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  • बकरी चोरी की ताजा घटना ने ग्रामीणों को किया चिंतित

    बकरी चोरी की ताजा घटना ने ग्रामीणों को किया चिंतित

    जगदीश मरकाम के परिवार की बकरियां चोरी

    पाली विकासखंड के ग्राम राहा में बकरी चोरी की एक और घटना ने ग्रामीणों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। चोरों ने जगदीश सिंह मरकाम के परिवार की कोठी में रात के समय घुसकर ताला तोड़ दिया और वहां बंधी 15 बकरियों को चोरी कर लिया। यह घटना उस समय घटी जब चोरों का गिरोह आधी रात को मरकाम के घर में दाखिल हुआ और बकरियों को गाड़ी में भरने लगा।

    परिवार की चिंता

    जगदीश सिंह मरकाम का परिवार बकरियों की बिक्री कर अपना जीवकोपार्जन करता है, और उनके लिए ये बकरियां न केवल आर्थिक संसाधन हैं, बल्कि परिवार का अहम हिस्सा भी हैं। जब बकरियों की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य जाग गए, तब उन्होंने तुरंत बाहर निकलकर देखा कि चोर बकरियों को गाड़ी में भर रहे हैं।

    ग्रामीणों की कोशिश

    मरकाम परिवार ने चोरों को पकड़ने के लिए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया, जिससे आसपास के ग्रामीण भी जाग गए। जब ग्रामीणों ने चोरों का पीछा करने की कोशिश की, तब तक चोर भागने में सफल हो गए। चोरों ने जंगल के रास्ते से भागने का प्रयास किया, जबकि ग्रामीणों ने बकरियों के चोरी होते देख अपनी मोटरसाइकिल पर चोरों का पीछा किया।

    पुलिस की कार्रवाई

    घटना की सूचना चैतमा चौकी को दी गई, जहां पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और मामला दर्ज कर लिया। हालांकि, अभी तक चोरों का कोई सुराग नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना क्षेत्र में बढ़ती अपराध दर का संकेत है और उन्हें इस समस्या का समाधान चाहिये।

    यह पहली बार नहीं है जब ग्राम पोड़ी-उपरोड़ा और पाली विकासखंड में बकरी चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले कुछ समय में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें चोर पकड़ में नहीं आ सके। केवल एक या दो मामलों में ही चोरों को गिरफ्तार किया गया है।

    ग्रामीणों की सुरक्षा और उनके जीवन-यापन को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय प्रशासन को इस समस्या का गंभीरता से समाधान करना होगा। बकरी चोरी की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर, ग्राम पंचायत को भी इस मामले में कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके।

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  • मेटा के शेयरों में वृद्धि से ज़करबर्ग की नेट वर्थ में इजाफा

    मेटा के शेयरों में वृद्धि से ज़करबर्ग की नेट वर्थ में इजाफा

    “ज़करबर्ग का 201 बिलियन डॉलर का सफर: कैसे मेटा ने बदली उनकी किस्मत”

    मार्क ज़करबर्ग ने हाल ही में 200 बिलियन डॉलर क्लब में शामिल होकर अपनी नेट वर्थ में अभूतपूर्व वृद्धि की है। ब्लूमबर्ग के बिलियनेयर इंडेक्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति अब 201 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वह दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।

    मार्क ज़करबर्ग का सफर

    ज़करबर्ग के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उन्होंने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव का सामना किया, लेकिन अपने इरादों पर दृढ़ रहते हुए उन्होंने आगे बढ़ते रहे। आज, वह दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। यदि 201 बिलियन डॉलर को भारतीय मुद्रा में बदला जाए, तो यह राशि लगभग 1,68,43,97,08,50,000 रुपये होगी।

    मेटा के शेयरों की वृद्धि

    मार्क ज़करबर्ग ने यह सफलता मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के शेयरों में वृद्धि के बाद हासिल की है। जनवरी 2024 के मुकाबले मेटा के शेयरों में 60 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिसमें मेटा एआई की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब, ज़करबर्ग एलोन मस्क, जेफ बेजोस और बर्नार्ड अर्नॉल्ट के बाद इस क्लब में शामिल हो गए हैं।

