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  • छत्तीसगढ़ के मंदिरों में नकली घी पर सख्ती

    नकली घी विवाद: छत्तीसगढ़ के मंदिरों ने शुद्धता के लिए उठाए कदम

    नवरात्रि के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख मंदिरों ने नकली घी के विवाद के बाद इस साल पूजा में घी के दिए जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। नकली घी की मिलावट के कारण धार्मिक स्थलों की पवित्रता को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। रायपुर के महामाया मंदिर, दंतेश्वरी मंदिर, और डोंगरगढ़ के बम्लेश्वरी माता मंदिर सहित कई प्रमुख मंदिरों ने यह सुनिश्चित किया है कि इस नवरात्रि में घी का कोई भी उपयोग न हो।

    नकली घी से उत्पन्न चिंताएं

    नकली घी की मिलावट की खबरें हाल के दिनों में देशभर में फैल चुकी हैं, जिससे लोगों में शुद्धता को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं। घी, जो हिंदू धर्म में विशेष रूप से पूजा में इस्तेमाल होता है, अब मिलावट का शिकार हो रहा है। इससे न केवल धार्मिक आस्था को चोट पहुंच रही है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इस मिलावट के चलते श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन ने मिलकर कदम उठाए हैं ताकि इस नवरात्रि के दौरान पूजा में किसी प्रकार की शंका या असुविधा न हो।

    प्रसाद में भी हुए बदलाव

    मंदिर प्रशासन ने प्रसाद वितरण में भी विशेष ध्यान दिया है। नकली घी की समस्या को देखते हुए, इस नवरात्रि में घी का उपयोग किए बिना प्रसाद तैयार किया जाएगा। पंचमेवा, मिश्री, नारियल, और फल जैसे शुद्ध सामग्री का ही प्रसाद वितरित किया जाएगा। इससे न केवल प्रसाद की शुद्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था भी बनी रहेगी।

    मंदिरों की अपील

    मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस नवरात्रि के दौरान मंदिरों के नियमों का पालन करें और शुद्धता को प्राथमिकता दें। नकली घी के कारण उठाए गए इन कदमों का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को मिलावट के प्रति जागरूक करना और धार्मिक स्थलों की पवित्रता को बनाए रखना है।

    शुद्धता के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता

    यह नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि शुद्धता और जागरूकता का संदेश भी लेकर आई है। नकली घी के विवाद ने लोगों को यह सीख दी है कि हमें न केवल मंदिरों में, बल्कि दैनिक जीवन में भी शुद्धता और ईमानदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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  • घायल भालू की इलाज के दौरान मौत

    घायल भालू की इलाज के दौरान मौत

    बिलासपुर में घायल भालू की इलाज के दौरान मौत, टांगी के निशान मिले

    बिलासपुर जिले में एक भालू की मौत हो गई, जिसे गंभीर जख्मों के कारण कानन पेंडारी जू में इलाज के लिए लाया गया था। जब अधिकारियों को भालू के आक्रामक होने की सूचना मिली, तो उन्होंने रेस्क्यू टीम को बुलाया।

    रेस्क्यू टीम ने कुछ घंटों की मेहनत के बाद भालू को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्यूलाइजर गन का इस्तेमाल किया। जब भालू का शरीर जांचा गया, तो चार जगहों पर टांगी के हमले के निशान मिले। ये चोटें इतनी गंभीर थीं कि भालू को तुरंत इलाज की जरूरत थी।

    भालू को रविवार की रात कानन पेंडारी जू में लाया गया, जहां वन्य प्राणी चिकित्सक पीके चंदन ने उसका इलाज किया। लेकिन, सोमवार की रात 10:30 बजे भालू की हालत अचानक बिगड़ गई। जू प्रबंधन ने उसकी जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन आधे घंटे बाद, रात 11 बजे भालू ने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने बताया कि गहरे जख्मों के कारण ही उसकी जान गई।

