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  • छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाएँ, आइये जानते हैं इससे कैसे बचें ?

    छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाएँ, आइये जानते हैं इससे कैसे बचें ?

    छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाएँ, आइये जानते हैं इससे कैसे बचें ?

    छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाएँ, आइये जानते हैं इससे कैसे बचें ?

    छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। 2024 के पहले 10 महीनों में 17,011 साइबर ठगी के मामले दर्ज किए गए हैं, जो हर घंटे औसतन तीन लोगों के ठगी का शिकार होने का संकेत देते हैं। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि जामताड़ा गैंग की तर्ज पर ठगी राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य राज्यों से की जा रही है। ठगों के द्वारा अपनाए जा रहे तरीकों में विविधता देखी जा रही है।

    इनमें सबसे सामान्य तरीके हैं, जैसे डिजिटल अरेस्ट, जहां ठग पुलिस या कस्टम अधिकारी बनकर कॉल करते हैं और डर का फायदा उठाकर पैसे मांगते हैं। इसके अलावा, फिशिंग स्कैम के जरिए फर्जी लिंक भेजकर लोगों के बैंक खाते खाली किए जाते हैं, और जॉइनिंग किट या फीस के नाम पर जॉब स्कैम भी एक बड़ी समस्या बन चुका है। ठग अक्सर लकी ड्रा, पार्सल और कैश ऑन डिलीवरी स्कैम के जरिए भी लोगों को शिकार बनाते हैं। इसके अलावा, इमोशनल मैनिपुलेशन स्कैम में ठग सोशल मीडिया पर रिश्ते बना कर इमरजेंसी का बहाना बनाते हैं और पैसे ऐंठते हैं।

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    छत्तीसगढ़ में हाल ही में रायपुर की एक 58 वर्षीय महिला ने डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आकर 58 लाख रुपये ठगों के खाते में भेज दिए। इसी तरह, राजेंद्र नगर के कारोबारी अभिषेक कुमार को शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ढाई करोड़ रुपये की ठगी का शिकार होना पड़ा। इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि साइबर ठगों के शिकार बनने से बचने के लिए सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है सतर्क रहना और किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या ईमेल में व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना।

    फिशिंग लिंक पर क्लिक करने से बचें और हमेशा सुनिश्चित करें कि वेबसाइट सुरक्षित और सही है। ओटीपी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी को कभी भी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी कंपनी या बैंक से संबंधित जानकारी प्राप्त करने पर पहले आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से सत्यापन करें। अपने डिवाइस की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करें, साथ ही अपने मोबाइल और लैपटॉप को अपडेट रखें। बैंकिंग ट्रांजैक्शन करते समय हमेशा सुरक्षित वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।

    सामाजिक मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी न डालें, क्योंकि यह ठगों के लिए शिकार करने का आसान तरीका बन सकता है। यदि कोई इमरजेंसी या परेशानी का बहाना बना कर पैसे मांगता है, तो उसकी वास्तविकता की जांच करें और फर्जी जॉइनिंग किट या लोन स्कैम से बचें। ठगी के संकेतों को पहचानें, जैसे कि जल्दबाजी करने या डराने का प्रयास, और ऐसी स्थितियों में कभी भी पैसे न भेजें। इन उपायों को अपनाकर आप साइबर ठगी से बच सकते हैं और अपनी वित्तीय और व्यक्तिगत सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं।

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  • ठगी के झांसे में आए रिटायर्ड शिक्षक ने गंवाए 33 लाख 57 हजार रूपये

    ठगी के झांसे में आए रिटायर्ड शिक्षक ने गंवाए 33 लाख 57 हजार रूपये

    ठगी के झांसे में आए रिटायर्ड शिक्षक ने गंवाए 33 लाख 57 हजार रूपये

    रायपुर में साइबर ठगी का शिकार हुए रिटायर्ड शिक्षक, 33 लाख रुपये की धोखाधड़ी

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में मुजगहन थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां ठगों ने रिटायर्ड शिक्षक चंद्रमणि पाण्डेय को अपने जाल में फंसाकर 33 लाख 57 हजार रुपये की ठगी की। इस घटना ने न केवल पीड़ित शिक्षक को बल्कि इलाके के लोगों को भी स्तब्ध कर दिया है।