    फेसबुक से मेटा तक का सफर

    मार्क ज़करबर्ग ने फरवरी 2004 में आधिकारिक तौर पर फेसबुक की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सएप मैसेजिंग ऐप का अधिग्रहण किया और धीरे-धीरे विभिन्न ऐप्स के मालिक बन गए। उन्होंने अपने सभी प्लेटफॉर्म को एक नए नाम में समाहित करने का निर्णय लिया और 2021 में मेटा प्लेटफॉर्म इंक की स्थापना की। हाल ही में मेटा कनेक्ट 2024 इवेंट के दौरान, ज़करबर्ग ने अपने आने वाले एआई योजनाओं का परिचय दिया। मेटा एआई पहले से ही व्हाट्सएप समेत कई प्लेटफार्मों पर सक्रिय है, और इसके 50 करोड़ मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं।

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  • कराची में इजरायली हमलों के खिलाफ प्रदर्शन जारी

    कराची में इजरायली हमलों के खिलाफ प्रदर्शन जारी

    इजरायली सेना की कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा

    इजरायल की सेना ने हिजबुल्ला प्रमुख नसरुल्ला की हत्या के बाद से क्षेत्र में आतंक फैलाना जारी रखा है। हाल ही में, इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने बैरूत में घुसकर हवाई हमले किए, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है। इस हमले में कम से कम चार लोग मारे गए हैं, और यह पहली बार है जब इजरायल ने लेबनान की राजधानी के अंदर सीधे हमला किया है।

    बैरूत में बमबारी की नई दास्तान

    सोमवार तड़के, इजरायली विमानों ने बैरूत के एक आवासीय इलाके को निशाना बनाया। इस हमले में फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन (पीएफएलपी) के तीन प्रमुख नेताओं की मौत हो गई। ये घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि इजरायल अब अपने हमलों में और भी तेज़ी ला रहा है।

    यमन में इजरायली आक्रमण

    बैरूत के साथ-साथ, इजरायल ने यमन में हूती विद्रोहियों पर भी अपनी नजरें गड़ा दी हैं। हाल के हमलों में कम से कम चार लोग मारे गए हैं, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई है। इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने कहा है कि उनकी सेना के लिए मिडिल ईस्ट में कहीं भी हमला करना अब मुश्किल नहीं रहा।

    कराची में विरोध की लहर

    इन सबके बीच, पाकिस्तान के कराची में प्रदर्शनकारियों ने नसरुल्ला की हत्या पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की और अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। यह विरोध इजरायली हमलों के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया का हिस्सा है।

    इस संकट ने क्षेत्रीय स्थिरता को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है, और विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को नियंत्रित करना बेहद कठिन होगा।

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  • साइबर ठगी के नए तरीके, साइबर ठगों से कैसे बचें?

    साइबर ठगी के नए तरीके, साइबर ठगों से कैसे बचें?

    साइबर ठगी के बढ़ते मामलों का प्रभाव और समाधान

    इन दिनों साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, और ठगों की रणनीतियां भी बदल रही हैं। अब जालसाज सीधे लोगों को सीबीआई या ईडी के अधिकारियों के रूप में संपर्क करके भयभीत कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है लोगों को धमकी देकर धन का हनन करना।

    ठगों का नया पैतरा

    यदि किसी को ड्रग्स, पोर्नोग्राफी या मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच का डर दिखाया जाता है, तो सबसे पहले ध्यान दें कि कोई सरकारी एजेंसी फोन पर सूचना नहीं देती। यदि कोई फोन करता है, तो तुरंत संबंधित थाने को सूचित करें। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार नंबर, बैंक विवरण, ओटीपी या किसी परिचित की जानकारी साझा न करें।

    धोखाधड़ी की एक और कहानी

    जांजगीर-चांपा की डॉ. विशाखा डे, जो एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, साइबर ठगों के शिकार हो गईं। ठगों ने उन्हें बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स के मामले में कार्रवाई की जा रही है, जिससे डर कर उन्होंने 60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह घटना दिखाती है कि कैसे ठग लोगों के डर का फायदा उठाकर उन्हें धोखा देने में सफल होते हैं।