    इस घटना की जानकारी मिलते ही अचानकमार बायोस्फियर रिजर्व के संचालक यूआर गणेश, एसडीओ भोपाल सिंह राजपूत और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। जू के चिकित्सालय में भालू का पोस्टमार्टम करने की तैयारी की जा रही है, और उसके बाद उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    मृत भालू नर था और उसकी उम्र लगभग नौ से 10 साल थी। जांच में यह भी पता चला कि भालू पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया गया था। इन गंभीर जख्मों के कारण भालू का आक्रामक व्यवहार भी हो सकता है, क्योंकि वह दर्द सहन नहीं कर पा रहा था।

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  • बकरी चोरी की ताजा घटना ने ग्रामीणों को किया चिंतित

    बकरी चोरी की ताजा घटना ने ग्रामीणों को किया चिंतित

    जगदीश मरकाम के परिवार की बकरियां चोरी

    पाली विकासखंड के ग्राम राहा में बकरी चोरी की एक और घटना ने ग्रामीणों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। चोरों ने जगदीश सिंह मरकाम के परिवार की कोठी में रात के समय घुसकर ताला तोड़ दिया और वहां बंधी 15 बकरियों को चोरी कर लिया। यह घटना उस समय घटी जब चोरों का गिरोह आधी रात को मरकाम के घर में दाखिल हुआ और बकरियों को गाड़ी में भरने लगा।

    परिवार की चिंता

    जगदीश सिंह मरकाम का परिवार बकरियों की बिक्री कर अपना जीवकोपार्जन करता है, और उनके लिए ये बकरियां न केवल आर्थिक संसाधन हैं, बल्कि परिवार का अहम हिस्सा भी हैं। जब बकरियों की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य जाग गए, तब उन्होंने तुरंत बाहर निकलकर देखा कि चोर बकरियों को गाड़ी में भर रहे हैं।

    ग्रामीणों की कोशिश

    मरकाम परिवार ने चोरों को पकड़ने के लिए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया, जिससे आसपास के ग्रामीण भी जाग गए। जब ग्रामीणों ने चोरों का पीछा करने की कोशिश की, तब तक चोर भागने में सफल हो गए। चोरों ने जंगल के रास्ते से भागने का प्रयास किया, जबकि ग्रामीणों ने बकरियों के चोरी होते देख अपनी मोटरसाइकिल पर चोरों का पीछा किया।

    पुलिस की कार्रवाई

    घटना की सूचना चैतमा चौकी को दी गई, जहां पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और मामला दर्ज कर लिया। हालांकि, अभी तक चोरों का कोई सुराग नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना क्षेत्र में बढ़ती अपराध दर का संकेत है और उन्हें इस समस्या का समाधान चाहिये।

    यह पहली बार नहीं है जब ग्राम पोड़ी-उपरोड़ा और पाली विकासखंड में बकरी चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले कुछ समय में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें चोर पकड़ में नहीं आ सके। केवल एक या दो मामलों में ही चोरों को गिरफ्तार किया गया है।

    ग्रामीणों की सुरक्षा और उनके जीवन-यापन को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय प्रशासन को इस समस्या का गंभीरता से समाधान करना होगा। बकरी चोरी की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर, ग्राम पंचायत को भी इस मामले में कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके।

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  • छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए कुछ अहम फैसलों के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। इन फैसलों में जनजातीय समुदाय के उत्थान और किसानों की भलाई के साथ-साथ उपभोक्ता कल्याण से जुड़े कई निर्णय शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृति मिलना ऐतिहासिक कदम है। इस अभियान से देश के 63,000 से अधिक आदिवासी बहुल गांवों के साथ-साथ आकांक्षी जिलों के आदिवासी गांवों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के जनजातीय भाई-बहनों के जीवन स्तर में सुधार होगा और वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।

    कृषि और उपभोक्ता हितों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय

    मुख्यमंत्री साय ने ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)’ योजना को 2025-26 तक जारी रखने के निर्णय का स्वागत किया। इस योजना के तहत 35,000 करोड़ रुपए के वित्तीय पैकेज से किसानों को लाभकारी मूल्य प्राप्त होंगे और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता मिलेगी। उन्होंने इसे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी कदम बताया।

