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    देशभर में सब्जियों के दामों में उछाल, महंगाई से परेशान जनता

    देशभर में इन दिनों सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम जनता परेशान और हताश है। बढ़ती महंगाई ने लोगों के घरेलू बजट पर भारी असर डाला है, जबकि दूसरी ओर व्यापारियों के लिए यह स्थिति मुनाफे का अवसर बन गई है। खासतौर पर पश्चिमी भारत के गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भारी बारिश के चलते छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में सब्जियों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। टमाटर, गोभी और करेला जैसी सब्जियों के दाम 70 से 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं, जिससे लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    रायपुर में सब्जियों की कीमतों में उछाल

    रायपुर के थोक सब्जी बाजार में इस समय 70% सब्जियां अन्य राज्यों से आयात की जा रही हैं, जबकि केवल 30% स्थानीय सब्जियों की आपूर्ति हो रही है। बाढ़ प्रभावित राज्यों से छत्तीसगढ़ में सब्जियों की सप्लाई बढ़ने से कीमतों में भारी उछाल आया है। डूमरतराई थोक सब्जी बाजार के अध्यक्ष टी. श्रीनिवास ने जानकारी दी है कि निकट भविष्य में सब्जियों की कीमतों में किसी भी प्रकार की राहत मिलने की संभावना नहीं है।

    बारिश का सब्जियों पर असर

    लगातार बारिश और बाढ़ के चलते कई राज्यों में सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। विशेष रूप से टमाटर की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण टमाटर की आपूर्ति में भारी कमी आई है। यही स्थिति अन्य सब्जियों की फसलों के साथ भी है, जिसके चलते किसान अब दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सब्जियों की कीमतों में कुछ राहत दीपावली के समय देखने को मिल सकती है, जब नए फसल चक्र की शुरुआत होगी।

    फिलहाल रायपुर के बाजारों में टमाटर 40 से 50 रुपये प्रति किलो, मुनगा 60 से 70 रुपये, करेला 70 से 80 रुपये, सेमी 80 से 90 रुपये, भिंडी 60 से 70 रुपये, परवल 50 से 60 रुपये, गोभी 80 से 90 रुपये, पत्ता गोभी 30 से 40 रुपये, बरबट्टी 60 रुपये और बैंगन 40 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। इन दामों में फिलहाल किसी भी तरह की गिरावट की उम्मीद नहीं की जा रही है।

    हालांकि, हाल ही में कुछ समय के लिए सब्जियों के दामों में थोड़ी राहत आई थी, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने फिर से बाजार में कीमतों को बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में सब्जियों के दामों में स्थिरता बनी रहने की संभावना है, जो आम जनता के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

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  • 1 अक्टूबर से बदलेगा निवेश और टैक्स का गणित, जानिए क्या हैं नए नियम

    1 अक्टूबर से बदलेगा निवेश और टैक्स का गणित, जानिए क्या हैं नए नियम

    फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर बढ़ा टैक्स, 1 अक्टूबर से होंगे नए नियम लागू

    केंद्र सरकार द्वारा 23 जुलाई को पेश किए गए बजट में कई नए नियमों की घोषणा की गई थी, जो 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी होंगे। इन नियमों के तहत फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेड्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ा दिया जाएगा। ऑप्शंस प्रीमियम पर एसटीटी बढ़कर 0.1% और फ्यूचर्स पर 0.02% हो जाएगा। यह बदलाव वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते समय घोषित किया था।

    इसके अलावा, सरकार ने कुछ बॉन्ड्स के ब्याज पर 10% टीडीएस लागू करने का फैसला किया है, जिसमें फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स भी शामिल होंगे। हालांकि, टीडीएस सिर्फ तब लगेगा जब बॉन्ड्स से एक साल में 10,000 रुपये से अधिक ब्याज प्राप्त हो।

    शेयर बायबैक के नियमों में भी बदलाव होगा, जिससे कैपिटल गेंस पर टैक्स लागू किया जाएगा। पहले इस पर कोई टैक्स नहीं लगता था, लेकिन अब निवेशकों को कैपिटल गेंस पर टैक्स देना होगा।

    इसके अलावा, पैन कार्ड के लिए आवेदन या आरटीआर दाखिल करने के लिए अब आधार एनरोलमेंट आईटी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

    साथ ही, ‘विवाद से विश्वास’ स्कीम 1 अक्टूबर से खुलेगी, जिसके तहत टैक्स के लंबित मामलों का निपटारा कम पेनाल्टी के साथ किया जा सकेगा।