    सेवानिवृत्त कर्मचारी की दास्तान

    एक और मामले में, जयसिंह चंदेल, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं, को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध पोर्नोग्राफी के केस में फंसाने का डर दिखाया गया। ठगों ने उन्हें मुंबई पुलिस और ईडी का अधिकारी बताकर संपर्क किया और कहा कि जांच के लिए उन्हें अपने खाते की पूरी राशि दूसरे खातों में जमा करनी होगी। भयभीत होकर, उन्होंने 54.30 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें समझ में आया कि वे एक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।

    जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कोई भी सरकारी एजेंसी आपको गिरफ्तार करने की धमकी देकर फोन नहीं करती है; वे सीधे दबिश देकर कार्रवाई करती हैं। इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और ऐसे मामलों में सावधानी बरतें। अपनी सेविंग के लिए लेनदेन करने से पहले हमेशा सोचें और किसी भी अनजान नंबर से आए फोन पर प्रतिक्रिया न दें।

    साइबर ठगों की यह रणनीति लोगों की नासमझी और डर का फायदा उठाकर ठगी करने की है। इसलिए, यदि कोई फोन करता है तो तुरंत संबंधित थाने को सूचित करें और बिना उचित जानकारी के किसी भी प्रकार का लेन-देन न करें।

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  • रायपुर पुलिस ने अपनाया अनोखा तरीका

    रायपुर पुलिस ने अपनाया अनोखा तरीका

    Raipur police

    तेलीबांधा थाना क्षेत्र में शुद्धिकरण अपराध कम करने की नई कोशिश

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बढ़ते अपराधों से निपटने के लिए पुलिस ने एक अनोखा रास्ता अपनाया है। जहां आमतौर पर अपराधों के बढ़ने पर पुलिस गश्त बढ़ाती है, अपराधियों पर नजर रखती है और निगरानी करती है, वहीं रायपुर पुलिस ने तेलीबांधा थाना क्षेत्र में अपराधों पर रोक लगाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान करवाया।

    शुद्धिकरण के जरिए अपराध नियंत्रण

    रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में हाल ही में एक हफ्ते के भीतर दो हत्याओं की घटनाओं के बाद पुलिस ने थाने का शुद्धिकरण किया। पुलिस जवान ने थाने के गेट के सामने नारियल फोड़कर और अगरबत्ती जलाकर पूजा-पाठ किया। पुलिस का मानना है कि इस धार्मिक अनुष्ठान से क्षेत्र में अपराधों की रोकथाम की जा सकेगी।

    तेलीबांधा में बढ़ते अपराध

    तेलीबांधा थाना क्षेत्र में हाल के दिनों में अपराध की घटनाओं में तेजी आई है। कुछ दिन पहले मोबाइल लुटेरों ने एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इसके पहले एक प्रेमी ने लड़की की गला रेतकर हत्या कर दी थी। गैंगस्टर अमन साहू गैंग के गुर्गों द्वारा इलाके में फायरिंग की घटना भी सामने आई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद पुलिस ने धार्मिक अनुष्ठान का सहारा लिया।

    धार्मिक अनुष्ठान से उम्मीद

    पुलिस का यह कदम आमतौर पर अपराध नियंत्रण के पारंपरिक तरीकों से अलग है। जहां एक ओर गश्त बढ़ाना, आदतन अपराधियों पर नजर रखना, और अपराध क्षेत्रों की निगरानी जैसे उपाय किए जाते हैं, वहीं रायपुर पुलिस ने पूजा-पाठ के जरिए अपराधों को कम करने का प्रयास किया है। तेलीबांधा थाना का यह शुद्धिकरण चर्चा का विषय बना हुआ है।

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  • यू-ट्यूब से सीखी बाइक चोरी की तकनीक, पुलिस ने चोर को गिरफ्तार

    यू-ट्यूब से सीखी बाइक चोरी की तकनीक, पुलिस ने चोर को गिरफ्तार

    यू-ट्यूब से सीखी बाइक चोरी की तकनीक, पुलिस ने चोर को गिरफ्तार

    छत्तीसगढ़ के रायपुर में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को पकड़ा है, जो बाइक चुराने के बाद पेट्रोल खत्म होते ही उसे सड़क किनारे छोड़ देता था। मंदिर हसौद थाना पुलिस ने आरोपी कैलाश नौरंगे को गिरफ्तार किया है, जिसके पास से 15 चोरी की बाइक बरामद की गई हैं।

