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  • टीएस सिंहदेव और आदित्येश्वर सिंहदेव ने अंगदान में महत्वपूर्ण कदम उठाया

    टीएस सिंहदेव और आदित्येश्वर सिंहदेव ने अंगदान में महत्वपूर्ण कदम उठाया

    टीएस सिंहदेव और आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने अंगदान के क्षेत्र में उठाया महत्वपूर्ण कदम

    पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और उनके भतीजे आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए अंगदान का संकल्प लिया है। गुरुवार को भारत सरकार की ओर से उन्हें विधिवत अंगदान प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। यह कदम न केवल उनके सामाजिक दायित्व को दर्शाता है बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता और प्रेरणा का भी संकेत देता है।

    अंगदान के महत्व पर जोर देते हुए सिंहदेव का बयान

    टीएस सिंहदेव ने अंगदान के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यह समाज के प्रति एक आवश्यक जिम्मेदारी है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय समाज में अंगदान को लेकर कुछ हिचकिचाहट और परंपरागत अड़चनों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, यदि मृत्यु के बाद किसी जरूरतमंद के लिए शरीर के अंगों को उपलब्ध कराया जा सके, तो यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य है।

    छत्तीसगढ़ में अंगदान की दिशा में किए गए प्रयास

    सिंहदेव ने अपने स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल के दौरान महसूस किया कि छत्तीसगढ़ में अंगदान और टिश्यू बैंक से संबंधित संस्थाओं की कमी थी। इस कमी को दूर करने के लिए उन्होंने रोटो (रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) और सोटो (स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) की स्थापना की, साथ ही एक टिश्यू बैंक भी स्थापित किया। इससे राज्य में अंगों की उपलब्धता में काफी सुधार हुआ, विशेषकर लीवर और किडनी जैसी महत्वपूर्ण अंगों की।

    अंगदान की प्रक्रिया और इसके लाभ

    अंगदान की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए, सिंहदेव ने कहा कि ब्रेनडेड व्यक्ति के अंगों को मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रमाणित किए जाने के बाद सर्जरी दल द्वारा प्राप्त किया जाता है। सामान्य मृत्यु की स्थिति में भी, मृत्यु के छह घंटे के भीतर आंखों के कॉर्निया और अन्य उत्तकों को प्राप्त किया जा सकता है। अंगदान के महत्व को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि एक आंख की कॉर्निया से दो लोगों को नेत्र ज्योति प्राप्त हो सकती है।

    आर्यन सिन्हा, जो रेडक्रास सोसायटी के आजीवन सदस्य हैं और पिछले तीन वर्षों से रक्तदान और अंगदान महादान कार्यक्रम चला रहे हैं, ने अब तक 5,000 लोगों से अंगदान की प्रतिज्ञा प्राप्त की है। उनके कार्यों ने न केवल अंगदान के महत्व को उजागर किया है, बल्कि उन्होंने हाल ही में जयपुर में आयोजित एक कांक्लेव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व भी किया।

    समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता

    टीएस सिंहदेव और आदित्येश्वर शरण सिंहदेव के इस प्रेरणादायक निर्णय ने अंगदान के प्रति समाज की जागरूकता को बढ़ावा दिया है और दूसरों को भी इस महत्वपूर्ण कार्य की ओर प्रेरित किया है। उनके द्वारा उठाए गए इस कदम ने समाज में अंगदान के महत्व को एक नया आयाम दिया है, और इस क्षेत्र में और भी लोगों को प्रेरित करने का कार्य किया है।

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  • रतनपुर के शरद कुमार एनिकट में गिरकर हुआ लापता खोजबीन जारी

    रतनपुर में शरद कुमार की लापता होने की घटना पर परिजनों की हालत नाजुक

    रतनपुर क्षेत्र के चोरहा देवरी निवासी 11वीं कक्षा के छात्र शरद कुमार की अचानक लापता होने की खबर ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। बताया जा रहा है कि शरद कुमार अपनी चप्पल लेने के लिए एनिकट में कूद पड़ा, लेकिन गहरे पानी की वजह से वह डूब गया। इस घटना के बाद से शरद का कोई अता-पता नहीं चल पाया है और उसकी तलाश की जा रही है।