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  • छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए कुछ अहम फैसलों के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। इन फैसलों में जनजातीय समुदाय के उत्थान और किसानों की भलाई के साथ-साथ उपभोक्ता कल्याण से जुड़े कई निर्णय शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृति मिलना ऐतिहासिक कदम है। इस अभियान से देश के 63,000 से अधिक आदिवासी बहुल गांवों के साथ-साथ आकांक्षी जिलों के आदिवासी गांवों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के जनजातीय भाई-बहनों के जीवन स्तर में सुधार होगा और वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।

    कृषि और उपभोक्ता हितों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय

    मुख्यमंत्री साय ने ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)’ योजना को 2025-26 तक जारी रखने के निर्णय का स्वागत किया। इस योजना के तहत 35,000 करोड़ रुपए के वित्तीय पैकेज से किसानों को लाभकारी मूल्य प्राप्त होंगे और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता मिलेगी। उन्होंने इसे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी कदम बताया।

    इसके अलावा, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों के तहत रबी सीजन के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों की सस्ती दरों पर आपूर्ति के लिए केंद्रीय कैबिनेट द्वारा उठाए गए कदम की भी सराहना की। इससे प्रदेश के अन्नदाताओं को उचित मूल्य पर उर्वरक मिलेंगे, जिससे खेती की लागत कम होगी और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।

    अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग

    मुख्यमंत्री ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कैबिनेट के फैसलों की भी सराहना की। चंद्रयान-4 मिशन, वीनस ऑर्बिटर मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और गगनयान फॉलो-ऑन मिशन को स्वीकृति देने के निर्णय से भारत की अंतरिक्ष शक्ति को नया आयाम मिलेगा। साय ने इसे देश के वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।

    एक देश एक चुनाव का स्वागत

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक देश, एक चुनाव’ प्रस्ताव को स्वीकृति दिए जाने पर भी प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से देश में चुनावी खर्च कम होगा, राजनीतिक स्थिरता आएगी, और संसाधनों का राष्ट्रहित में बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह निर्णय भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने को और मजबूत करेगा और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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  • 2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी

    2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी

    2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी



    सरकारी स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की किसी दुर्घटना में मौत, जैसे सांप या बिच्छू के काटने, पानी में डूबने या आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में, छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत प्रशासन द्वारा एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। पहले इस योजना के तहत मुआवजा राशि दस हजार रुपये थी, लेकिन अप्रैल 2017 से इसे बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है।

    योजना के तहत प्रीमियम और पात्रता

    छात्र सुरक्षा बीमा योजना, जो प्रदेश में 2005 से लागू है, के तहत पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए बीमा प्रीमियम मात्र एक रुपये रखा गया है। यह प्रीमियम शैक्षणिक शुल्क के साथ स्कूलों में जमा कर दिया जाता है, जिसके बाद शिक्षा विभाग इस राशि को संबंधित बीमा कंपनी के खाते में जमा कराता है।

    योजना के तहत, सरकारी स्कूलों के साथ-साथ अनुदान प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र, किसी भी प्रकार की दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में पात्र होते हैं। इसके अलावा, सांप, बिच्छू के काटने, पानी में डूबने और आकाशीय बिजली से होने वाली मौत के मामले में भी यह योजना लागू होती है।

    पालकों को जानकारी की कमी

    हालांकि यह योजना 19 सालों से चल रही है, परंतु कई पालकों और छात्रों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। इसके कारण कई बार छात्र-छात्राओं की मृत्यु होने पर भी पालकों को बीमा राशि का लाभ नहीं मिल पाता।

    शिक्षा विभाग द्वारा पिछले 19 वर्षों में जिले के 250 पालकों को यह सहायता राशि दी जा चुकी है। पिछले साल (2023-24) जिले में 19 बच्चों की सड़क दुर्घटना, पानी में डूबने, सर्पदंश, और आकाशीय बिजली से मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके पालकों ने छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत आवेदन किया और प्रत्येक को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई।

    चालू सत्र (2024-25) में अब तक आठ विद्यार्थियों की मौत के बाद उनके पालकों द्वारा आवेदन किया गया है। इनमें नरियरा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र अक्षय निर्मलकर की ट्रेन दुर्घटना में मौत, सेंदरी की प्राथमिक शाला की छात्रा पूजा कश्यप की सर्पदंश से मौत, और कोलिहादेवरी के पूर्व माध्यमिक शाला के छात्र सोहन दास की सड़क दुर्घटना में मौत शामिल हैं। इन सभी मामलों में उनके स्वजनों ने छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत आवेदन कर, प्रत्येक को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त की है।

