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  • रायपुर दक्षिण में कांग्रेस के लिए बगावत का खतरा बढ़ा

    रायपुर दक्षिण में कांग्रेस के लिए बगावत का खतरा बढ़ा

    रायपुर में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी में खलबली मची हुई है। रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट पर आकाश शर्मा को टिकट दिए जाने के बाद अन्य दावेदारों में असंतोष पनप रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए कांग्रेस ने दूसरे जिलों से विशेष टीमों को बुलाया है जो टिकट के दावेदारों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    ये टीमें खासकर उन इलाकों में जा रही हैं, जहां पर टिकट के दावेदारों का बोलबाला है। स्थानीय लोगों से बातचीत कर ये टीमें इस बात को सुलझाने की कोशिश कर रही हैं कि दावेदारों का पार्टी के प्रति रुख कैसा है। कांग्रेस को डर है कि टिकट से वंचित दावेदार कहीं पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने का मन न बना लें। शुक्रवार को रायपुर दक्षिण सीट के दावेदार कन्हैया अग्रवाल ने टिकट न मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन भरने की कोशिश की।

    अंतिम समय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के कॉल्स के बाद उन्होंने नामांकन नहीं भरा और वापस लौट गए। इस घटना से पार्टी में असंतोष और बगावत की आशंका और बढ़ गई है। वहीं, भाजपा में इस समय आंतरिक एकता देखने को मिल रही है। हालांकि, एक पदाधिकारी ने इस्तीफा दिया है, लेकिन पार्टी में बड़े नेता और जनप्रतिनिधि एकजुट दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के लिए चुनाव के करीब आते-आते अपने नेताओं में एकजुटता बनाए रखना चुनौती बन गया है। पार्टी को अपने नेताओं के मनमुटाव को शांत करते हुए टिकट वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी होगी ताकि बगावत के खतरे से बचा जा सके।

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  • 10 साल बाद हुए चुनाव में बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 29 सीटों पर जीत

    10 साल बाद हुए चुनाव में बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 29 सीटों पर जीत

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मुकाबला काफी कड़ा रहा, लेकिन नतीजे कुछ अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनावी मैदान में बहुमत हासिल किया और 90 में से 39 सीटें जीतने में सफल रही, जिससे वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, वोटिंग प्रतिशत के लिहाज से बीजेपी ने बाजी मार ली।

    इस चुनाव में, जो 10 साल बाद हुए हैं, बीजेपी का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। पार्टी ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की, जिससे वह जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरी है। इसके साथ ही, वोट प्रतिशत के मामले में बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। चुनाव आयोग की वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी को कुल 25.64% वोट मिले, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को 23.43% वोट मिले। इससे साफ होता है कि बीजेपी ने जम्मू और अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं का समर्थन हासिल किया।

    बीजेपी को कुल 14,62,225 वोट मिले, जो इसे वोट प्रतिशत के लिहाज से सबसे आगे रखता है। दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस को 13,36,147 वोट प्राप्त हुए, जो उसे सीटों की संख्या में तो बढ़त दिलाता है, लेकिन वोट प्रतिशत में पीछे छोड़ देता है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि बीजेपी ने अपने मतदाताओं के बीच गहरी पकड़ बनाई है, खासकर जम्मू क्षेत्र में, जहां उसका समर्थन परंपरागत रूप से मजबूत रहा है।

    हरियाणा और जम्मू-कश्मीर चुनाव परिणाम जारी

    वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस की मजबूत उपस्थिति कश्मीर घाटी में रही है, जो पार्टी के सीटों की संख्या में बढ़त का मुख्य कारण है। यह चुनाव, 10 साल के अंतराल के बाद, राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ है, जहां क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति का सीधा प्रभाव देखने को मिला। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में यह एक नया अध्याय खोल सकता है, जहां बीजेपी अब न केवल विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार है, बल्कि अगले चुनावों में और भी मजबूत दावेदारी पेश कर सकती है।

    इस चुनाव परिणाम ने यह भी साबित कर दिया कि वोट प्रतिशत हमेशा सीटों की संख्या से मेल नहीं खाता। बीजेपी का वोट प्रतिशत भले ही सबसे अधिक हो, लेकिन वह नेशनल कॉन्फ्रेंस से सीटों के मामले में पीछे रह गई है।

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