    परिजनों की हालत चिंताजनक, खोजबीन में जुटी टीमें

    घटना के बाद परिजनों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, और वे अपने बच्चे की सुरक्षित वापसी की उम्मीद में हैं। स्थानीय मछुआरों की मदद से कई घंटों तक शरद की खोजबीन की गई, लेकिन उसे खोजने में सफलता नहीं मिल पाई।

    पुलिस और एनडीआरएफ की टीम ने शुरू की खोजबीन

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू की। पानी में गहराई और जटिल परिस्थितियों के कारण खोजबीन में काफी मशक्कत करनी पड़ी। टीम ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन शरद का पता नहीं चल सका।

    खोजबीन की मुश्किलें और इंतजार

    पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें लगातार कोशिश कर रही हैं, लेकिन गहरे पानी और बाढ़ के कारण स्थिति कठिन हो गई है। अभी भी शरद की तलाश जारी है और उसके परिवारवालों के लिए हर गुजरता पल बेहद कठिन और चिंताजनक है।

    इस दर्दनाक घटना ने इलाके को झकझोर कर रख दिया है, और हर कोई शरद की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहा है। खोजबीन की प्रक्रिया को लेकर पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें आशान्वित हैं कि जल्द ही कोई सकारात्मक जानकारी प्राप्त होगी।

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  • शहर के कोचिंग सेंटरों में नियमों की अनदेखी, सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

    शहर के कोचिंग सेंटरों में नियमों की अनदेखी, सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

    मनमानी फीस और गलत वादों से गुमराह हो रहे छात्र, कोचिंग सेंटरों पर उठे सवाल

    बिलासपुर शहर के कोचिंग सेंटरों में मापदंडों की अनदेखी और मनमानी की खबरें सामने आई हैं। ज्यादातर सेंटर तय नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के नाम पर छात्रों और उनके अभिभावकों को गुमराह किया जा रहा है। इसके साथ ही, मनमाना फीस भी वसूला जा रहा है।

    कोचिंग सेंटरों में एक साथ 100 से 150 छात्रों को बंद कमरों में ठूंस-ठूंसकर पढ़ाया जा रहा है। यह स्थिति ऐसी है कि भेड़-बकरी की तरह छात्रों को एक ही हॉल में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे सभी पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। प्रतियोगी परीक्षा पास कराने के नाम पर छात्रों के अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने का सिलसिला जारी है।

    सुरक्षा मापदंडों की बात करें तो लगभग सभी सेंटरों में इनका पालन नहीं हो रहा है। टीचिंग हॉल्स में वेंटिलेशन और हवादार व्यवस्था नहीं है, और आपातकालीन द्वार का भी अभाव है। ऐसे हालात में किसी आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

    जब मीडिया की टीम ने सीएमडी चौक स्थित वैबरेंट अकादमी का जायजा लिया, तो बाहर से सेंटर मापदंडों के अनुरूप दिखा, लेकिन अंदर हालात बिल्कुल विपरीत पाए गए। हॉल को पूरी तरह से बंद रखा गया था, जहां छात्रों को पढ़ाया जा रहा था। आचार्या अकादमी और तक्षशिला अकादमी में भी सुरक्षा के नियमों की अनदेखी की गई। खासकर तक्षशिला अकादमी में फायर सेफ्टी के इंतजाम न के बराबर थे।

    इन कोचिंग संस्थानों की अनदेखी और सुरक्षा में चूक से गंभीर हादसे की आशंका बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद भी मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से इस पर कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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  • अंबिकापुर-बिलासपुर हाईवे पर अनियंत्रित ट्रेलर ने दो युवकों की ली जान

    अंबिकापुर-बिलासपुर हाईवे पर अनियंत्रित ट्रेलर ने दो युवकों की ली जान

    राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोयला लोड ट्रेलर ने मोटरसाइकिल को मारी टक्कर दो लोगों की मौके पर मौत

    अंबिकापुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मोहनपुर मोड़ के पास एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना ने आज दो ज़िंदगियाँ छीन लीं। कोयले से लदा एक ट्रेलर तेज़ रफ़्तार में अनियंत्रित होकर सामने से आ रही मोटरसाइकिल से टकरा गया। टक्कर इतनी भयानक थी कि मोटरसाइकिल सवारों के शव पहचान से परे हो गए और वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अंबिकापुर की ओर बढ़ता हुआ ट्रेलर मोड़ पर नियंत्रण खो बैठा और मोटरसाइकिल को टक्कर मारते हुए सड़क किनारे खेत में जा पलटा। हादसे के बाद ट्रेलर चालक और क्लीनर मौके से भाग निकले। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर शवों को मोर्चरी भेज दिया, हालांकि उनकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है।