    बीमा योजना का महत्व

    छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत मामूली प्रीमियम के बावजूद, दुर्घटना की स्थिति में पालकों को महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता मिलती है। इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि और अधिक परिवार इसका लाभ उठा सकें। प्रशासन द्वारा अधिक से अधिक छात्रों और पालकों को इस योजना की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे समय पर इसका लाभ उठा सकें।

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  • कोरबा जिले में पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध महुआ शराब पर की कार्रवाई

    कोरबा जिले में पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध महुआ शराब पर की कार्रवाई

    बुधवार को कोरबा जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बड़ी मात्रा में अवैध गांजा, शराब और नशीली पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाया। जिले के सभी थाना और चौकी पुलिस ने एक दिन में अवैध शराब के 31 प्रकरणों में 1383 लीटर शराब जब्त की।

    कटघोरा पुलिस की छापेमारी

    कटघोरा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने सुबह सात बजे ग्राम पतरापाली में छापेमारी की। इस कार्रवाई में कच्ची महुआ शराब बनाने वालों के खिलाफ बड़ी संख्या में गिरफ्तारी की गई।

    उरगा पुलिस की कार्रवाई

    उरगा पुलिस ने भी ग्राम चीतापाली के बरभौना नाला के किनारे एक स्थान को घेराबंदी कर दबिश दी। जहां आरोपितों द्वारा 20 भट्ठियां स्थापित कर भारी मात्रा में कच्ची महुआ शराब बनाई जा रही थी। पुलिस को देख आरोपित जंगल की ओर भाग गए।

    जब्त सामग्री

    घटनास्थल से पुलिस ने 20 भट्ठियों के चूल्हे, उपकरण और लगभग 3000 किलोग्राम महुआ को ध्वस्त किया, साथ ही 500 लीटर कच्ची महुआ शराब और 19 बड़े गंज व 22 बड़े कड़ाही जब्त किए। सिविल लाइन पुलिस ने कुल 110 लीटर कच्ची महुआ शराब भी जब्त कर आरोपी को जेल भेज दिया। कोरबा पुलिस ने 1 जनवरी 2024 से अब तक 472 प्रकरणों में 7985 लीटर कच्ची महुआ शराब और देसी प्लेन मंदिरा शराब जब्त की है। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की उम्मीद जताई जा रही है।READ MORE :

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  • जांजगीर-चांपा में सड़क अतिक्रमण से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, प्रशासन बेखबर

    जांजगीर-चांपा में सड़क अतिक्रमण से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, प्रशासन बेखबर

    जांजगीर-चांपा में सड़क अतिक्रमण से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं, प्रशासन बेखबर

    जांजगीर-चांपा जिले में सड़कों पर अतिक्रमण के चलते सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से इसे हटाने के लिए किसी भी तरह की ठोस पहल नहीं की जा रही है। जिले में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हर बार कलेक्टर द्वारा सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए जाते हैं, मगर राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी इन निर्देशों को नज़रअंदाज कर देते हैं।

    पूर्व के निर्णयों की अनदेखी

    सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व बैठकों में दुर्घटना रोकने के लिए विभिन्न निर्णय लिए गए थे, जिनमें दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बड़े संकेतक बोर्ड लगाने, स्पीड ब्रेकर, रेडियम, सीट बेल्ट और हेलमेट के उपयोग को प्रोत्साहित करने, बेसहारा मवेशियों को हटाने और यातायात नियमों के पालन हेतु जनजागरूकता अभियान चलाने जैसे उपाय शामिल थे। हालांकि, इन सभी निर्णयों पर अमल न होने से दुर्घटनाओं की समस्या जस की तस बनी हुई है।

    उच्च न्यायालय के निर्देशों की भी अवहेलना

    उच्च न्यायालय ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग और नगर पालिका क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं और एनएचएआई और स्थानीय अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। लेकिन अभी तक इन आदेशों पर कोई अमल नहीं किया गया है। प्रशासन और यातायात पुलिस की लापरवाही के कारण केवल वाहनों पर कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि असली समस्या अतिक्रमण की है।

    दुर्घटनाओं के प्रमुख क्षेत्र

    जिला मुख्यालय जांजगीर में खोखरा मोड़, पुलिस लाइन के सामने मुनुंद मार्ग, एनएच 49 पर पुटपुरा मोड़, तिलई मोड़ और तरौद चौक सहित कई क्षेत्रों में सड़क किनारे ठेला, कच्चे मकान, फ्लैक्स और होर्डिंग्स लगे होने से अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। इसी तरह, शिवरीनारायण के देवरी मोड़, मुलमुला तिराहा और त्रिमूर्ति चौक में भी अतिक्रमण के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा हुआ है।

