सद्गुरु का दोहरा रवैया

जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और वी शिवगनम की पीठ ने ईशा फाउंडेशन के संस्थापक से सवाल करते हुए कहा कि सद्गुरु ने अपनी बेटियों की शादी कर दी है, लेकिन दूसरी युवतियों को संन्यास लेने की सलाह क्यों दे रहे हैं। जस्टिस शिवगनम ने यह भी कहा, “हम जानना चाहते हैं कि एक व्यक्ति जिसने अपनी बेटी को जीवन में अच्छी तरह से सेटल कर दिया, वह दूसरों की बेटियों को सिर मुंडवाने और एकांतवासी का जीवन जीने के लिए क्यों प्रोत्साहित कर रहा है?”
आरोपों का मामला
इससे पहले, एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनकी दो बेटियों का ब्रेनवॉश किया था और उन्हें जबरदस्ती ईशा योग केंद्र में कैद कर रखा गया था। इस आरोप पर ईशा योग केंद्र ने स्पष्ट किया है कि वहां सभी लोग अपनी इच्छा से रहते हैं और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जाती है।
सद्गुरु की पहचान
सद्गुरु, जिनका असली नाम जग्गी वासुदेव है, भारतीय धार्मिक और आध्यात्मिक हस्तियों में से एक हैं। उनके इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर 25 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वे तमिलनाडु के कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन चलाते हैं, और उनके बेंगलुरु और दिल्ली में भी केंद्र हैं।
सामाजिक चर्चा का विषय
कोर्ट के इस आदेश के बाद, ईशा फाउंडेशन की गतिविधियों और सद्गुरु के खिलाफ आरोपों की जांच पर देश भर में चर्चा होने की संभावना है। यह मामला न केवल आध्यात्मिक क्षेत्र में बल्कि समाज में भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
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