    इसके अलावा, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों के तहत रबी सीजन के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों की सस्ती दरों पर आपूर्ति के लिए केंद्रीय कैबिनेट द्वारा उठाए गए कदम की भी सराहना की। इससे प्रदेश के अन्नदाताओं को उचित मूल्य पर उर्वरक मिलेंगे, जिससे खेती की लागत कम होगी और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।

    अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग

    मुख्यमंत्री ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कैबिनेट के फैसलों की भी सराहना की। चंद्रयान-4 मिशन, वीनस ऑर्बिटर मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और गगनयान फॉलो-ऑन मिशन को स्वीकृति देने के निर्णय से भारत की अंतरिक्ष शक्ति को नया आयाम मिलेगा। साय ने इसे देश के वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।

    एक देश एक चुनाव का स्वागत

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक देश, एक चुनाव’ प्रस्ताव को स्वीकृति दिए जाने पर भी प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से देश में चुनावी खर्च कम होगा, राजनीतिक स्थिरता आएगी, और संसाधनों का राष्ट्रहित में बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह निर्णय भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने को और मजबूत करेगा और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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  • रतनपुर में घरेलू विवाद के बाद पत्नी की हत्या, पुलिस कर रही मामले की जांच

    रतनपुर में घरेलू विवाद के बाद पत्नी की हत्या, पुलिस कर रही मामले की जांच

    बिलासपुर शहर से लगे रतनपुर क्षेत्र के ग्राम कर्रा में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जहां 75 वर्षीय घासीदास यादव ने अपनी पत्नी पुनीता (55) की गला दबाकर हत्या कर दी। बुधवार रात दोनों ने साथ में भोजन किया और अपने कमरे में सोने चले गए। अगली सुबह जब बेटा कृष्ण कुमार जागा, तो उसकी मां पुनीता ने रोज की तरह दरवाजा नहीं खोला। बेटे ने आवाज दी, तो पिता घासीदास ने अंदर से ही कहा कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और पुलिस को बुलाने के लिए कहा।

    कृष्ण ने पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद रतनपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की टीम ने काफी समझाने के बाद वृद्ध को दरवाजा खोलने पर मजबूर किया। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और शव को पंचनामा कर पीएम के लिए भेज दिया। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि घासीदास ने पारिवारिक विवाद के चलते इस वारदात को अंजाम दिया। रात में क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं चला, लेकिन सुबह जब दरवाजा बंद मिला और मां की हत्या की खबर मिली, तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई।

    घासीदास ने रातभर पत्नी के शव के साथ कमरे में बंद होकर बिताया और सुबह तक दरवाजा नहीं खोला। बेटे ने पुलिस को बुलाकर स्थिति की जानकारी दी। पुलिस अब हत्या के कारणों की जांच कर रही है। घासीदास को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मृतका का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और दुख है, और वे घटना के पीछे के कारणों को जानने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  

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  • बिलासपुर में पटाखा गोदाम में आग लगने से स्थानीय निवासियों में भय का माहोल

    बिलासपुर में पटाखा गोदाम में आग लगने से स्थानीय निवासियों में भय का माहोल

    पटाखा गोदाम में आग लगने से स्थानीय निवासियों में भय, कड़े नियमों की मांग

    बिलासपुर में मंगलवार की सुबह पटाखा गोदाम में आग लगने से क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गया था। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने समय पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा सारा माल जलकर खाक हो गया।

    इस घटना के बाद प्रशासन ने पटाखा व्यवसायियों की सुरक्षा मानकों की जांच करने का निर्णय लिया है। जिले के चार एसडीएम 16 बिंदुओं पर गोदाम और दुकानों की जांच करेंगे। आग लगने की वजह चायनीज पापअप पटाखे के डिब्बे के गिरने को बताया गया है, जिसके बाद विस्फोट और आग की लपटें फैलीं।

    प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गोदाम में सुरक्षा मानकों की कमी थी, और आग बुझाने के साधनों का अभाव था। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये के पटाखे जलकर राख हो गए। गोदाम का मालिक संदीप सिंह तलरेजा अब तक थाने नहीं पहुंचा है, और पुलिस उसे नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज मांगने की तैयारी कर रही है।

