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  • 2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी

    2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी

    2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी



    सरकारी स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की किसी दुर्घटना में मौत, जैसे सांप या बिच्छू के काटने, पानी में डूबने या आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में, छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत प्रशासन द्वारा एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। पहले इस योजना के तहत मुआवजा राशि दस हजार रुपये थी, लेकिन अप्रैल 2017 से इसे बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है।

    योजना के तहत प्रीमियम और पात्रता

    छात्र सुरक्षा बीमा योजना, जो प्रदेश में 2005 से लागू है, के तहत पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए बीमा प्रीमियम मात्र एक रुपये रखा गया है। यह प्रीमियम शैक्षणिक शुल्क के साथ स्कूलों में जमा कर दिया जाता है, जिसके बाद शिक्षा विभाग इस राशि को संबंधित बीमा कंपनी के खाते में जमा कराता है।

    योजना के तहत, सरकारी स्कूलों के साथ-साथ अनुदान प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र, किसी भी प्रकार की दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में पात्र होते हैं। इसके अलावा, सांप, बिच्छू के काटने, पानी में डूबने और आकाशीय बिजली से होने वाली मौत के मामले में भी यह योजना लागू होती है।

    पालकों को जानकारी की कमी

    हालांकि यह योजना 19 सालों से चल रही है, परंतु कई पालकों और छात्रों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। इसके कारण कई बार छात्र-छात्राओं की मृत्यु होने पर भी पालकों को बीमा राशि का लाभ नहीं मिल पाता।

    शिक्षा विभाग द्वारा पिछले 19 वर्षों में जिले के 250 पालकों को यह सहायता राशि दी जा चुकी है। पिछले साल (2023-24) जिले में 19 बच्चों की सड़क दुर्घटना, पानी में डूबने, सर्पदंश, और आकाशीय बिजली से मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके पालकों ने छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत आवेदन किया और प्रत्येक को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई।

    चालू सत्र (2024-25) में अब तक आठ विद्यार्थियों की मौत के बाद उनके पालकों द्वारा आवेदन किया गया है। इनमें नरियरा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र अक्षय निर्मलकर की ट्रेन दुर्घटना में मौत, सेंदरी की प्राथमिक शाला की छात्रा पूजा कश्यप की सर्पदंश से मौत, और कोलिहादेवरी के पूर्व माध्यमिक शाला के छात्र सोहन दास की सड़क दुर्घटना में मौत शामिल हैं। इन सभी मामलों में उनके स्वजनों ने छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत आवेदन कर, प्रत्येक को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त की है।

    बीमा योजना का महत्व

    छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत मामूली प्रीमियम के बावजूद, दुर्घटना की स्थिति में पालकों को महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता मिलती है। इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि और अधिक परिवार इसका लाभ उठा सकें। प्रशासन द्वारा अधिक से अधिक छात्रों और पालकों को इस योजना की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे समय पर इसका लाभ उठा सकें।

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  • मकान मालिक की धमकियों से परेशान किराएदार ने पुलिस से की शिकायत

    मकान मालिक की धमकियों से परेशान किराएदार ने पुलिस से की शिकायत

    मकान मालिक की धमकियों से परेशान किराएदार ने पुलिस से की शिकायत

    बिलासपुर शहर के यदुनंदन नगर तिफरा निवासी मोहम्मद कैश ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत करते हुए अपने मकान मालिक इरशाद अली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कैश ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से यदुनंदन नगर स्थित मकान में किराए पर रह रहे थे, लेकिन 21 जुलाई को मकान मालिक ने उनके मकान पर ताला लगा दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो मकान मालिक ने उनके साथ मारपीट की और उनका मोबाइल और बाइक (सीजी 10 बीआर 1545) छीन ली।

    मामले की शिकायत लेकर मोहम्मद कैश सिरगिट्टी थाने पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद एक सिपाही ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस घटना के बाद कुछ समय तक मामला ठंडा रहा, लेकिन मकान मालिक ने उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी, जिससे पीड़ित को न्याय के लिए फिर से गुहार लगानी पड़ी।

    पीड़ित का कहना है कि मकान मालिक द्वारा उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, और पुलिस थाने में भी उनके साथ न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं हुआ। कैश ने पुलिस अधीक्षक से मामले की गहन जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    बिलासपुर पुलिस ने मामले की शिकायत दर्ज कर ली है और जांच जारी है। मोहम्मद कैश ने कहा कि उन्हें अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं, और वे उम्मीद करते हैं कि प्रशासन उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगा।  