    यह मोड़ पहले भी कई दुर्घटनाओं का गवाह बन चुका है, लेकिन अब तक सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। सड़क पर साइन बोर्ड और सुरक्षा संकेतक की कमी ने एक और दर्दनाक हादसे को जन्म दिया है ।

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  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय खेल दिवस पर खिलाडियों को किया सम्मानित

    रायपुर में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का किया गया सम्मान

    राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर गुरुवार को रायपुर में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित खेल अलंकरण समारोह में राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुरस्कार वितरित किए। वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए कुल 97 खिलाड़ियों को 76 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई, जबकि 502 पदक विजेताओं के बैंक खातों में 60.33 लाख रुपये अंतरित किए गए। इस प्रकार, कुल एक करोड़ 36 लाख 33 हजार रुपये की राशि खिलाड़ियों को प्रदान की गई।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की, और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, और खेल मंत्री टंकराम वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

    2021-22 के लिए पुरस्कार

    वर्ष 2021-22 के लिए शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार से ओलिंपिक और नॉन-ओलिंपिक खेलों के खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इनमें आशीष कुमार (सॉफ्टबॉल), चित्रा (हैंडबॉल), मोना पटेल (फेंसिंग), विजय कुमार (वेटलिफ्टिंग), डी पार्थ (वुशु), और हरिहर सिंह राजपूत (व्हीलचेयर फेंसिंग) शामिल हैं।

    शहीद कौशल यादव पुरस्कार के तहत सुभाष लहरे (वेटलिफ्टिंग), दुष्यंत निषाद (सॉफ्टबॉल), एम रवि राव (हैंडबॉल), श्रेया शुक्ला (किक बॉक्सिंग), संजीव कुमार (नेटबॉल), और रजनी जोशी (पैरा जूडो) को सम्मानित किया गया।

    2022-23 के लिए पुरस्कार

    वर्ष 2022-23 के लिए शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार बीरु बाघ (सॉफ्टबॉल), रेशु साहू (फेंसिंग), कृति साह (हैंडबॉल), और ईश्वरी निषाद (पैरा एथलेटिक्स) को दिया गया।

    शहीद पंकज विक्रम सम्मान के तहत दिव्या भारती और सत्येंद्र यादव (कुश्ती), पवन दास और अनन्या दुबे (टेबल टेनिस), सीमा चौटेल और धन सिंह चंद्राकर (वुशु), अंकिता पटेल (खो-खो), और वर्षा सोनकर (हॉकी) को सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम में शहीद विनोद चौबे, वीर हनुमान सिंह, और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से भी कई खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया, जिनमें विभिन्न खेलों के कोच और खिलाड़ी शामिल थे।

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  • कुश्ती और पैरा जूडो में धमतरी की बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम

    कुश्ती और पैरा जूडो में धमतरी की बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम

    कुश्ती और पैरा जूडो में धमतरी की बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम

    धमतरी जिले की कुश्ती खिलाड़ी दिव्या भारती और दिव्यांग पैरा जूडो खिलाड़ी रजनी जोशी को इस खेल दिवस पर रायपुर में सम्मानित किया जाएगा, जिससे उन्होंने जिले का गौरव बढ़ाया है। इन दोनों खिलाड़ियों की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है।

    रजनी जोशी: पैरा जूडो में स्वर्ण पदक का सफर

    रजनी जोशी, जो एक दिव्यांग पैरा जूडो खिलाड़ी हैं, ने वर्ष 2016 में अपने गांव में एक्जेक्ट फाउंडेशन दिव्यांग आवासीय प्रशिक्षण केंद्र से अपने सफर की शुरुआत की। इस केंद्र में शिक्षा के दौरान उन्हें पता चला कि दिव्यांगों के लिए भी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। पहली बार राज्य स्तरीय पैरा जूडो प्रतियोगिता में भाग लेते ही उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी सफलता मिली, जहां उन्होंने एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। उनके पास राष्ट्रीय स्तर पर छह पदक हैं। इस सफर में उन्हें लक्ष्मी सोनी, शशि निर्मलकर, और रूबी कुर्रे जैसी शिक्षिकाओं का विशेष सहयोग मिला। रजनी ने अपने जीवन में मिले समर्थन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया है।

