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  • शक्तिकांत दास का कार्यकाल हुआ समाप्त, जानें पूरी ख़बर

    शक्तिकांत दास का कार्यकाल हुआ समाप्त, जानें पूरी ख़बर

    शक्तिकांत दास का कार्यकाल हुआ समाप्त, जानें 2,190 दिनों का सफर

    शक्तिकांत दास का कार्यकाल हुआ समाप्त, जानें 2,190 दिनों का सफर

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल समाप्त होने के बाद देश में आर्थिक स्थिरता और नीतिगत प्रभावशीलता पर चर्चा तेज हो गई है। दास का कार्यकाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण समय में महत्वपूर्ण उपलब्धियों से भरा रहा।

    शक्तिकांत दास के कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियां

    1. महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता:
      दास ने महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सख्त कदम उठाए। फरवरी 2023 से दिसंबर 2024 तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे वित्तीय स्थिरता बनी रही।
    2. वैश्विक मान्यता:
      शक्तिकांत दास को 2023 और 2024 में लगातार दो बार ग्लोबल फाइनेंस द्वारा दुनिया के शीर्ष केंद्रीय बैंकर के रूप में सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार महंगाई नियंत्रण, आर्थिक वृद्धि और रुपये की स्थिरता में उनके योगदान को मान्यता देता है।
    3. बैंकों का पुनरुत्थान:
      उनके नेतृत्व में बैंकों का एनपीए सितंबर 2024 तक घटकर 2.59% रह गया, जो 2018 में 10.38% के उच्च स्तर पर था। साथ ही, बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष 2023 में 2.63 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो 2018 में 32,400 करोड़ रुपये के घाटे में था।
    4. कोरोना और वैश्विक संकट के दौरान प्रबंधन:
      कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव के बीच दास ने अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा। उन्होंने लिक्विडिटी और एसेट क्वालिटी को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण नीतियां अपनाईं।
    5. बैंकों को दिवालिया होने से बचाना:
      यस बैंक, लक्ष्मी विलास बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों को संकट से बचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने एनबीएफसी सेक्टर में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस कदम उठाए।

    नीतिगत दृष्टिकोण और आलोचनाएं

    शक्तिकांत दास को उच्च ब्याज दरों के रक्षक के रूप में देखा जाता है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य मंत्रियों के दबाव के बावजूद दिसंबर 2024 की एमपीसी बैठक में ब्याज दरों को जस का तस रखा। हालांकि, कोविड के दौरान उन्होंने जरूरत पड़ने पर नीतिगत ढील भी दी, जिससे यह संदेश गया कि वह परिस्थिति के अनुसार लचीला दृष्टिकोण रखते हैं। शक्तिकांत दास ने 2,190 दिनों तक आरबीआई गवर्नर का पद संभाला। वह भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले गवर्नर बने। उनसे पहले बेनेगल रामा राव ने 2,754 दिनों तक इस पद पर कार्य किया था।

    दास के बाद की चुनौतियां

    दास के बाद नए गवर्नर के सामने महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और रुपये की स्थिरता को बनाए रखने की चुनौती होगी। इसके अलावा, उच्च ब्याज दरों के प्रभाव का आकलन और भविष्य की नीतियों को तैयार करना भी महत्वपूर्ण रहेगा। शक्तिकांत दास का कार्यकाल भारतीय आर्थिक इतिहास में एक स्थिर और प्रभावशाली गवर्नर के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने कठिन समय में मजबूत नीतियों के माध्यम से अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।

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  • मुद्रास्फीति और जीडीपी सुस्ती के बीच RBI का बड़ा फैसला

    मुद्रास्फीति और जीडीपी सुस्ती के बीच RBI का बड़ा फैसला

    ShaktikantaDas

    रेपो रेट में बदलाव नहीं, RBI ने आर्थिक स्थिरता पर दिया जोर

    भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपनी तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट में किसी भी प्रकार का बदलाव न करने का निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने घोषणा की कि रेपो रेट 6.50% पर स्थिर रहेगी। इस निर्णय से उन उम्मीदों पर पानी फिर गया, जिनमें रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की संभावना जताई जा रही थी।