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  • जांजगीर-चांपा में सड़क अतिक्रमण से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, प्रशासन बेखबर

    जांजगीर-चांपा में सड़क अतिक्रमण से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, प्रशासन बेखबर

    जांजगीर-चांपा में सड़क अतिक्रमण से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, प्रशासन बेखबर

    जांजगीर-चांपा जिले में सड़कों पर अतिक्रमण के चलते सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से इसे हटाने के लिए किसी भी तरह की ठोस पहल नहीं की जा रही है। जिले में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हर बार कलेक्टर द्वारा सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए जाते हैं, मगर राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी इन निर्देशों को नज़रअंदाज कर देते हैं।

    पूर्व के निर्णयों की अनदेखी

    सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व बैठकों में दुर्घटना रोकने के लिए विभिन्न निर्णय लिए गए थे, जिनमें दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बड़े संकेतक बोर्ड लगाने, स्पीड ब्रेकर, रेडियम, सीट बेल्ट और हेलमेट के उपयोग को प्रोत्साहित करने, बेसहारा मवेशियों को हटाने और यातायात नियमों के पालन हेतु जनजागरूकता अभियान चलाने जैसे उपाय शामिल थे। हालांकि, इन सभी निर्णयों पर अमल न होने से दुर्घटनाओं की समस्या जस की तस बनी हुई है।

    उच्च न्यायालय के निर्देशों की भी अवहेलना

    उच्च न्यायालय ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग और नगर पालिका क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं और एनएचएआई और स्थानीय अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। लेकिन अभी तक इन आदेशों पर कोई अमल नहीं किया गया है। प्रशासन और यातायात पुलिस की लापरवाही के कारण केवल वाहनों पर कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि असली समस्या अतिक्रमण की है।

    दुर्घटनाओं के प्रमुख क्षेत्र

    जिला मुख्यालय जांजगीर में खोखरा मोड़, पुलिस लाइन के सामने मुनुंद मार्ग, एनएच 49 पर पुटपुरा मोड़, तिलई मोड़ और तरौद चौक सहित कई क्षेत्रों में सड़क किनारे ठेला, कच्चे मकान, फ्लैक्स और होर्डिंग्स लगे होने से अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। इसी तरह, शिवरीनारायण के देवरी मोड़, मुलमुला तिराहा और त्रिमूर्ति चौक में भी अतिक्रमण के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा हुआ है।

    प्रशासन की निष्क्रियता

    हालांकि सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यातायात पुलिस केवल चालकों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि असली समस्या अतिक्रमण की वजह से हो रही दुर्घटनाओं की अनदेखी हो रही है। 

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  • तोरवा थाना क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं से बढ़ी चिंता

    तोरवा थाना क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं से बढ़ी चिंता

    तोरवा थाना क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं से बढ़ी चिंता  

    बिलासपुर जिले के तोरवा थाना क्षेत्र के देवरीखुर्द इलाके में रविवार को भीषण आग लगने की एक गंभीर घटना सामने आई है। ओवरब्रिज के पास स्थित एक गोदाम में भीषण आग लगने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। इसके बाद अब जगमाल चौक पर स्थित एक फटाका दुकान में भी आग लगने की खबर आई है। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई और आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। लेकिन फटाका दुकान के अंदर से लगातार धमाकों की आवाजें आ रही हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।

    आग लगने का कारण

    प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है और फायर ब्रिगेड की टीम आग को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्थानीय प्रशासन आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठा रहा है।

    लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता

    इस प्रकार की घटनाएं लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। इसलिए, प्रशासन को चाहिए कि वह फटाका दुकानों और अन्य संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा को लेकर सख्त नियम और निगरानी प्रणाली स्थापित करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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  • चाकूबाजी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने की छापेमारी

    चाकूबाजी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने की छापेमारी

    चाकूबाजी की बढ़ती घटनाओं के बीच पुलिस ने AMAZON के ऑफिस और गोदामों पर की छापेमारी 

    रायपुर में बीते कुछ दिन पहले हुई चाकूबाजी की घटनाओं के बाद पुलिस ने AMAZON के तीन गोदामों और ऑफिस पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मोवा, देवपुरी और डीडी नगर स्थित अमेजन के गोदामों में की गई, जहां धारदार चाकुओं की डिलीवरी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।

    चाकूबाजी में ऑनलाइन शॉपिंग का खुलासा

    गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने चाकू ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से खरीदे थे। इसके बाद पुलिस ने AMAZON , फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों से धारदार चाकू खरीदने वाले ग्राहकों की जानकारी मांगी थी। AMAZON द्वारा जानकारी न देने पर पुलिस ने छापा मारा।