    एएसपी कश्यप ने कहा कि रिहायशी क्षेत्रों में पटाखों का भंडारण नियमों का उल्लंघन है और यह आम जनता के लिए खतरा पैदा कर सकता है। प्रशासन अब उन सभी लाइसेंसी पटाखा विक्रेताओं पर निगरानी रखेगा, जिनके गोदामों और दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया जाएगा।

    स्थानीय निवासियों की चिंता

    घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है। उन्होंने लंबे समय से इस गोदाम को लेकर चिंता जताई थी और प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी। अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

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  • मशरूम की बढ़ती मांग से व्यापारियों को फायदा, लेकिन खाने में बरतें सावधानी

    मशरूम की बढ़ती मांग से व्यापारियों को फायदा, लेकिन खाने में बरतें सावधानी

    बिलासपुर शहर में मशरूम के शौकीनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इसके चलते मशरूम की मांग भी तेजी से बढ़ी है। स्थानीय बाजारों से लेकर महंगे रेस्तरां तक, हर जगह मशरूम की खपत देखी जा रही है। मुख्य रूप से पैरा और डिलवा मशरूम की डिमांड ने व्यापारियों को भी अच्छा मुनाफा दिलाया है।

    Mushrooms

    मशरूम विक्रेता दिलीप गोरे का कहना है कि देसी पैरा और डिलवा मशरूम विशेष रूप से अगस्त से नवंबर तक ही बाजार में उपलब्ध होते हैं। इनके सीजनल होने के कारण लोग इन्हें खाना अधिक पसंद करते हैं। वहीं, ऑर्गेनिक मशरूम की मांग में भी इजाफा हो रहा है, जिसे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लाया जा रहा है। सारंगढ़, कोटा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों से हर दिन सैकड़ों किलो मशरूम बिलासपुर पहुंच रहे हैं।

    फायदे के साथ खतरा भी

    मशरूम को सुपर फूड के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। लेकिन इसका सेवन करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। गलत तरीके से पहचाने गए मशरूम से फूड पाइजनिंग हो सकती है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकती है। मशरूम का हरा या पर्पल रंग, चिपचिपापन, या खराब गंध संकेत हो सकते हैं कि इसे खाने से बचना चाहिए।

    टिप्स फॉर सेफ्टी

    हमेशा ताजा मशरूम खरीदने की सलाह दी जाती है, और विक्रेताओं से मशरूम की पहचान के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए। मशरूम के शौकीनों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे सुरक्षित और ताजे मशरूम का ही सेवन करें।

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  • बिलासपुर के बोइरपड़ाव में वन्यजीवों की चिंताओं के चलते नेचर कैंप बंद

    बिलासपुर के बोइरपड़ाव में वन्यजीवों की चिंताओं के चलते नेचर कैंप बंद

    बिलासपुर के बोइरपड़ाव में वन्यजीवों की चिंताओं के चलते नेचर कैंप बंद

    बिलासपुर वन मंडल के बोइरपड़ाव क्षेत्र में पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर नेचर कैंप को बंद कर दिया गया है। वन विभाग ने यह निर्णय लिया है क्योंकि हाल ही में जंगल में वन्य प्राणियों की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। विशेषकर चीतल, मोर, जंगली सूअर और तेंदुआ जैसी प्रजातियों के मूवमेंट ने विभाग की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

    जंगल में बढ़ी वन्य प्राणियों की गतिविधि

    बोइरपड़ाव में छह टेंट का नेचर कैंप बनाया गया था, जिसमें पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध थीं। लेकिन वन्य प्राणियों की लगातार मौजूदगी ने पर्यटकों के ठहरने पर पाबंदी लगा दी है। विभाग का मानना है कि मानव दखल कम करने से जंगल में जानवरों की संख्या बढ़ेगी और उनका जीवन बेहतर होगा।

    विभाग की रणनीति

    विभाग ने निर्णय लिया है कि जहां-जहां वन्य प्राणी देखे गए हैं, वहां “वन्य प्राणी विचरण क्षेत्र” के बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि लोग इन क्षेत्रों में जाने से बचें। इसके साथ ही, पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कैंप को सामान्य तार से घेर दिया गया है, लेकिन इससे भी वन्य प्राणियों का कैंप के अंदर पहुंचना संभव है।

