
जांजगीर-चांपा में सड़क अतिक्रमण से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, प्रशासन बेखबर
जांजगीर-चांपा जिले में सड़कों पर अतिक्रमण के चलते सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से इसे हटाने के लिए किसी भी तरह की ठोस पहल नहीं की जा रही है। जिले में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हर बार कलेक्टर द्वारा सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए जाते हैं, मगर राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी इन निर्देशों को नज़रअंदाज कर देते हैं।
पूर्व के निर्णयों की अनदेखी
सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व बैठकों में दुर्घटना रोकने के लिए विभिन्न निर्णय लिए गए थे, जिनमें दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बड़े संकेतक बोर्ड लगाने, स्पीड ब्रेकर, रेडियम, सीट बेल्ट और हेलमेट के उपयोग को प्रोत्साहित करने, बेसहारा मवेशियों को हटाने और यातायात नियमों के पालन हेतु जनजागरूकता अभियान चलाने जैसे उपाय शामिल थे। हालांकि, इन सभी निर्णयों पर अमल न होने से दुर्घटनाओं की समस्या जस की तस बनी हुई है।
उच्च न्यायालय के निर्देशों की भी अवहेलना
उच्च न्यायालय ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग और नगर पालिका क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं और एनएचएआई और स्थानीय अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। लेकिन अभी तक इन आदेशों पर कोई अमल नहीं किया गया है। प्रशासन और यातायात पुलिस की लापरवाही के कारण केवल वाहनों पर कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि असली समस्या अतिक्रमण की है।
दुर्घटनाओं के प्रमुख क्षेत्र
जिला मुख्यालय जांजगीर में खोखरा मोड़, पुलिस लाइन के सामने मुनुंद मार्ग, एनएच 49 पर पुटपुरा मोड़, तिलई मोड़ और तरौद चौक सहित कई क्षेत्रों में सड़क किनारे ठेला, कच्चे मकान, फ्लैक्स और होर्डिंग्स लगे होने से अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। इसी तरह, शिवरीनारायण के देवरी मोड़, मुलमुला तिराहा और त्रिमूर्ति चौक में भी अतिक्रमण के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा हुआ है।
प्रशासन की निष्क्रियता
हालांकि सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यातायात पुलिस केवल चालकों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि असली समस्या अतिक्रमण की वजह से हो रही दुर्घटनाओं की अनदेखी हो रही है।
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