    धारदार हथियारों की बिक्री पर सख्ती

    पुलिस के अनुसार, धारदार हथियारों की ऑनलाइन बिक्री पर कड़ी निगरानी जरूरी है क्योंकि इनका उपयोग अपराध में किया जा सकता है। पुलिस अब अन्य ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स की भी जांच करने और इस तरह की बिक्री पर सख्त निगरानी रखने की योजना बना रही है। ई-कॉमर्स कंपनियों को चेतावनी दी गई है कि वे समय पर जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि अपराधों को रोका जा सके।

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  • तिरुपति लड्डू विवाद के बाद डिंपल यादव ने की प्रसाद की जांच की मांग

    तिरुपति लड्डू विवाद के बाद डिंपल यादव ने की प्रसाद की जांच की मांग

    सांसद डिंपल यादव {उत्तर प्रदेश }

    तिरुपति लड्डू विवाद के बाद डिंपल यादव ने की प्रसाद की जांच की मांग

    उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने तिरुपति मंदिर में जानवरों की चर्बी वाले घी से बने लड्डू और प्रसाद के विवाद के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में भी प्रसाद की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां के प्रसाद में खराब गुणवत्ता का खोया (मावा) इस्तेमाल हो रहा है। डिंपल यादव ने प्रदेश सरकार से इस मामले की जांच करवाने की मांग की, इसे लोगों की आस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, “तिरुपति में लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है, ऐसा नहीं होना चाहिए। हमने सुना है कि वृंदावन में भी प्रसाद में घटिया मावा इस्तेमाल किया जा रहा है।”

    तिरुपति में हुआ महा शांति होम

    तिरुपति मंदिर में विवाद के बाद सोमवार को महा शांति होम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में पंडितों और पुजारियों ने पूरे मंदिर परिसर में पवित्र जल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया। विशेष रूप से उस रसोई में शुद्धिकरण हुआ, जहाँ प्रसाद के लड्डू तैयार होते हैं। सुबह 6 बजे से 10 बजे तक चले इस अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चार और धूप से मंदिर के वातावरण को शुद्ध किया गया।

    महा शांति होम का महत्व

    सनातन धर्म में महा शांति होम का विशेष महत्व है। इसका सीधा संबंध पवित्रता और शुद्धिकरण से है। जहां भी शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है, वहां महा शांति होम किया जाता है। इस अनुष्ठान के जरिए नकारात्मकता को दूर करने और पवित्रता लाने का प्रयास किया जाता है।

    संदेश: आस्था और परंपराओं की रक्षा आवश्यक

    यह विवाद केवल तिरुपति या वृंदावन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लाखों भक्तों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है जो धार्मिक स्थलों पर प्रसाद को पवित्र मानकर ग्रहण करते हैं। यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रसाद की शुद्धता और पवित्रता बनी रहे। प्रशासन को चाहिए कि इस तरह के मामलों की सख्ती से जांच करे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

    आस्था से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। धार्मिक स्थलों में पवित्रता बनाए रखने के लिए सभी को सतर्क और जागरूक रहना होगा।

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  • राजनांदगांव में आकाशीय बिजली गिरने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत

    राजनांदगांव में आकाशीय बिजली गिरने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत

    राजनांदगांव में आकाशीय बिजली गिरने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत

    राजनांदगांव जिले के जोरातराई गांव में एक दर्दनाक हादसे में आकाशीय बिजली गिरने से 8 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें 4 स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। यह घटना उस समय घटी जब सभी लोग गांव में एक पान दुकान के पास अहाते में रुके हुए थे। अचानक तेज गड़गड़ाहट और बिजली गिरने से मौके पर ही बच्चों सहित 8 लोगों की जान चली गई। सूचना मिलने के बाद जिला कलेक्टर, एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। एक व्यक्ति जो बुरी तरह झुलस गया है, उसे इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

    मृतकों में स्कूली बच्चे और ग्रामीण शामिल

    मिली जानकारी के अनुसार, आकाशीय बिजली की चपेट में आकर चार स्कूली बच्चों और चार पुरुषों की मौत हो गई। यह घटना पूरे गांव को स्तब्ध कर देने वाली है, और मृतकों के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

    आकाशीय बिजली से बचने के लिए सावधानियाँ

    इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए लोगों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ बरतनी चाहिए:

    1. खुले स्थानों से बचें:- आकाशीय बिजली गिरने के दौरान खुले क्षेत्रों, पेड़ों, और धातु के खंभों के पास न रुकें।

