
रेपो रेट में बदलाव नहीं, RBI ने आर्थिक स्थिरता पर दिया जोर
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपनी तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट में किसी भी प्रकार का बदलाव न करने का निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने घोषणा की कि रेपो रेट 6.50% पर स्थिर रहेगी। इस निर्णय से उन उम्मीदों पर पानी फिर गया, जिनमें रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की संभावना जताई जा रही थी।
ईएमआई में नहीं होगा बदलाव
रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि होम लोन, कार लोन और अन्य प्रकार के लोन की ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा। रेपो रेट में कटौती होने पर यह 6.25% पर आ सकती थी, जिससे उधार लेने वालों को राहत मिल सकती थी। हालांकि, उच्च मुद्रास्फीति और सुस्त जीडीपी वृद्धि को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने यह निर्णय लिया है।
महंगाई पर नजर
आरबीआई का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति को 4% (±2%) के दायरे में बनाए रखना है। वर्तमान में महंगाई के उच्च स्तर और आर्थिक विकास की सुस्ती को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने अपनी नीतियों में सतर्कता बरती है। शक्तिकांत दास का मौजूदा कार्यकाल 10 दिसंबर 2024 को समाप्त हो रहा है। इस प्रकार यह उनकी अंतिम MPC बैठक रही। उन्होंने फरवरी 2023 से रेपो रेट को 6.50% पर स्थिर बनाए रखने की नीति पर अमल किया है।
विशेषज्ञों की राय
दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक राम सिंह ने कहा, “रेपो रेट में बदलाव न करने का निर्णय वर्तमान आर्थिक दृष्टि में सही कदम है। इससे बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।”
औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान के निदेशक नागेश कुमार ने भी कहा कि उच्च मुद्रास्फीति को देखते हुए यह फैसला समझदारी भरा है।
एमपीसी समिति के प्रमुख सदस्य
इस बैठक में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ माइकल देबब्रत पात्रा (डिप्टी गवर्नर, आरबीआई), राजीव रंजन (कार्यकारी निदेशक, आरबीआई), और अन्य सदस्य शामिल थे। आरबीआई का यह निर्णय बताता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, लोन धारकों को फिलहाल ईएमआई में राहत नहीं मिलेगी। आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बदलाव की संभावना बनी रहेगी।
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