    पुलिस के अनुसार, कैलाश नौरंगे ने यूट्यूब वीडियो देखकर बाइक चोरी करना सीखा था। उसका तरीका बेहद अनोखा था—वह ब्लेड से बाइक के केबल को काटकर चोरी करता, लेकिन कभी भी हैंडल लॉक लगे वाहनों को हाथ नहीं लगाता था। कैलाश ने रायपुर, कोरबा और बिलासपुर सहित कई जिलों में चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया।

    कैलाश बाइक को तब तक चलाता जब तक उसका पेट्रोल खत्म न हो जाए। उसके बाद वह बाइक को वहीं छोड़कर आगे बढ़ जाता। पुलिस को ज्यादातर बाइक सड़क किनारे लावारिस हालत में मिलीं, जिन्हें बाद में थाने लाकर रखा गया।

    कई बार कैलाश ढाबों में खाना खाकर पैसे नहीं होने का बहाना बनाकर बाइक को गिरवी छोड़ देता और भाग जाता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने 15 चोरी की बाइक बरामद की हैं, जो कि विभिन्न स्थानों से चोरी की गई थीं।

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  • छत्तीसगढ़ में फर्जी एसबीआई शाखा का पर्दाफाश

    छत्तीसगढ़ में फर्जी एसबीआई शाखा का पर्दाफाश

    फर्जी एसबीआई ब्रांच से ग्रामीणों के साथ ठगी, पुलिस की जांच जारी

    छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के मालखरौदा थाना क्षेत्र के ग्राम छपोरा में एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां फर्जी एसबीआई बैंक शाखा खोलकर ग्रामीणों से ठगी की गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक कथित ब्रांच मैनेजर फरार हो चुका था।

    फर्जी बैंक की शुरुआत

    जानकारी के अनुसार, ग्राम छपोरा के वैभवी कॉम्प्लेक्स में स्थापित इस फर्जी शाखा में कुछ लोगों ने खुद को बैंक के कर्मचारी बताकर ग्रामीणों को ठगना शुरू किया। इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को ब्रांच मैनेजर के रूप में पेश किया और स्थानीय लोगों की भर्ती की, ताकि किसी को शक न हो। ग्रामीणों ने विश्वास कर लिया और अपने खाते खुलवाने के साथ ही राशि भी जमा कर दी।

    हालांकि, कुछ समय बाद ग्रामीणों को बैंक के तरीकों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचित किया। जब तक पुलिस पहुंची, तब तक कथित ब्रांच मैनेजर भाग चुका था। पुलिस ने मौके पर पहुंचे पांच कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी है।

    हड़कंप और कार्रवाई

    फर्जी बैंक का खुलासा होते ही जिले में हड़कंप मच गया है, क्योंकि कई लोगों ने यहां अपना पैसा जमा किया था। मालखरौदा थाना प्रभारी राजेश पटेल के नेतृत्व में जांच चल रही है। उन्होंने मामले की सच्चाई जानने के लिए मेन ब्रांच सक्ती के बैंक अधिकारियों से भी संपर्क किया। इसके बाद बैंक अधिकारी और पुलिस की टीम ने मौके पर छापा मारा।

    यह मामला ग्रामीणों के लिए एक बड़ा सबक है, जिससे उन्हें धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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  • शिमला में मस्जिद के अवैध निर्माण पर भड़का जन आक्रोश

    शिमला में मस्जिद के अवैध निर्माण पर भड़का जन आक्रोश

    शिमला में मस्जिद के अवैध निर्माण पर भड़का जन आक्रोश

    हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में हिंदू संगठनों ने शिमला स्थित एक मस्जिद में अवैध निर्माण के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया। यह मामला फिर से चर्चा का विषय बन गया है, जहां स्थानीय लोगों ने सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं।