    प्रशासन की निष्क्रियता

    हालांकि सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यातायात पुलिस केवल चालकों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि असली समस्या अतिक्रमण की वजह से हो रही दुर्घटनाओं की अनदेखी हो रही है। 

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  • तिरुपति लड्डू विवाद के बाद डिंपल यादव ने की प्रसाद की जांच की मांग

    तिरुपति लड्डू विवाद के बाद डिंपल यादव ने की प्रसाद की जांच की मांग

    सांसद डिंपल यादव {उत्तर प्रदेश }

    तिरुपति लड्डू विवाद के बाद डिंपल यादव ने की प्रसाद की जांच की मांग

    उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने तिरुपति मंदिर में जानवरों की चर्बी वाले घी से बने लड्डू और प्रसाद के विवाद के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में भी प्रसाद की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां के प्रसाद में खराब गुणवत्ता का खोया (मावा) इस्तेमाल हो रहा है। डिंपल यादव ने प्रदेश सरकार से इस मामले की जांच करवाने की मांग की, इसे लोगों की आस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, “तिरुपति में लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है, ऐसा नहीं होना चाहिए। हमने सुना है कि वृंदावन में भी प्रसाद में घटिया मावा इस्तेमाल किया जा रहा है।”

    तिरुपति में हुआ महा शांति होम

    तिरुपति मंदिर में विवाद के बाद सोमवार को महा शांति होम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में पंडितों और पुजारियों ने पूरे मंदिर परिसर में पवित्र जल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया। विशेष रूप से उस रसोई में शुद्धिकरण हुआ, जहाँ प्रसाद के लड्डू तैयार होते हैं। सुबह 6 बजे से 10 बजे तक चले इस अनुष्ठान के दौरान मंत्रोच्चार और धूप से मंदिर के वातावरण को शुद्ध किया गया।

    महा शांति होम का महत्व

    सनातन धर्म में महा शांति होम का विशेष महत्व है। इसका सीधा संबंध पवित्रता और शुद्धिकरण से है। जहां भी शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है, वहां महा शांति होम किया जाता है। इस अनुष्ठान के जरिए नकारात्मकता को दूर करने और पवित्रता लाने का प्रयास किया जाता है।

    संदेश: आस्था और परंपराओं की रक्षा आवश्यक

    यह विवाद केवल तिरुपति या वृंदावन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लाखों भक्तों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है जो धार्मिक स्थलों पर प्रसाद को पवित्र मानकर ग्रहण करते हैं। यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रसाद की शुद्धता और पवित्रता बनी रहे। प्रशासन को चाहिए कि इस तरह के मामलों की सख्ती से जांच करे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

    आस्था से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। धार्मिक स्थलों में पवित्रता बनाए रखने के लिए सभी को सतर्क और जागरूक रहना होगा।

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  • शैक्षणिक सत्र 2024-25 में छत्तीसगढ़ के स्कूलों को मिलेंगे 64 दिन की छुट्टियां

    शैक्षणिक सत्र 2024-25 में छत्तीसगढ़ के स्कूलों को मिलेंगे 64 दिन की छुट्टियां

    शैक्षणिक सत्र 2024-25 में छत्तीसगढ़ के स्कूलों को मिलेंगे 64 दिन की छुट्टियां

    छत्तीसगढ़ राज्य के लोक शिक्षण संचालनालय के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए शासकीय शैक्षणिक संस्थानों की अवकाश सूची जारी कर दी है। इस नए आदेश के अनुसार, राज्य के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं गैर-अनुदान प्राप्त शालाओं के साथ डीएड, बीएड और एमएड कॉलेजों में कुल 64 दिनों का अवकाश घोषित किया गया है।

    दशहरा अवकाश

    इस अवकाश सूची में सबसे पहला प्रमुख अवकाश दशहरा का होगा, जो 7 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2024 तक कुल 6 दिनों का रहेगा। यह अवकाश नवरात्रि और विजयदशमी पर्व के दौरान रहेगा, जो राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों में समान रूप से लागू होगा।

    दीपावली अवकाश

    दूसरा बड़ा अवकाश दीपावली पर्व का रहेगा। दीपावली के दौरान 28 अक्टूबर से 2 नवम्बर तक कुल 6 दिनों का अवकाश घोषित किया गया है। यह अवकाश बच्चों और शिक्षकों को पर्व की खुशी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ मनाने का अवसर प्रदान करेगा।