    ईएमआई में नहीं होगा बदलाव

    रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि होम लोन, कार लोन और अन्य प्रकार के लोन की ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा। रेपो रेट में कटौती होने पर यह 6.25% पर आ सकती थी, जिससे उधार लेने वालों को राहत मिल सकती थी। हालांकि, उच्च मुद्रास्फीति और सुस्त जीडीपी वृद्धि को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने यह निर्णय लिया है।

    महंगाई पर नजर

    आरबीआई का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति को 4% (±2%) के दायरे में बनाए रखना है। वर्तमान में महंगाई के उच्च स्तर और आर्थिक विकास की सुस्ती को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने अपनी नीतियों में सतर्कता बरती है। शक्तिकांत दास का मौजूदा कार्यकाल 10 दिसंबर 2024 को समाप्त हो रहा है। इस प्रकार यह उनकी अंतिम MPC बैठक रही। उन्होंने फरवरी 2023 से रेपो रेट को 6.50% पर स्थिर बनाए रखने की नीति पर अमल किया है।

    विशेषज्ञों की राय

    दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक राम सिंह ने कहा, “रेपो रेट में बदलाव न करने का निर्णय वर्तमान आर्थिक दृष्टि में सही कदम है। इससे बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।”
    औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान के निदेशक नागेश कुमार ने भी कहा कि उच्च मुद्रास्फीति को देखते हुए यह फैसला समझदारी भरा है।

    एमपीसी समिति के प्रमुख सदस्य

    इस बैठक में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ माइकल देबब्रत पात्रा (डिप्टी गवर्नर, आरबीआई), राजीव रंजन (कार्यकारी निदेशक, आरबीआई), और अन्य सदस्य शामिल थे। आरबीआई का यह निर्णय बताता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, लोन धारकों को फिलहाल ईएमआई में राहत नहीं मिलेगी। आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बदलाव की संभावना बनी रहेगी।

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  • सितंबर महीने में त्योहारों से बढ़ी बैंकों की छुट्टियाँ

    सितंबर महीने में त्योहारों से बढ़ी बैंकों की छुट्टियाँ

    सितंबर महीने में त्योहारों से बढ़ी बैंकों की छुट्टियाँ

    सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही त्योहारों का सिलसिला शुरू हो गया है, जो बैंकों की छुट्टियों पर भी असर डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस महीने की छुट्टियों की सूची पहले ही जारी कर दी थी, जिसके अनुसार सितंबर में विभिन्न राज्यों में 15 दिन बैंक बंद रहेंगे।

    20 सितंबर, शुक्रवार से बैंक लगातार चार दिनों तक बंद रहेंगे। इस दौरान, 20 सितंबर को ईद-ए-मिलाद-उल-नबी के अवसर पर कई राज्यों में बैंकों में अवकाश रहेगा। इसके बाद, 21 सितंबर (शनिवार) को केरल में श्री नारायण गुरु समाधि दिवस के उपलक्ष्य में सभी बैंक बंद रहेंगे। 22 सितंबर (रविवार) को सामान्य रविवार की छुट्टी रहेगी, जिससे देश के सभी सरकारी और निजी बैंकों में कामकाज नहीं होगा। इसके बाद, 23 सितंबर (सोमवार) को महाराजा हरि सिंह जी का जन्मदिन मनाने के लिए जम्मू-कश्मीर में बैंकों की छुट्टी होगी।

    इन छुट्टियों के चलते ग्राहकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए बैंकों ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली हैं। एटीएम को अपडेट किया गया है, ताकि लोग आसानी से निकासी कर सकें। इसके अलावा, नेट बैंकिंग के जरिए लेन-देन जारी रहेगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि उनके मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके भी ग्राहक भुगतान कर सकते हैं।

    पिछले हफ्ते भी बैंकों में लगातार तीन दिन की छुट्टियां थीं—14, 15, और 16 सितंबर को। 14 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार था, जबकि 15 सितंबर को रविवार की छुट्टी थी, और 16 सितंबर को ईद-ए-मिलाद के पर्व पर सभी सरकारी और निजी बैंक बंद रहे थे।

    ग्राहकों को इन छुट्टियों के बारे में पूरी जानकारी देने और सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए बैंकों ने हर संभव प्रयास किया है।

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