    हिंदू संगठनों का आरोप

    हिमाचल देवभूमि संघर्ष समिति के संयोजक, भारत भूषण ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से असंवेदनशील है। उनके अनुसार, लंबे समय से बिना किसी रोक-टोक के मस्जिदों में अवैध निर्माण चल रहा है, और जब वे इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो पुलिस उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करती है।

    प्रदर्शन में बढ़ी भीड़

    हाल ही में, शिमला में हुए एक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बेरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की। भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन की इस तीव्रता ने पूरे राज्य में चर्चा पैदा कर दी है।

    इस मस्जिद में ढाई मंजिल तक निर्माण की अनुमति थी, लेकिन वर्तमान में यहां पांच मंजिलों का निर्माण हो चुका है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा, मंडी में भी एक मस्जिद में इसी तरह का मामला सामने आया है, जहां नगर निगम आयुक्त जांच कर रहे हैं।

    इस मुद्दे ने हिमाचल प्रदेश में तनाव बढ़ा दिया है, और लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन यह दर्शाते हैं कि आम लोग इस अवैध निर्माण को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। क्या यह विवाद और बढ़ेगा? यह सवाल अब सभी के मन में है।

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  • पानी के डर के पीछे की वजहें और उसके उपचार

    पानी के डर के पीछे की वजहें और उसके उपचार

    पानी के डर के पीछे की वजहें और उसके उपचार

    हाइड्रोफोबिया, यानी पानी से डर, एक गंभीर स्थिति है जो कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है। इसका मुख्य कारण रैबीज वायरस का संक्रमण है। रैबीज से संक्रमित व्यक्ति पानी के संपर्क में आते ही असहनीय दर्द और ऐंठन का अनुभव करता है, जिससे पानी का डर बढ़ जाता है। इसे रैबीज के लक्षणों में से एक माना जाता है और समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति घातक हो सकती है।

    हालांकि, हाइड्रोफोबिया सिर्फ रैबीज तक सीमित नहीं है। कई बार लोग पिछले ट्रॉमेटिक अनुभवों के कारण भी पानी से डरने लगते हैं, जैसे कि डूबने की घटना या तैराकी न आना। इसे “Aquaphobia” कहा जाता है और यह मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कुछ लोग अनियंत्रित स्थिति, जैसे गहरे पानी, तालाब या समुद्र की लहरों से डरने लगते हैं, जिससे उनका डर और भी बढ़ जाता है।

    मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सकों का कहना है कि हाइड्रोफोबिया का इलाज संभव है। अगर यह डर रैबीज के कारण उत्पन्न होता है, तो एंटी-रैबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन का उपयोग करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, मानसिक कारणों से होने वाले पानी के डर का इलाज काउंसलिंग और थेरेपी से किया जा सकता है।

    इसलिए, पानी के डर को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता लें, ताकि इस डर को दूर किया जा सके और स्वस्थ जीवन जीया जा सके।

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  • रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    रैबीज से बचाव के लिए समय पर इलाज जरूरी लापरवाही न करें

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में आवारा कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है, जहां हर दिन औसतन 160 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। कई लोग झाड़-फूंक के भरोसे रह जाते हैं, जबकि समय पर इलाज न कराने पर यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्तों के काटने पर तुरंत एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है, क्योंकि रैबीज संक्रमण का कोई प्रभावी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर टीकाकरण से 100% बचाव संभव है।

    जिले में हर महीने करीब 4000 लोग कुत्तों के हमले से घायल हो रहे हैं। पिछले पांच सालों में डॉग बाइट के मामलों में दोगुना वृद्धि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, श्वान के काटने के बाद अगर समय पर उपचार नहीं लिया गया तो रैबीज का संक्रमण हाइड्रोफोबिया जैसी खतरनाक बीमारी में बदल सकता है, जो मृत्यु का कारण बनती है। 

    रैबीज एक घातक वायरस जनित बीमारी है, जो कुत्तों और अन्य जंगली जानवरों की लार के संपर्क से फैलती है। डॉक्टर मनोज बंसल के अनुसार, कुत्तों के काटने पर रैबीज वैक्सीन के साथ इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन भी दिया जाता है, खासकर गंभीर घावों की स्थिति में। इसलिए, कुत्तों के काटने पर जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है, ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सके।

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