    दिव्या भारती: छत्तीसगढ़ की शेरनी का राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा

    दूसरी ओर, ग्राम भानपुरी की दिव्या भारती ने वर्ष 2014 से कुश्ती खेलना शुरू किया। उन्हें इस खेल की प्रेरणा अपनी बड़ी बहन से मिली, जिन्होंने पहले से ही कुश्ती में रुचि दिखाई थी। दिव्या ने अपने खेल सफर की शुरुआत स्कूल गेम्स से की, जहां उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। धमतरी में ही उन्होंने कोच की देखरेख में अभ्यास करना शुरू किया। रोज सुबह चार से सात बजे तक और शाम को छह से साढ़े सात बजे तक वे लगातार अभ्यास करती थीं।

    राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता

    दिव्या ने 2014 से अब तक छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए 17 राष्ट्रीय स्तर के मैच खेले हैं। उन्हें चार बार “छत्तीसगढ़ शेरनी” का खिताब मिला है, और उन्होंने ओपन मिट्टी दंगल राष्ट्रीय प्रतियोगिता में तीन पदक जीते हैं। 2017 से 2024 तक उन्होंने लगातार आठ बार सीनियर नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया है। उनकी इस उपलब्धि के कारण 2023-24 में उन्हें शहीद पंकज विक्रम सम्मान के लिए भी चुना गया है।

    समर्थन और प्रेरणा के लिए आभार

    दिव्या अपने परिवार, कोच और छत्तीसगढ़ राज्य कुश्ती संघ के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करती हैं। उनके पति गोविंद साहू ने भी उन्हें खेल के प्रति प्रेरित किया, जिसके कारण आज उन्हें यह सम्मान मिल रहा है।

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  • छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू का प्रकोप

    छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू का प्रकोप

    स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों पर छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग की आपात बैठक

    छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंताएँ बढ़ गई हैं। अब तक स्वाइन फ्लू से सात लोगों की मौत हो चुकी है, और 19 से अधिक मामले सामने आए हैं। मंगलवार को रायपुर में 16 संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई, जिनके स्वाब के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

    प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान, अंबेडकर अस्पताल, के पेइंग वार्ड को स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए विशेष रूप से आरक्षित किया गया है। वर्तमान में यहां चार मरीज भर्ती हैं। वहीं, बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में चार बेड का आइसोलेटेड वार्ड तैयार किया गया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में डायरिया और स्वाइन फ्लू के मामलों की वर्तमान स्थिति, रोकथाम और इलाज के लिए की जा रही तैयारियों पर चर्चा की गई। प्रदेश के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन भी इस बैठक में शामिल थे।

    स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षणों में सामान्य सर्दी, खांसी, कफ, सिर और हाथ-पांव में दर्द शामिल हैं। स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है, और खांसी के कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। इस बीमारी से बचाव के लिए कोरोना की तरह ही मास्क पहनने और अन्य सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।

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  • इंदौर में कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए विदेशों से आ रहे लोग

    इंदौर में कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए विदेशों से आ रहे लोग

    इंदौर की शासकीय अस्पतालों में कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए विदेशों से आ रहे लोग

    दौर में कॉस्मेटिक सर्जरी के क्षेत्र में एक नई लहर देखी जा रही है, जिसमें अब लड़कियों के साथ-साथ लड़के भी शामिल हैं। विशेष रूप से, पुरुषों में बढ़ते स्तन की समस्या जिसे गाइनेकोमेस्टिया कहा जाता है, के इलाज के लिए सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो रही है। इस सर्जरी की मदद से कई पुरुषों ने पुलिस और आर्मी में भर्ती होने का सपना पूरा किया है।

    इंदौर के सरकारी अस्पतालों में कई प्रकार की सर्जरी मुफ्त में की जा रही हैं, जिससे युवाओं को सुंदरता और सेहत का बेहतरीन संयोजन मिल रहा है। इस बदलाव के पीछे मेडिकल साइंस की मदद स्पष्ट है, जो युवाओं को आत्म-विश्वास बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है।

