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  • SCERT ने जारी की द्वितीय मेरिट सूची, 27 से 30 सितंबर तक होंगे प्रवेश

    SCERT ने जारी की द्वितीय मेरिट सूची, 27 से 30 सितंबर तक होंगे प्रवेश

    SCERT ने जारी की द्वितीय मेरिट सूची, 27 से 30 सितंबर तक होंगे प्रवेश

     SCERT ने बीएड और डीएलएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया जारी कर दी है। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध 20 शिक्षा महाविद्यालयों में प्रथम चरण के तहत केवल 15% सीटों पर ही प्रवेश हो पाया है, जबकि 85% सीटें खाली रह गई हैं। 27 से 30 सितंबर तक द्वितीय चरण की प्रवेश प्रक्रिया संचालित होगी, जिसमें सीटों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

    प्रथम चरण में केवल 15% सीटों पर हुआ प्रवेश

    व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित प्री बीएड और डीएलएड प्रवेश परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद, SCERT ने काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, प्रथम चरण में केवल 15% सीटों पर ही प्रवेश हो सका है। पिछले साल भी ऐसी ही स्थिति रही थी, लेकिन दूसरे चरण के बाद सीटों में तेजी से प्रवेश हुआ था। उम्मीद की जा रही है कि इस साल भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा।

    द्वितीय चरण की प्रवेश प्रक्रिया

    द्वितीय चरण के लिए दावा आपत्ति की समय सीमा 25 सितंबर तक थी। आज द्वितीय मेरिट सूची का प्रकाशन हुआ, जिसके बाद 27 से 30 सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया चलेगी। अगर द्वितीय चरण के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं, तो तीसरे चरण की प्रक्रिया बाद में जारी की जाएगी।

    महाविद्यालयों की सीटों का विवरण

    अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध 20 शिक्षा महाविद्यालयों में बीएड के लगभग 2000 और डीएलएड के 2500 से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। प्रत्येक कॉलेज में बीएड के 100 सीट हैं। कॉलेजों ने प्रवेश प्रक्रिया के लिए पूरी तैयारी कर ली है, जिससे आगे के चरण में छात्रों का प्रवेश सुगम हो सकेगा।

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  • बिलासपुर में नवरात्र गरबा आयोजन की धमाकेदार तैयारियां जोरों पर

    बिलासपुर में नवरात्र गरबा आयोजन की धमाकेदार तैयारियां जोरों पर

    बिलासपुर में नवरात्र गरबा आयोजन की धमाकेदार तैयारियां जोरों पर

    बिलासपुर में इस वर्ष भी नवरात्र गरबा महोत्सव की धूम मचने वाली है। 6, 7 और 8 अक्तूबर को उसलापुर के रॉयल पार्क में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय गरबा महोत्सव अपने गौरवशाली तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस महोत्सव की शुरुआत 2022 में एयू मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के संचालक अमित संतवानी और उत्पल सेनगुप्ता द्वारा की गई थी, जिसने अब पूरे शहर में एक नई पहचान बना ली है।

    गरबा की तैयारियों का सिलसिला तीन महीने पहले ही शुरू हो गया था। रॉयल पार्क में इस आयोजन को और भव्य बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। यह महोत्सव अब छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े गरबा आयोजनों में शुमार हो चुका है।

    इस बार बिलासपुर में नवरात्र गरबा में प्रसिद्ध बॉलीवुड और टीवी सितारे अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। गेस्ट के रूप में फिल्म अभिनेत्री भाग्यश्री और बिगबॉस फेम मनारा चोपड़ा इस महोत्सव में शामिल होंगी। दोनों कलाकार पहली बार बिलासपुर में आ रही हैं, जिसे लेकर शहरवासियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

    महोत्सव में भाग लेने के लिए एंट्री पास बाजार में उपलब्ध हैं, जिन्हें नियमानुसार खरीदा जा सकता है। आयोजन स्थल पर बड़े ग्राउंड, सुविधाजनक पार्किंग, महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल, विभिन्न प्रकार के पकवानों के स्टॉल और स्वच्छ प्रसाधन की व्यवस्था की गई है।

    2022 में शुरू हुए इस नवरात्र गरबा महोत्सव ने महज दो वर्षों में बिलासपुर के हर नागरिक के दिल में अपनी जगह बना ली है। इस बार की तैयारियां पहले से भी ज्यादा भव्य हैं, और शहरवासी गरबा महोत्सव के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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  • छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के CM ने पीएम मोदी का आभार जताया