    2. सुरक्षित स्थान खोजें:- बिजली कड़कने पर तुरंत किसी सुरक्षित पक्की इमारत या वाहन में शरण लें।

    3. धातु के सामान से दूर रहें:-बिजली की चपेट में आने का खतरा धातु के उपकरणों और वस्त्रों के आसपास ज्यादा होता है, इसलिए उनसे दूरी बनाएं।

    4. पानी से दूर रहें:- बारिश के दौरान बिजली गिरने की संभावना अधिक होती है, इसलिए पानी के पास से दूर रहें।

    5. फोन का इस्तेमाल न करें:- बिजली कड़कने के दौरान मोबाइल या वायर्ड फोन का इस्तेमाल न करें।

    आकाशीय बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इन सावधानियों को अपनाकर जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।

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  • बिलासपुर में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा, पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल

    बिलासपुर में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा, पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल

    बिलासपुर में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा, पुलिस प्रशासन की नाकामी पर उठे सवाल

    बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र में चाकूबाजी की एक और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। पेंडारी निवासी दीपांशु साहू, पिता संतोष साहू, को अज्ञात युवकों ने चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमले के दौरान दीपांशु की अंतड़ियां बाहर आ गईं, जिससे उसकी हालत अत्यधिक नाजुक हो गई है।

    गंभीर रूप से घायल दीपांशु को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा में भर्ती कराया गया, जहाँ से उसकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उसे सिम्स (छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) बिलासपुर रेफर किया गया। वहां डॉक्टर उसकी जान बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। घटना के बाद से शहर में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।

    प्रशासन की विफलता और कानून व्यवस्था पर सवाल

    पिछले एक महीने के अंदर यह जिले में हुई पांचवीं बड़ी वारदात है। चार हत्याओं और चाकूबाजी की घटनाओं के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिले में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। आए दिन अपराधियों द्वारा खुलेआम ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन पुलिस इन पर काबू पाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है।

    पुलिस की ढिलाई और सरकार की उदासीनता

    चाकूबाजी की इस घटना के बाद इलाके के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि पुलिस घटनाओं के बाद केवल औपचारिक जांच करती है, लेकिन अपराधियों को पकड़ने या उन पर सख्त कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही। पिछले एक महीने में हुई हत्याओं के आरोपी अब तक फरार हैं, और ऐसा लगता है कि कानून व्यवस्था का डर अपराधियों के बीच खत्म हो गया है।

    शहरवासियों ने सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार की तरफ से भी अपराध नियंत्रण के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से बार-बार अपील किए जाने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था जस की तस बनी हुई है।

    बढ़ते अपराध और सुरक्षा का सवाल

    बिलासपुर, जिसे कभी शांतिप्रिय शहर माना जाता था, अब अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। पिछले कुछ समय में हत्याएं, लूटपाट और चाकूबाजी जैसी घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। इस साल के आंकड़े दिखाते हैं कि छोटे से लेकर बड़े अपराधों में शहर की स्थिति तेजी से बिगड़ी है, लेकिन पुलिस प्रशासन की कमजोर रणनीति और लचर सुरक्षा व्यवस्था ने जनता की चिंता बढ़ा दी है।

    इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता ने सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो रहे हैं? क्यों पुलिस उन्हें समय पर गिरफ्तार करने या अपराध रोकने में असफल हो रही है? इन सब सवालों का जवाब अब तक पुलिस या प्रशासन की तरफ से नहीं मिला है।

    जनता का गुस्सा और सरकार से मांग

    क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब तक पुलिस प्रशासन में सुधार नहीं किया जाएगा और सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक ऐसे अपराध होते रहेंगे। लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, और शहर के कई हिस्सों में रात के समय सन्नाटा छा जाता है क्योंकि लोगों में डर बना हुआ है।

    स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल अपराधियों को पकड़ने के बजाय, पुलिस को अपराधों को रोकने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, शहर में निगरानी बढ़ाने और गश्त करने की जरूरत है ताकि अपराधियों पर लगाम लगाई जा सके।

    बिलासपुर के शांत माहौल को बचाने के लिए अब जनता प्रशासन और सरकार से कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

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  • सितंबर महीने में त्योहारों से बढ़ी बैंकों की छुट्टियाँ

    सितंबर महीने में त्योहारों से बढ़ी बैंकों की छुट्टियाँ

    सितंबर महीने में त्योहारों से बढ़ी बैंकों की छुट्टियाँ

    सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही त्योहारों का सिलसिला शुरू हो गया है, जो बैंकों की छुट्टियों पर भी असर डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस महीने की छुट्टियों की सूची पहले ही जारी कर दी थी, जिसके अनुसार सितंबर में विभिन्न राज्यों में 15 दिन बैंक बंद रहेंगे।

