्म पहले ही जमा हो चुके हैं। जल्द ही छात्रों के प्रवेश पत्र भी जारी कर दिए जाएंगे।
सिम्स के ओपीडी में भी मरीज और परिजनों की भीड़ लगने लगी है।
बिलासपुर में कोरोना के 31 नए केस मिले
बिलासपुर में कोरोना के 31 नए केस मिले :30 से ज्यादा मरीज अस्पताल में भर्ती, 10 की स्थिति गंभीर, 173 एक्टिव केस I
बिलासपुर में कोरोना संक्रमण से अब स्थिति बिगड़ने लगी है। पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसके बावजूद संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अमला निष्क्रिय है। न तो अस्पताल में कोरोना जांच सेंटर बढ़ाए जा रहे हैं और न ही टेस्टिंग और ट्रेसिंग पर ध्यान दिया जा रहा है। इधर, 10 पॉजिटिव मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है। सोमवार को 24 घंटे में 31 नए मरीज मिले हैं। वहीं, अब एक्टिव मरीजों की संख्या 173 पर पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसर कोरोना को लेकर अलर्ट जारी कर खानापूर्ति कर लिया है। भीषण गर्मी में अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या जिला अस्पताल और सिम्स में लगातार बढ़ रहे हैं। सोमवार को सिम्स में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे थे। लेकिन, यहां ज्यादातर मरीज न तो मास्क लगाए थे और न ही स्टाफ। परिसर में कोरोना जांच करने की व्यवस्था भी नहीं थी। आमतौर पर सामान्य मरीज के पहुंचने पर भी अस्पतालों में कोरोना जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन, शहर के सरकारी अस्पताल में इस तरह का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
अस्पताल में भर्ती होने लगे मरीज, बिगड़ रहे हालात एक बार फिर कोरोना वायरस अपने तेवर दिखाने लगा है। मौजूदा स्थिति में संभागीय कोविड अस्पताल, सिम्स के साथ अन्य निजी अस्पतालों में 30 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि इनमें से तकरीबन 10 मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं एक मरीज को रायपुर रेफर किया गया है। हालांकि, अभी ज्यादातर मरीज होम आइसोलेशन पर हैं। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी भी कोई निगरानी नहीं कर रही है।
सिम्स के एमआरडी सेंटर में पर्ची कटवाने के लिए कतार में लगे मरीज।
लोगों की लापरवाही का नतीजा जिले में शहर के साथ ही अब ग्रामीण इलाकों में भी कोरोना के मरीज मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके बाद भी लोग कोरोना को लेकर सावधानी नहीं बरत रहे हैं। उनकी लापरवाही का नतीजा बढ़ते मरीजों के रूप में सामने आने लगा है।
नियंत्रण का दावा, लेकिन थम नहीं रहे मरीज इधर, स्वास्थ्य विभाग के अफसर कोरोना संक्रमण से हर संभव नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। लेकिन, अफसरों के साथ मैदानी कर्मचारियों की निष्क्रियता के चलते संक्रमितों की संख्या कम होने के बजाए लगातार बढ़ रहे हैं। सोमवार 31 मरीज मिलने की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है। जबकि, 602 मरीजों की ही कोरोना जांच की गई है। स्थिति यह है कि अब शहर के अमूमन सभी इलाकों में कोरोना संक्रमण ने पांव पसार लिया है।
धर्मांतरण का सच बता रहे आदिवासी:बस्तर, सरगुजा में जनजातियों के घरों से हटवाई देवी-देवताओं की तस्वीरें
धर्मांतरण का सच बता रहे आदिवासी: बस्तर, सरगुजा में जनजातियों के घरों से हटवाई देवी-देवताओं की तस्वीरें I
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण एक बड़ा सियासी मुद्दा है। ये मुद्दा भले ही आज की तारीख में चर्चा में अधिक है। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि बीते 10-15 साल से धीरे-धीरे ये मुद्दा न सिर्फ प्रदेश के जंगली इलाकों में फला-फूला बल्कि बहुत से हिस्सों में छा चुका है।
वो आदिवासी जिनसे छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में पहचाना जाता है। अब उनकी मान्यताएं, परंपराएं बदल रही हैं। यही बदलाव बस्तर से सरगुजा तक टकराव का कारण बन रहा है। सियासी लोग और सामाजिक संस्थाएं कहती हैं, धर्मांतरण हो रहा है। जनता ने जिन्हें सत्ता की कमान सौंपी है वो इस बात से इनकार करते दिखते हैं।
क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का सच…
रायपुर में रविवार को जनजाति सुरक्षा मंच के कार्यक्रम में बस्तर, अंबिकापुर, जशपुर, रायगढ़, कांकेर, नारायणपुर के आदिवासी पहुंचे थे। इनकी मांग है कि धर्म बदल चुके आदिवासियों को आरक्षण के फायदे से अलग किया जाए। इस प्रक्रिया को डी-लिस्टिंग कहा जाता है। यहां आए प्रदेशभर के आदिवासियों ने इस सवाल का जवाब दिया कि क्या आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण होता है ?