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए कुछ अहम फैसलों के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। इन फैसलों में जनजातीय समुदाय के उत्थान और किसानों की भलाई के साथ-साथ उपभोक्ता कल्याण से जुड़े कई निर्णय शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृति मिलना ऐतिहासिक कदम है। इस अभियान से देश के 63,000 से अधिक आदिवासी बहुल गांवों के साथ-साथ आकांक्षी जिलों के आदिवासी गांवों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के जनजातीय भाई-बहनों के जीवन स्तर में सुधार होगा और वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।

    कृषि और उपभोक्ता हितों की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय

    मुख्यमंत्री साय ने ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)’ योजना को 2025-26 तक जारी रखने के निर्णय का स्वागत किया। इस योजना के तहत 35,000 करोड़ रुपए के वित्तीय पैकेज से किसानों को लाभकारी मूल्य प्राप्त होंगे और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता मिलेगी। उन्होंने इसे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी कदम बताया।

    इसके अलावा, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों के तहत रबी सीजन के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों की सस्ती दरों पर आपूर्ति के लिए केंद्रीय कैबिनेट द्वारा उठाए गए कदम की भी सराहना की। इससे प्रदेश के अन्नदाताओं को उचित मूल्य पर उर्वरक मिलेंगे, जिससे खेती की लागत कम होगी और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।

    अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग

    मुख्यमंत्री ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कैबिनेट के फैसलों की भी सराहना की। चंद्रयान-4 मिशन, वीनस ऑर्बिटर मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और गगनयान फॉलो-ऑन मिशन को स्वीकृति देने के निर्णय से भारत की अंतरिक्ष शक्ति को नया आयाम मिलेगा। साय ने इसे देश के वैज्ञानिक प्रगति की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।

    एक देश एक चुनाव का स्वागत

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक देश, एक चुनाव’ प्रस्ताव को स्वीकृति दिए जाने पर भी प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से देश में चुनावी खर्च कम होगा, राजनीतिक स्थिरता आएगी, और संसाधनों का राष्ट्रहित में बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह निर्णय भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने को और मजबूत करेगा और सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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  • रतनपुर में घरेलू विवाद के बाद पत्नी की हत्या, पुलिस कर रही मामले की जांच

    रतनपुर में घरेलू विवाद के बाद पत्नी की हत्या, पुलिस कर रही मामले की जांच

    बिलासपुर शहर से लगे रतनपुर क्षेत्र के ग्राम कर्रा में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जहां 75 वर्षीय घासीदास यादव ने अपनी पत्नी पुनीता (55) की गला दबाकर हत्या कर दी। बुधवार रात दोनों ने साथ में भोजन किया और अपने कमरे में सोने चले गए। अगली सुबह जब बेटा कृष्ण कुमार जागा, तो उसकी मां पुनीता ने रोज की तरह दरवाजा नहीं खोला। बेटे ने आवाज दी, तो पिता घासीदास ने अंदर से ही कहा कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और पुलिस को बुलाने के लिए कहा।

    कृष्ण ने पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद रतनपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की टीम ने काफी समझाने के बाद वृद्ध को दरवाजा खोलने पर मजबूर किया। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और शव को पंचनामा कर पीएम के लिए भेज दिया। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि घासीदास ने पारिवारिक विवाद के चलते इस वारदात को अंजाम दिया। रात में क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं चला, लेकिन सुबह जब दरवाजा बंद मिला और मां की हत्या की खबर मिली, तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई।

    घासीदास ने रातभर पत्नी के शव के साथ कमरे में बंद होकर बिताया और सुबह तक दरवाजा नहीं खोला। बेटे ने पुलिस को बुलाकर स्थिति की जानकारी दी। पुलिस अब हत्या के कारणों की जांच कर रही है। घासीदास को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मृतका का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और दुख है, और वे घटना के पीछे के कारणों को जानने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  

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  • बिलासपुर में पटाखा गोदाम में आग लगने से स्थानीय निवासियों में भय का माहोल

    बिलासपुर में पटाखा गोदाम में आग लगने से स्थानीय निवासियों में भय का माहोल

    पटाखा गोदाम में आग लगने से स्थानीय निवासियों में भय, कड़े नियमों की मांग

    बिलासपुर में मंगलवार की सुबह पटाखा गोदाम में आग लगने से क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गया था। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने समय पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा सारा माल जलकर खाक हो गया।