    शहर के युवाओं में सुंदरता की इच्छा तेजी से बढ़ रही है। युवतियां गालों पर डिंपल बनवाने के लिए सर्जरी करवा रही हैं, वहीं युवक ब्रेस्ट सर्जरी के माध्यम से अपने लुक को सुधार रहे हैं। निजी और सरकारी अस्पतालों में ये सर्जरी अपेक्षाकृत कम खर्च में की जा रही हैं, जिससे देश के अन्य हिस्सों और विदेशों से भी लोग इंदौर आ रहे हैं।

    BOLLYWOOD ACTERESS : AFTER SURGERY

    इंदौर के एमवाय अस्पताल में डिंपल सर्जरी, सिक्स पैक, चर्बी कम करने, नाक और होंठ की सर्जरी जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। कुछ सर्जरी मुफ्त भी की जा रही हैं, और पोस्ट सर्जरी दवाएं भी यहां मुफ्त में मिलती हैं। इस वजह से मध्य प्रदेश के बड़े शहरों और देश के अन्य हिस्सों से लोग इंदौर की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

    इस सर्जरी से न केवल शारीरिक सौंदर्य में सुधार हो रहा है, बल्कि लोगों के आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है। गाइनेकोमेस्टिया जैसी समस्याओं के निदान से पुरुषों को आत्म-विश्वास प्राप्त हो रहा है, जिससे उनकी जिंदगी में नया उत्साह भर गया है।

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  • ऋताभरी चक्रवर्ती ने टॉलीवुड पर लगाए यौन उत्पीड़न का आरोप

    ऋताभरी चक्रवर्ती ने टॉलीवुड के बड़े नामों पर लगाए गंभीर आरोप

    बंगाली फिल्म अभिनेत्री ऋताभरी चक्रवर्ती ने हाल ही में टॉलीवुड के कई प्रमुख प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और एक्टर्स पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के माध्यम से इस मामले को उजागर किया, हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है। ऋताभरी का कहना है कि उनके साथ-साथ कई अन्य अभिनेत्रियों को भी यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया है।

    ऋताभरी ने इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मदद की गुहार लगाई है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ है।

    अभिनेत्री का कहना है कि जिन लोगों ने उनके साथ यह किया, वे बिना किसी परिणाम का सामना किए अपना काम कर रहे हैं और वे समाज में प्रभावशाली भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अभिनेत्री इनकी हरकतों का विरोध करती है तो उसे कभी भी कास्ट नहीं किया जाएगा। ऋताभरी ने मांग की है कि बंगाली फिल्म उद्योग में भी एक स्वतंत्र जांच और सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाए।

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  • कोलकाता में ‘नबन्ना प्रोटेस्ट’ के तहत छात्रों का जोरदार विरोध हावड़ा हुआ सील

    कोलकाता में ‘नबन्ना प्रोटेस्ट’ के तहत छात्रों का जोरदार विरोध हावड़ा हुआ सील

    कोलकाता में ‘नबन्ना प्रोटेस्ट’ के तहत छात्रों का जोरदार विरोध, हावड़ा ब्रिज हुआ सील

    पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आरजी कर अस्पताल की महिला प्रशिक्षु डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। छात्र संगठनों का आरोप है कि ममता बनर्जी सरकार इस मामले से सही तरीके से निपटने में नाकाम रही है। इसके विरोध में छात्रों ने ममता बनर्जी से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है।

    प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तिरंगा झंडा और पोस्टर लेकर राज्य सचिवालय, नबन्ना की ओर मार्च किया। पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, बावजूद इसके बड़ी संख्या में छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस प्रदर्शन को भाजपा का समर्थन भी प्राप्त है, और इसे ‘नबन्ना प्रोटेस्ट’ नाम दिया गया है, जो हावड़ा स्थित नबन्ना भवन के सामने हो रहा है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता के हावड़ा ब्रिज को सील कर दिया गया है और सचिवालय के आसपास के मार्गों को बंद कर दिया गया है। हिंसा की आशंका के चलते इलाके को तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है, जिसमें 6000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। नबन्ना के आसपास 19 जगहों पर बैरिकेड लगाए गए हैं, कुछ स्थानों पर पांच-पांच एल्यूमीनियम बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं ताकि प्रदर्शनकारियों को रोका जा सके।

    शहर में तनावपूर्ण माहौल है, और प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था की है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जाए और राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए I

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