देवी-देवताओं की तस्वीरें हटवाते हैं… बस्तर जिले से रायपुर आई बालमति नागेश ने बस्तर जिले के दूर-दराज के गांवों का हाल बयां किया। उन्होंने बताया, पिछले साल मेरे परिचय के कुछ आदिवासी परिवार ईसाई मान्यताओं के साथ जीने लगे। इसी तरह कई गांवों में ये पिछले कुछ सालों में हुआ है। ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले लोगों से मिलते हैं, गरीबी दूर करने, स्वास्थ्य लाभ देने (चंगाई सभा ले जाकर), शिक्षा की सुविधा दिलाने की बात कहकर प्रलोभन देकर ईसाई बनाया गया है।
वो कहते हैं कि यदि किसी घर का एक सदस्य ईसाई मान्यताओं के साथ जीना शुरू करता है तो उसके पूरे परिवार और रिश्तेदारों को ईसाई बनने को कहा जाता है। इसके बाद देवी देवताओं की तस्वीरों को हटवाया जाता है। तुलसी चौरा को ताेड़ने, तुलसी के पौधे को हटाने जला देने को कहा जाता है। ऐसा बहुत से ग्रामीण कर भी रहे हैं।
बिंसू ने अपने परिवार में ही धार्मिक मान्यताओं में बदलाव और विवाद देखा है।
मेरे चाचा ईसाई बन गए कांकेर जिले के अमाबेड़ा गांव से आए आदिवासी युवक ने बिंसु राम मंडावी ने बताया कि हमारे इलाके में ईसाई धर्म का प्रचार होता है। कई आदिवासी समुदाय के लोग चर्च में प्रार्थना करने जाते हैं। मैंने देखा है कि गांव में कुछ लोग उन्हें फिर से हिंदू मान्यताओं से जीने को कहते हैं तो विवाद होता है, मगर बात थाने तक नहीं जाती, वो लोग नहीं मानते और ईसाई परंपरा के अनुसार जी रहे हैं। मेरे छोटे चाचा को भी वो लोग ले जाकर ईसाई बना दिए।
अंबिकापुर से आईं श्याम कुमारी कुजूर ने कहा, उन्हें भी ईसाई बनाने का प्रयास कुछ लोगों ने किया। उनसे कहा कि आप भी चर्च आया करें, जीवन के कष्ट दूर होंगे। मगर इसके जवाब में श्याम कुमारी ने उनसे कह दिया कि हम अपने पुरखों को नहीं छोड़ेंगे, उनकी बताई जीवनशैली में ही जीना है और उसी में हम खुश हैं।
रायपुर में हुई डी-लिस्टिंग सभा में अखंड भारत दिखाया गया।
मान्यताएं बदली जाती हैं नाम नहीं, इसी पर विवाद हैं।
अब प्रदेश में इसी बात पर विवाद है। रविवार को इसी वजह से रायपुर में डी लिस्टिंग सभा की गई। जिसमें मांग की गई कि जो धर्म बदल चुके हैं उन्हें सरकार से आदिवासियों को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए। इसी वजह से प्रदेश के कई गांवों में टकराव और हिंसा के हालात बने हैं।
क्या कानून धर्म बदलने की इजाजत देता है, नियम क्या है ?
धर्म को बदलने का एक एफिडेविट बनवाना होता है। इसमें अपना बदला हुआ नाम, पुराना धर्म, और एड्रेस लिखना होता है।
फिर किसी राष्ट्रीय दैनिक अखबार में अपने धर्म परिवर्तन की जानकारी क विज्ञापन प्रकाशित करना होता है।
सरकारी तौर पर इसे दर्ज करने के लिए गजट ऑफिस में आवेदन करना होता है, कलेक्टर को जानकारी दी जाती है।
कानूनी तरीके से कोई भी अपना धर्म आसानी से बदल सकता है.