    20 सितंबर, शुक्रवार से बैंक लगातार चार दिनों तक बंद रहेंगे। इस दौरान, 20 सितंबर को ईद-ए-मिलाद-उल-नबी के अवसर पर कई राज्यों में बैंकों में अवकाश रहेगा। इसके बाद, 21 सितंबर (शनिवार) को केरल में श्री नारायण गुरु समाधि दिवस के उपलक्ष्य में सभी बैंक बंद रहेंगे। 22 सितंबर (रविवार) को सामान्य रविवार की छुट्टी रहेगी, जिससे देश के सभी सरकारी और निजी बैंकों में कामकाज नहीं होगा। इसके बाद, 23 सितंबर (सोमवार) को महाराजा हरि सिंह जी का जन्मदिन मनाने के लिए जम्मू-कश्मीर में बैंकों की छुट्टी होगी।

    इन छुट्टियों के चलते ग्राहकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए बैंकों ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली हैं। एटीएम को अपडेट किया गया है, ताकि लोग आसानी से निकासी कर सकें। इसके अलावा, नेट बैंकिंग के जरिए लेन-देन जारी रहेगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि उनके मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके भी ग्राहक भुगतान कर सकते हैं।

    पिछले हफ्ते भी बैंकों में लगातार तीन दिन की छुट्टियां थीं—14, 15, और 16 सितंबर को। 14 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार था, जबकि 15 सितंबर को रविवार की छुट्टी थी, और 16 सितंबर को ईद-ए-मिलाद के पर्व पर सभी सरकारी और निजी बैंक बंद रहे थे।

    ग्राहकों को इन छुट्टियों के बारे में पूरी जानकारी देने और सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए बैंकों ने हर संभव प्रयास किया है।

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  • सोशल मीडिया फेम के लिए यूट्यूबर की अजीब हरकत

    सोशल मीडिया फेम के लिए यूट्यूबर की अजीब हरकत

    सोशल मीडिया फेम के लिए यूट्यूबर की अजीब हरकत

    गुरुवार को बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की टीम ने एक अनोखी घटना का सामना किया, जब स्पाइडर-मैन की पोशाक में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। यह न तो कोई फिल्म की शूटिंग थी और न ही कोई सुपरहीरो की असली कहानी। असल में, यह व्यक्ति शहर का ही एक यूट्यूबर था, जो अपने वीडियो के लिए स्पाइडर-मैन का ड्रेस पहनकर स्टेशन परिसर में वीडियो शूट कर रहा था। सुरक्षा कारणों से आरपीएफ ने उसे रोककर पूछताछ की।

    यूट्यूबर निकला स्पाइडर-मैन

    जब आरपीएफ ने इस शख्स से पूछताछ की, तो पता चला कि वह बिलासपुर का निवासी है और यूट्यूबर है। वह सोशल मीडिया पर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए यह स्टंट कर रहा था। हालांकि, आरपीएफ को यकीन हो गया कि युवक का मकसद किसी तरह की अवैध गतिविधि नहीं था, इसलिए उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।

    सोशल मीडिया पर फेमस होने की होड़

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि आजकल सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने के लिए लोग किस हद तक जाने के लिए तैयार हैं। यूट्यूबर्स और ब्लॉगर अक्सर अपने फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स बढ़ाने के लिए जोखिम भरे और खतरनाक स्टंट करते हैं। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां लोगों ने लोकप्रियता की होड़ में अपनी जान तक जोखिम में डाल दी है।

    खतरनाक स्टंट्स के नतीजे

    कई बार ऐसे स्टंट्स करने वालों को पब्लिक से नाराजगी का सामना करना पड़ा है, तो कई बार गंभीर चोटें या यहां तक कि मौतें भी हुई हैं। इसके बावजूद, सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने का यह जुनून खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।

    सुरक्षा और कानून का पालन जरूरी

    आरपीएफ ने इस यूट्यूबर को सख्त चेतावनी दी कि वह भविष्य में रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों पर इस तरह की गतिविधियों से बचे। यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि सोशल मीडिया की दुनिया में फेम पाने के चक्कर में कोई ऐसा काम न किया जाए, जिससे आप खुद या दूसरों को खतरे में डाल दें। साथ ही, कानून के दायरे में रहकर ही किसी भी गतिविधि को अंजाम देना चाहिए।

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