    जल स्त्रोत और पर्यावरण संरक्षण

    बिलासपुर वन मंडल में ग्रीन इंडिया मिशन और राज्य सरकार की नरवा, घुरुवा व बाड़ी योजना के तहत कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं, जिसके चलते जंगल घना हुआ है और जल स्त्रोतों की संख्या बढ़ी है। इससे वन्य प्राणियों को जल की तलाश में भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

    अभिनव कुमार का बयान

    उपवनमंडलाधिकारी अभिनव कुमार ने कहा कि “पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। वन्य प्राणियों की बढ़ती गतिविधियां चिंताजनक हैं, और हमें सुनिश्चित करना है कि वे अपनी प्राकृतिक आवास में स्वच्छंद विचरण कर सकें।”

    बोइरपड़ाव में नेचर कैंप को फिलहाल बंद करने का निर्णय पर्यटकों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

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  • बिलासपुर में महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों से 1.3 लाख रुपये की ठगी

    बिलासपुर में महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों से 1.3 लाख रुपये की ठगी

    बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में महिला स्व सहायता समूह को एक लाख 30 हजार रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया है। यह मामला तब सामने आया जब मंजू पठारी, जो कि इस समूह की अध्यक्ष हैं, उन्होंने चकरभाठा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

    मंजू की पहचान एक साल पहले शैलेंद्र कुमार रजक से हुई थी, जिसने खुद को भारती महिला शक्ति फाउंडेशन का संस्थापक बताया। उसने अपने अभिकर्ता मनोज मरावी और उसकी पत्नी डिण्डेश्वरी मरावी के माध्यम से महिलाओं से संपर्क किया।

    शैलेंद्र ने झाडू बनाने का काम करने का आश्वासन दिया और कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाएं कच्चा माल लेकर झाडू बनाएंगी, जिसके लिए उन्हें मेहनताना मिलेगा। महिलाओं ने उसके कहने पर एक लाख रुपये शैलेंद्र को हाई कोर्ट के पास दे दिए, जबकि एक अन्य समूह ने 30 हजार रुपये और दिए।

    धोखाधड़ी का खुलासा

    परंतु, रुपये मिलने के बाद शैलेंद्र गायब हो गया। एक साल बीत जाने के बाद भी न तो महिलाओं को काम मिला और न ही उनका पैसा वापस किया गया। महिलाओं ने चकरभाठा थाने में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह देखना बाकी है कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और महिलाओं को न्याय मिलता है या नहीं।

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  • मकान मालिक की धमकियों से परेशान किराएदार ने पुलिस से की शिकायत

    मकान मालिक की धमकियों से परेशान किराएदार ने पुलिस से की शिकायत

    मकान मालिक की धमकियों से परेशान किराएदार ने पुलिस से की शिकायत

    बिलासपुर शहर के यदुनंदन नगर तिफरा निवासी मोहम्मद कैश ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत करते हुए अपने मकान मालिक इरशाद अली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कैश ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से यदुनंदन नगर स्थित मकान में किराए पर रह रहे थे, लेकिन 21 जुलाई को मकान मालिक ने उनके मकान पर ताला लगा दिया। जब उन्होंने विरोध किया तो मकान मालिक ने उनके साथ मारपीट की और उनका मोबाइल और बाइक (सीजी 10 बीआर 1545) छीन ली।

    मामले की शिकायत लेकर मोहम्मद कैश सिरगिट्टी थाने पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद एक सिपाही ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस घटना के बाद कुछ समय तक मामला ठंडा रहा, लेकिन मकान मालिक ने उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी, जिससे पीड़ित को न्याय के लिए फिर से गुहार लगानी पड़ी।

    पीड़ित का कहना है कि मकान मालिक द्वारा उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, और पुलिस थाने में भी उनके साथ न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं हुआ। कैश ने पुलिस अधीक्षक से मामले की गहन जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    बिलासपुर पुलिस ने मामले की शिकायत दर्ज कर ली है और जांच जारी है। मोहम्मद कैश ने कहा कि उन्हें अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं, और वे उम्मीद करते हैं कि प्रशासन उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगा।  

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