कानून कहता है कि हर किसी को अपनी पसंद के धर्म का चयन करने के लिए स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए।
कानून कहता है कि कोई भी अपनी मर्जी से अपना धर्म बदल सकता है, ये उसका निजी अधिकार है।
कानून ये भी कहता है कि किसी को डरा-धमका या लालच देकर धर्म परिवर्तन नहीं करा सकते।
रायगढ जिले के आमानारा गांव में 2019 में लोगों ने धर्म बदला था। इसके बाद गांव में एक चर्च बन गया। इसके अलावा ईसाई समुदाय के लिए अलग से कब्रिस्तान भी बना दिया गया।
कोई जबरन धर्म परिवर्तन करवाए तो केंद्रीय स्तर पर, भारत में कोई कानून नहीं है जो जबरन ‘धर्म परिवर्तन के मामले में कार्रवाई की बात करता हो। 1968 में ओडिशा और मध्य प्रदेश ने बल से ‘धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कुछ अधिनियमों को पारित किया। उड़ीसा के ‘धर्म परिवर्तन विरोधी कानून में अधिकतम दो साल की कारावास और जुर्माना लगाया गया जाता है।
तमिलनाडु और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में इसी तरह के कानून पारित हुए, जिसने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 295 ए और 298 के तहत अपराध के रूप में इस पर कार्रवाई होती है। इन प्रावधानों के अनुसार जबरदस्ती ‘धर्म परिवर्तन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को कारावास के साथ दंडित किए जाने का प्रावधान है। छत्तीसगढ़ में हमेशा प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ये बात मीडिया में कहते रहे हैं, कि कोई भी जबरन किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता, इसकी शिकायत मिलने पर हम सख्त कार्रवाई करेंगे।
खाट की एंबुलेंस में तड़पता रहा घायल, 10 किमी पैदल चले पर नहीं आई 108
खाट की एंबुलेंस में तड़पता रहा घायल, 10 किमी पैदल चले पर नहीं आई 108 I
बस्तर जिले के बोदली पंचायत के कचेनार गांव तक सड़क नहीं है। गुरुवार की शाम को इस गांव का कमलू पुत्र पंडरू (14) इमली तोड़ते हुए पेड़ से गिरकर घायल हो गया। गांव में कोई चिकित्सा सुविधा नहीं होने से स्वजन जंगली जड़ी-बूटी से कमलू का उपचार करते रहे। सुबह हुई तो ग्रामीण खाट को एंबुलेंस बनाकर घायल कमलू को अस्पताल तक पहुंचाने 10 किमी पैदल चल कर सुबह नौ बजे एरपुंड पंचायत के मालेवाही पहुंचे। यहां से 108 वाहन को सूचना दी गई। ग्रामीण पांच घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे और इस बीच घायल कमलू दर्द से तड़पता रहा।
सात-आठ बार सूचना देने के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं आई तो ग्रामीण उम्मीद हार बैठे। घायल कमलू की परेशानी देखकर स्वजन दंतेवाड़ा जिले के बारसूर पहुंचे और निजी स्कार्पियो वाहन को बुक करवाया और घायल को दोपहर तीन बजे बारसूर अस्पताल लेकर पहुंचे। आखिरकार नौ घंटे बाद घायल कमलू का उपचार शुरू हो सका। एरपुंड से जिला मुख्यालय बस्तर की दूरी लगभग 120 से 130 किमी है। दंतेवाड़ा जिले की दूरी मात्र 35 किमी है। जिले के सीमा क्षेत्र का गांव होने के कारण शासन-प्रशासन का ध्यान गांव के विकास की ओर नहीं है।
बस्तर में सैकड़ों गांव अब भी पहुंचविहीन
बस्तर के दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर सहित अन्य जिले में सैकड़ों गांव ऐसे हैं जो पहुंचविहीन हैं। शासन-प्रशासन यहां तक सड़क बिछाने का प्रयास कर रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने से भी सड़कों के निर्माण में बाधा आती है। इसके बाद भी सुरक्षा बल की सहायता से कई क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाई गई है। इससे उन गांव तक शासन-प्रशासन की पहुंच संभव हो सकी है। बस्तर के अंदरुनी क्षेत्रों में बन रही सड़कों का नक्सली भी विरोध कर रहे हैं। ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित नहीं होने व सड़कों की चौड़ाई को लेकर भी कई क्षेत्र में ग्रामीणों को सामने रखकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट मामले में BJP के 8 नेताओं को मिला नोटिस
सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट मामले में BJP के 8 नेताओं को मिला नोटिस , 17 अप्रैल तक मांगा जवाब I