    प्रोफेसर बनकर दिया निवेश का झांसा

    सूत्रों के अनुसार, ठग ने खुद को एक प्रोफेसर के रूप में पाण्डेय से परिचित कराया और मार्केट में निवेश करने का प्रस्ताव दिया। उसने पाण्डेय को बताया कि इस निवेश से उन्हें अधिक लाभ हो सकता है। इसके लिए उसने एक लिंक साझा किया, जिसमें ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश का रास्ता दिखाया गया। पाण्डेय को यह प्रस्ताव आकर्षक लगा और उन्होंने लिंक का अनुसरण करते हुए ट्रेडिंग में निवेश करना शुरू कर दिया।

    धीरे-धीरे रकम निकालकर फंसाया

    ठगों ने बड़ी चालाकी से पाण्डेय से छोटे-छोटे निवेश की मांग की और उन्हें धीरे-धीरे विभिन्न किस्तों में पैसे जमा करवाने के लिए प्रेरित किया। पाण्डेय इस विश्वास में थे कि वह एक सुरक्षित निवेश कर रहे हैं, लेकिन जब उन्हें भारी राशि जमा करने के बाद भी लाभ नहीं मिला, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। कुल मिलाकर, पाण्डेय से 33 लाख 57 हजार रुपये की ठगी की गई।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्परता दिखाई और तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि ठगी के लिए उपयोग किए गए लिंक और संचार का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है, जिससे ठगों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस मामले में ठोस कदम उठाए जाएंगे और ठगों को पकड़ा जाएगा।

    साइबर ठगी से बचने के सुझाव

    इस घटना के बाद पुलिस और विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

    • केवल वेरीफाईड और सुरक्षित वेबसाइट पर ही वित्तीय लेनदेन करें।
    • अज्ञात कॉल, ईमेल और मैसेज से सावधान रहें।
    • किसी भी प्रकार के आकर्षक प्रस्ताव या लालच से बचे रहें।
    • डिवाइस पर मजबूत पासवर्ड सेट करें और नियमित रूप से बदलें।
    • लैपटॉप या पीसी में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर इंस्टाल करें।

    धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करना बेहद जरूरी है।

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  • साइबर ठगी के नए तरीके, साइबर ठगों से कैसे बचें?

    साइबर ठगी के नए तरीके, साइबर ठगों से कैसे बचें?

    साइबर ठगी के बढ़ते मामलों का प्रभाव और समाधान

    इन दिनों साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, और ठगों की रणनीतियां भी बदल रही हैं। अब जालसाज सीधे लोगों को सीबीआई या ईडी के अधिकारियों के रूप में संपर्क करके भयभीत कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है लोगों को धमकी देकर धन का हनन करना।

    ठगों का नया पैतरा

    यदि किसी को ड्रग्स, पोर्नोग्राफी या मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच का डर दिखाया जाता है, तो सबसे पहले ध्यान दें कि कोई सरकारी एजेंसी फोन पर सूचना नहीं देती। यदि कोई फोन करता है, तो तुरंत संबंधित थाने को सूचित करें। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार नंबर, बैंक विवरण, ओटीपी या किसी परिचित की जानकारी साझा न करें।

    धोखाधड़ी की एक और कहानी

    जांजगीर-चांपा की डॉ. विशाखा डे, जो एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, साइबर ठगों के शिकार हो गईं। ठगों ने उन्हें बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स के मामले में कार्रवाई की जा रही है, जिससे डर कर उन्होंने 60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह घटना दिखाती है कि कैसे ठग लोगों के डर का फायदा उठाकर उन्हें धोखा देने में सफल होते हैं।

    सेवानिवृत्त कर्मचारी की दास्तान

    एक और मामले में, जयसिंह चंदेल, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं, को फर्जी मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध पोर्नोग्राफी के केस में फंसाने का डर दिखाया गया। ठगों ने उन्हें मुंबई पुलिस और ईडी का अधिकारी बताकर संपर्क किया और कहा कि जांच के लिए उन्हें अपने खाते की पूरी राशि दूसरे खातों में जमा करनी होगी। भयभीत होकर, उन्होंने 54.30 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें समझ में आया कि वे एक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।

    जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कोई भी सरकारी एजेंसी आपको गिरफ्तार करने की धमकी देकर फोन नहीं करती है; वे सीधे दबिश देकर कार्रवाई करती हैं। इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और ऐसे मामलों में सावधानी बरतें। अपनी सेविंग के लिए लेनदेन करने से पहले हमेशा सोचें और किसी भी अनजान नंबर से आए फोन पर प्रतिक्रिया न दें।

    साइबर ठगों की यह रणनीति लोगों की नासमझी और डर का फायदा उठाकर ठगी करने की है। इसलिए, यदि कोई फोन करता है तो तुरंत संबंधित थाने को सूचित करें और बिना उचित जानकारी के किसी भी प्रकार का लेन-देन न करें।

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