साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (SECL) ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल जमीन प्रबंधन प्रणाली (एलएएमएस) की शुरुआत की है। इस नई तकनीक से एक ही क्लिक में अधिग्रहण की गई भूमि का संपूर्ण रिकॉर्ड देखा जा सकता है। खदानों के विस्तार और ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शुरुआत में यह प्रक्रिया कुसमुंडा खदान के प्रभावित गांव खोडरी से की गई है और इसे आगे दीपका तथा गेवरा खदानों में भी लागू किया जाएगा।
एलएएमएस से भूमि पार्सल सीमाओं का दृश्यीकरण, मूल्यांकन, अतिक्रमण की ट्रैकिंग, और विवाद प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही एसईसीएल के सीएमडी-बोर्ड प्लेटफॉर्म पर प्रोजेक्ट्स और लंबित कार्यों की निगरानी भी हो सकेगी।
डिजिटल प्रणाली से भूमि अधिग्रहण में ड्रोन कैमरों का उपयोग किया गया है, जिससे रिकॉर्ड रखना आसान हुआ है। भविष्य में खदान विस्तार के चलते जिन गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी, उनकी जानकारी डिजिटल रूप में संरक्षित होगी, ताकि मुआवजा और रोजगार देने में किसी प्रकार की दिक्कत न आए। इस प्रणाली से 210 खातेदारों में से 113 को रोजगार की पात्रता दी जाएगी। काश्तकारी भूमि का मुआवजा 16.28 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से तय किया गया है।
कोरबा जिले के दीपका थाना पुलिस ने एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा खदान से बड़े पैमाने पर हो रही डीजल चोरी का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो खदान से डीजल चोरी करने में लिप्त थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2659 लीटर डीजल जब्त किया है, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 2,48,456 रुपये बताई जा रही है। इस गिरोह का भंडाफोड़ खदान के सुरक्षा निरीक्षक नंदलाल राय की शिकायत पर किया गया, जिन्होंने मुखबिर से सूचना मिलने पर पुलिस को सूचित किया था।
घटना का खुलासा
घटना तब सामने आई जब गेवरा खदान के सुरक्षा निरीक्षक नंदलाल राय को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग बोलेरो वाहनों में डीजल चोरी कर रहे हैं। मुखबिर की इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई की गई। खदान के सुरक्षा कर्मचारी, राकेश कुमार सिंह और सुधीर कुमार, घटनास्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि डोजर और डम्पर के पास डीजल बिखरा हुआ था। यह स्पष्ट संकेत था कि वहां से डीजल की चोरी हो रही थी। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने पुलिस को सूचना दी और मौके पर पुलिस ने पहुंचकर संदिग्धों को धर दबोचा।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया, जो इस डीजल चोरी के गिरोह में शामिल थे। इनके पास से 2659 लीटर डीजल बरामद किया गया, जिसे विभिन्न वाहनों से चुराया गया था। यह डीजल बाजार में लगभग 2.5 लाख रुपये का बताया जा रहा है। पुलिस ने डीजल चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहनों को भी जब्त किया है।
सुरक्षा के बावजूद चोरी
गौरतलब है कि एसईसीएल की गेवरा खदान देश की सबसे बड़ी खदानों में से एक है और यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। खदान की सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, जिसमें न केवल एसईसीएल के सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, बल्कि एक निजी कंपनी के कर्मचारी भी सुरक्षा में जुटे हुए हैं। खदान में चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। इसके बावजूद, डीजल चोरी की घटनाएं लगातार हो रही हैं, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
पुलिस की जांच
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और जांच जारी है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके अन्य सदस्यों की संलिप्तता कितनी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी का डीजल कहां बेचा जा रहा था और इस काम में खदान के भीतर से कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
डीजल चोरी की यह घटना खदान की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा मुद्दा बन गई है। खदान प्रशासन और पुलिस अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहे हैं। इससे पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इस बार की कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि चोरी की ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। पुलिस और सुरक्षा कर्मी अब और भी सतर्क होकर काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं फिर न हो सकें। यह मामला न केवल कोरबा जिले बल्कि देशभर की उन खदानों के लिए भी चेतावनी है, जहां से प्राकृतिक संसाधनों की चोरी होती रहती है।
राजस्थान के जवान ने कोरबा की खदान में खुद को मारी गोली
कोरबा जिले की कुसमुंडा खदान में सुरक्षा पर तैनात त्रिपुरा राइफल्स के एक जवान ने शुक्रवार रात अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। यह घटना कोल स्टॉक नंबर 29 के पास हुई, जहां जवान आजाद सिंह की सुरक्षा ड्यूटी लगी थी। जवान ने एके-47 राइफल से खुद को गोली मारी।
घटना के बाद त्रिपुरा राइफल्स और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड प्रबंधन में हड़कंप मच गया। कुसमुंडा थाना प्रभारी रूपक शर्मा ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू की और इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया।
यह घटना कुसमुंडा खदान में इस तरह की पहली घटना है, जिसके चलते पुलिस और फोरेंसिक टीम इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं। फिलहाल इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, लेकिन जांच के बाद ही असल स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
जानकारी के अनुसार, जवान आजाद सिंह राजस्थान के रहने वाले थे और कुसमुंडा में त्रिपुरा राइफल्स के अस्थाई कैंप जेआरसी क्लब में रह रहे थे। जवान के साथियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनकी पत्नी के साथ विवाद चल रहा था, जो उनकी मानसिक स्थिति पर असर डाल सकता है।
एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी सनीश के अनुसार, आजाद सिंह को वर्ष में तीन बार अवकाश दिया गया था। मामले की जांच चल रही है और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुंच चुके हैं।