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  • जेल कैदियों का मानदेय बढ़ाने पर हाईकोर्ट ने याचिका किया निराकृत

    जेल कैदियों का मानदेय बढ़ाने पर हाईकोर्ट ने याचिका किया निराकृत

    गुरुवार को हाईकोर्ट में प्रदेश की जेलों में कैदियों का मानदेय बढ़ाने के मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य शासन ने हाईकोर्ट में शपथपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि जेल में बंद कैदियों की कुशल और अकुशल श्रेणियों का मानदेय बढ़ाया जा रहा है। शपथपत्र के अनुसार, अब अकुशल कैदियों को 60 रुपये के बजाय 80 रुपये प्रतिदिन और कुशल श्रेणी के कैदियों को 75 रुपये के बजाय 100 रुपये प्रतिदिन का मानदेय दिया जाएगा।

    इस याचिका को भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने जनहित याचिका के रूप में दायर किया था। याचिका में यह कहा गया था कि वर्तमान में कैदियों को प्रतिदिन 60 से 75 रुपये तक का पारिश्रमिक दिया जाता है, जो वर्षों से नहीं बदला गया है और आज के समय में अपर्याप्त है। याचिका में मांग की गई थी कि कैदियों को कलेक्टर दर के अनुसार पारिश्रमिक दिया जाए, ताकि यह मेहनताना उनके भविष्य में भी काम आ सके।

    कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। राज्य शासन द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में मानदेय बढ़ाए जाने की जानकारी मिलने पर, चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने याचिका को निराकृत कर दिया।

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  • अर्चिशा सिन्हा आत्महत्या मामला: हाई कोर्ट ने शिक्षिका की याचिका खारिज की

    अर्चिशा सिन्हा आत्महत्या मामला: हाई कोर्ट ने शिक्षिका की याचिका खारिज की

    12 वर्षीय अर्चिशा सिन्हा, जो अंबिकापुर के कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल की 6वीं कक्षा की छात्रा थी, ने 7 फरवरी 2024 को आत्महत्या कर ली। अर्चिशा के सुसाइड नोट में उसने अपनी शिक्षिका सिस्टर मर्सी उर्फ एलिजाबेथ जोस पर प्रताड़ित करने और कक्षा में अपमानित करने का आरोप लगाया।

    घटना के बाद, पुलिस ने आईपीसी की धारा 305 के तहत एफआईआर दर्ज की और मामले की विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की। आरोपी शिक्षिका ने चार्जशीट को निरस्त करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज कर दी।

    कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देना अनुचित है और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता और उन्हें शारीरिक दंड देना उनकी गरिमा के खिलाफ है।

    अर्चिशा के पिता, आलोक कुमार सिन्हा, पेशे से इंजीनियर हैं। अर्चिशा कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल में केजी-2 से पढ़ रही थी। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाली प्रताड़ना और मानसिक शोषण के मुद्दे को उजागर किया है, और उच्च न्यायालय ने बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया है।

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  •  हाईकोर्ट ने सभी अस्पतालों में जरुरी सुविधाएं मुहैया कराने का दिया आदेश

     हाईकोर्ट ने सभी अस्पतालों में जरुरी सुविधाएं मुहैया कराने का दिया आदेश

     हाईकोर्ट ने सभी अस्पतालों में जरुरी सुविधाएं मुहैया कराने का दिया आदेश

    छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में इलाज से सम्बधित जरुरी संसाधन उपलब्ध होने से नवजात शिशुओं की बढ़ती मृत्यु दर को देखते हुये 12 जून को हाईकोर्ट में सुनवाई हुआ है I कोर्ट ने प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव को कहा है कि छत्तीसगढ़ के सभी अस्पतालों में जरुरी सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए I बताया जा रहा है कि कोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटीलेटर के अभाव में बीते 5 साल में 40 हजार बच्चों की मौत की खबर पर एक्शन लिया है Iहाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि रिपोर्ट बताती हैं हॉस्पिटलों में वेंटीलेटर, बेड की कमी है I चीफ जस्टिस ने प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सूचित करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं और संसाधन मुहैया कराई जाए I

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