बिरनपुर मामले ( Bemetara Violence) में भाजपा नेताओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। जिसके बाद भाजपा नेताओं को नोटिस जारी किया गया है। वहीं इस मामले में सोमवार 17 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक जवाब मांगा गया है। बता दें कि, कांग्रेस ने भाजपा नेताओं द्वारा सोशल मीडिया में किए गए भड़काऊ पोस्ट और धार्मिक विद्वेष फैलाने की नीयत से किए गए ट्वीट, फेसबुक पोस्ट, अखबारों में बयानबाजी करने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है।
कांग्रेस ने अपने शिकायत पत्र में कहा कि, छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर गांव में दो गुटों के झगड़ों के बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतागण लगातार धार्मिक विद्वेष भड़काने वाला बयान दे रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने तो छत्तीसगढ़ की संज्ञा पाकिस्तान और तालिबान से करके राज्य के जनमानस की भावनाओं को आहत कर सांप्रदायिक उन्माद भड़काने का प्रयास कर चुके हैं। भाजपा के अधिकृत ट्वीटर हैंडल और भाजपा के कई नेताओं के ट्विटर हैंडल और प्रदेश भाजपा के अधिकृत हैंडल BJP4CGState से भी लगातार विद्वेष भड़काने वाला पोस्ट किया गया है।
भाजपा पदाधिकारी जिन्हें हेट स्पीच के लिए नोटिस जारी किया गया है
3. केदार नाथ गुप्ता -भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ अध्यक्ष
4. योगी साहू- मंडल अध्यक्ष भाजपा युवा मोर्चा
5. कमल शर्मा- विभाग संयोजक भाजपा युवा मोर्चा
6. शुभांकर -भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष डीडी नगर
7. नंदन जैन- कोषाध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा
8. बिट्टू पानीग्रही- भाजपा कार्यकर्ता
बिरनपुर हिंस मामले में राज्य शासन के द्वारा महादेव कावरे कमिश्नर दुर्ग को हत्याकांड के संबंध में जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने 18 अप्रैल शाम 5 बजे तक आयुक्त कार्यालय दुर्ग में किसी तरह की कोई जानकारी देने वाले के संबंध में निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी तरह की कोई जानकारी देने वाले के संबंध में व्यक्ति कार्यालय में पहुंचकर या ईमेल आईडी से मेल कर सकते हैं या व्हाट्सएप नंबर पर जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
गौरतलब है कि बेमेतरा के बिरनपुर हिंसा के बाद प्रशासन सख्त हो गई है। लगातार सोशल मीडिया की निगरानी कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया का दुरूपयोग कर कुछ लोग हिंसा और नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर पुलिस सख्ती से कार्रवाई कर रही है।
बिलासपुर कोरोना अपडेट: धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण ने बिलासपुर में गति पकड़ी
बिलासपुर कोरोना अपडेट: धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण ने बिलासपुर में गति पकड़ी I जिस बात का डर रहा, अब वही हो रहा है, जिलेवासी कोरोना को लेकर लगातार लापरवाही बरत रहे है। परिणाम स्वस्र्प कोरोना संक्रमण के मामले धीरे-धीरे बढ़ते ही जा रहे है। गुरुवार को एक साथ 15 मरीज की पहचान की गई है। साफ है कि अब भी यदि लोग लापरवाही बरतेंगे तो जल्द ही जिले में कोरोना विस्फोट हो सकता है। जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।
कोरोना महामारी के गंभीर परिणाम से सभी परचित है। वही स्वास्थ्य विभाग का भी कहना है कि मौजूदा समय बेहद संवेदनशील है, ऐसे में कोरोना गाइडलाइन का पालन करना जस्र्री हो चुका है, लेकिन जिलेवासी इसे जरा भी गंभीरता से नहीं ले रहा है, वही अब इसके दुष्परिणाम भी बढ़ते मामलों के रूप में सामने आने लगा है।
एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशन में अब तक जांच शुरू नहीं
एक ओर तो स्वास्थ्य विभाग जिलेवासियों से कोरोना गाइडलाइन का पालन कर रही है। वही दूसरी ओर इनके कोरोना नियंत्रण कार्य ने गति नहीं पकड़ा है। राज्य शासन ने भी एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन में कोरोना जांच शुरू करने के निर्देश दे दिए है, लेकिन अभी तक जिले की स्वास्थ्य विभाग दोनों स्थान में जांच केंद्र नहीं खोल पाई है। जबकि कोरोना मरीजों की जांच में यह बात सामने आ रहे है कि जितने भी मरीज मिल रहे है, उनमे से आधे की ट्रेवल हिस्ट्री निकल रही है, जो जांच के दायरे में नहीं आने से लोगों को भी संक्रमित कर रहे है।