    शीतकालीन अवकाश

    दिसम्बर में शीतकालीन अवकाश रहेगा, जो 23 दिसम्बर से 28 दिसम्बर 2024 तक 6 दिनों का होगा। इस दौरान ठंड के मौसम में बच्चों को आराम मिलेगा और वे अपने परिवार के साथ छुट्टियों का आनंद ले सकेंगे।

    ग्रीष्मकालीन अवकाश

    इसके अलावा, गर्मियों के मौसम के लिए 1 मई से 15 जून 2025 तक 46 दिनों का ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। यह अवकाश न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों के लिए भी लंबा विश्राम होगा। गर्मियों के दौरान यह सबसे लंबा अवकाश होगा, जिससे बच्चों को गर्मी से राहत मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई के साथ साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग ले सकेंगे।

    यह अवकाश सूची राज्य के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों में एक समान रूप से लागू होगी। इसमें डीएड, बीएड और एमएड कॉलेज भी शामिल हैं।

    इस प्रकार, शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए कुल 64 दिनों का अवकाश राज्य के छात्रों और शिक्षकों के लिए सुनिश्चित किया गया है, जिससे वे अपने त्योहारों और छुट्टियों का पूरा आनंद उठा सकेंगे।

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  • किसानों की भलाई के लिए पीएम मोदी की नई पहल

    किसानों की भलाई के लिए पीएम मोदी की नई पहल

    किसानों की भलाई के लिए पीएम मोदी की नई पहल

    किसानों के हित के लिए भारत सरकार ने पीएम आशा योजना को जारी रखने का ऐलान किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य फसलों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता लाना है। इस योजना पर वित्त वर्ष 2025-26 तक 35 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों की भलाई के लिए सरकार के लगातार प्रयासों की सराहना की और कहा कि इससे किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं को सस्ती दरें मिलेंगी।

    इस योजना के तहत मूल्य समर्थन योजना और मूल्य स्थिरीकरण कोष को एक साथ लाया गया है। अगले वित्त वर्ष में दलहन, तिलहन और खोपरा की एमएसपी पर खरीद 25 प्रतिशत तक होगी, जबकि अरहर, उड़द और मसूर की खरीद पर कोई सीमा नहीं होगी। केंद्र ने दालों, तिलहन और खोपरा की खरीद के लिए बजट 45 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा।

    खरीद प्रक्रिया कृषि विभाग द्वारा ई-समृद्धि और ई-संयुक्ति पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। पीएम आशा योजना दालों और प्याज के बफर स्टॉक को बनाए रखने में मदद करेगी, जिससे उपभोक्ताओं को कीमतों में उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी। इसके साथ ही, केंद्र ने मूल्य घाटा भुगतान योजना का कवरेज 40% और एमआईएस का कवरेज 25% तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।

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  • कोयला वाहनों की आवाजाही से सड़क की हालत हुई जर्जर

    कोयला वाहनों की आवाजाही से सड़क की हालत हुई जर्जर

    कोयला वाहनों की वजह से आवाजाही की हालत हुई जर्जर

    सूरजपुर जिले की ग्राम पंचायत झुमरपारा के ग्रामीण लंबे समय से कोयला लोड वाहनों की आवाजाही से परेशान हैं। लगभग तीन किलोमीटर की सड़क जर्जर हो चुकी है और गढ्ढों में तब्दील हो गई है, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है। इस खराब सड़क पर अब तक स्कूल जाते वक्त कई बच्चे घायल हो चुके हैं। इसके खिलाफ ग्रामीण नौ बार चक्काजाम कर चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है और सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

    झुमरपारा का यह मार्ग करंजी रेलवे स्टेशन से होकर गुजरता है, जहां एसईसीएल द्वारा ओपनकास्ट खदानों से कोयला भारी वाहनों में लाया जाता है। दो दशक पहले इस सड़क का निर्माण किया गया था, लेकिन अब भारी ट्रकों की आवाजाही के कारण सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। खासतौर पर मंदिर चौक से लेकर रेलवे साइडिंग तक का तीन किलोमीटर का हिस्सा कीचड़ और गढ्ढों से भरा हुआ है।

    इस जर्जर सड़क के आसपास स्थित छह सरकारी और दो निजी स्कूलों के छात्र रोजाना इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। कई बार बच्चे गढ्ढों में गिरकर घायल हो चुके हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। 

    भाजपा नेता रामानन्द जायसवाल का कहना है कि ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। वहीं, झुमरपारा के सरपंच रामभरोस सिंह ने बताया कि सरकार और प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बाद भी सड़क की स्थिति नहीं सुधरी है, और अब फिर से आंदोलन की योजना बनाई जा रही है।

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