    इस घटना के बाद प्रशासन ने पटाखा व्यवसायियों की सुरक्षा मानकों की जांच करने का निर्णय लिया है। जिले के चार एसडीएम 16 बिंदुओं पर गोदाम और दुकानों की जांच करेंगे। आग लगने की वजह चायनीज पापअप पटाखे के डिब्बे के गिरने को बताया गया है, जिसके बाद विस्फोट और आग की लपटें फैलीं।

    प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गोदाम में सुरक्षा मानकों की कमी थी, और आग बुझाने के साधनों का अभाव था। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये के पटाखे जलकर राख हो गए। गोदाम का मालिक संदीप सिंह तलरेजा अब तक थाने नहीं पहुंचा है, और पुलिस उसे नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज मांगने की तैयारी कर रही है।

    एएसपी कश्यप ने कहा कि रिहायशी क्षेत्रों में पटाखों का भंडारण नियमों का उल्लंघन है और यह आम जनता के लिए खतरा पैदा कर सकता है। प्रशासन अब उन सभी लाइसेंसी पटाखा विक्रेताओं पर निगरानी रखेगा, जिनके गोदामों और दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया जाएगा।

    स्थानीय निवासियों की चिंता

    घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है। उन्होंने लंबे समय से इस गोदाम को लेकर चिंता जताई थी और प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी। अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

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  • मशरूम की बढ़ती मांग से व्यापारियों को फायदा, लेकिन खाने में बरतें सावधानी

    मशरूम की बढ़ती मांग से व्यापारियों को फायदा, लेकिन खाने में बरतें सावधानी

    बिलासपुर शहर में मशरूम के शौकीनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इसके चलते मशरूम की मांग भी तेजी से बढ़ी है। स्थानीय बाजारों से लेकर महंगे रेस्तरां तक, हर जगह मशरूम की खपत देखी जा रही है। मुख्य रूप से पैरा और डिलवा मशरूम की डिमांड ने व्यापारियों को भी अच्छा मुनाफा दिलाया है।

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    मशरूम विक्रेता दिलीप गोरे का कहना है कि देसी पैरा और डिलवा मशरूम विशेष रूप से अगस्त से नवंबर तक ही बाजार में उपलब्ध होते हैं। इनके सीजनल होने के कारण लोग इन्हें खाना अधिक पसंद करते हैं। वहीं, ऑर्गेनिक मशरूम की मांग में भी इजाफा हो रहा है, जिसे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लाया जा रहा है। सारंगढ़, कोटा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों से हर दिन सैकड़ों किलो मशरूम बिलासपुर पहुंच रहे हैं।

    फायदे के साथ खतरा भी

    मशरूम को सुपर फूड के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। लेकिन इसका सेवन करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। गलत तरीके से पहचाने गए मशरूम से फूड पाइजनिंग हो सकती है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकती है। मशरूम का हरा या पर्पल रंग, चिपचिपापन, या खराब गंध संकेत हो सकते हैं कि इसे खाने से बचना चाहिए।

    टिप्स फॉर सेफ्टी

    हमेशा ताजा मशरूम खरीदने की सलाह दी जाती है, और विक्रेताओं से मशरूम की पहचान के बारे में भी जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए। मशरूम के शौकीनों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे सुरक्षित और ताजे मशरूम का ही सेवन करें।

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  • बिलासपुर के बोइरपड़ाव में वन्यजीवों की चिंताओं के चलते नेचर कैंप बंद

    बिलासपुर के बोइरपड़ाव में वन्यजीवों की चिंताओं के चलते नेचर कैंप बंद

    बिलासपुर के बोइरपड़ाव में वन्यजीवों की चिंताओं के चलते नेचर कैंप बंद

    बिलासपुर वन मंडल के बोइरपड़ाव क्षेत्र में पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर नेचर कैंप को बंद कर दिया गया है। वन विभाग ने यह निर्णय लिया है क्योंकि हाल ही में जंगल में वन्य प्राणियों की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। विशेषकर चीतल, मोर, जंगली सूअर और तेंदुआ जैसी प्रजातियों के मूवमेंट ने विभाग की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

    जंगल में बढ़ी वन्य प्राणियों की गतिविधि

    बोइरपड़ाव में छह टेंट का नेचर कैंप बनाया गया था, जिसमें पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध थीं। लेकिन वन्य प्राणियों की लगातार मौजूदगी ने पर्यटकों के ठहरने पर पाबंदी लगा दी है। विभाग का मानना है कि मानव दखल कम करने से जंगल में जानवरों की संख्या बढ़ेगी और उनका जीवन बेहतर होगा।

    विभाग की रणनीति

    विभाग ने निर्णय लिया है कि जहां-जहां वन्य प्राणी देखे गए हैं, वहां “वन्य प्राणी विचरण क्षेत्र” के बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि लोग इन क्षेत्रों में जाने से बचें। इसके साथ ही, पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कैंप को सामान्य तार से घेर दिया गया है, लेकिन इससे भी वन्य प्राणियों का कैंप के अंदर पहुंचना संभव है।

    जल स्त्रोत और पर्यावरण संरक्षण

    बिलासपुर वन मंडल में ग्रीन इंडिया मिशन और राज्य सरकार की नरवा, घुरुवा व बाड़ी योजना के तहत कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं, जिसके चलते जंगल घना हुआ है और जल स्त्रोतों की संख्या बढ़ी है। इससे वन्य प्राणियों को जल की तलाश में भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

    अभिनव कुमार का बयान

    उपवनमंडलाधिकारी अभिनव कुमार ने कहा कि “पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। वन्य प्राणियों की बढ़ती गतिविधियां चिंताजनक हैं, और हमें सुनिश्चित करना है कि वे अपनी प्राकृतिक आवास में स्वच्छंद विचरण कर सकें।”

    बोइरपड़ाव में नेचर कैंप को फिलहाल बंद करने का निर्णय पर्यटकों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

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  • बिलासपुर में महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों से 1.3 लाख रुपये की ठगी

    बिलासपुर में महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों से 1.3 लाख रुपये की ठगी

    बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में महिला स्व सहायता समूह को एक लाख 30 हजार रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया है। यह मामला तब सामने आया जब मंजू पठारी, जो कि इस समूह की अध्यक्ष हैं, उन्होंने चकरभाठा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

    मंजू की पहचान एक साल पहले शैलेंद्र कुमार रजक से हुई थी, जिसने खुद को भारती महिला शक्ति फाउंडेशन का संस्थापक बताया। उसने अपने अभिकर्ता मनोज मरावी और उसकी पत्नी डिण्डेश्वरी मरावी के माध्यम से महिलाओं से संपर्क किया।

    शैलेंद्र ने झाडू बनाने का काम करने का आश्वासन दिया और कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाएं कच्चा माल लेकर झाडू बनाएंगी, जिसके लिए उन्हें मेहनताना मिलेगा। महिलाओं ने उसके कहने पर एक लाख रुपये शैलेंद्र को हाई कोर्ट के पास दे दिए, जबकि एक अन्य समूह ने 30 हजार रुपये और दिए।

    धोखाधड़ी का खुलासा

    परंतु, रुपये मिलने के बाद शैलेंद्र गायब हो गया। एक साल बीत जाने के बाद भी न तो महिलाओं को काम मिला और न ही उनका पैसा वापस किया गया। महिलाओं ने चकरभाठा थाने में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह देखना बाकी है कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और महिलाओं को न्याय मिलता है या नहीं।

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  • 2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी

    2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी

    2017 से छात्र बीमा योजना में सहायता राशि हुई दोगुनी



    सरकारी स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की किसी दुर्घटना में मौत, जैसे सांप या बिच्छू के काटने, पानी में डूबने या आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में, छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत प्रशासन द्वारा एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। पहले इस योजना के तहत मुआवजा राशि दस हजार रुपये थी, लेकिन अप्रैल 2017 से इसे बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है।

    योजना के तहत प्रीमियम और पात्रता

    छात्र सुरक्षा बीमा योजना, जो प्रदेश में 2005 से लागू है, के तहत पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए बीमा प्रीमियम मात्र एक रुपये रखा गया है। यह प्रीमियम शैक्षणिक शुल्क के साथ स्कूलों में जमा कर दिया जाता है, जिसके बाद शिक्षा विभाग इस राशि को संबंधित बीमा कंपनी के खाते में जमा कराता है।

    योजना के तहत, सरकारी स्कूलों के साथ-साथ अनुदान प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र, किसी भी प्रकार की दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में पात्र होते हैं। इसके अलावा, सांप, बिच्छू के काटने, पानी में डूबने और आकाशीय बिजली से होने वाली मौत के मामले में भी यह योजना लागू होती है।

    पालकों को जानकारी की कमी

    हालांकि यह योजना 19 सालों से चल रही है, परंतु कई पालकों और छात्रों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। इसके कारण कई बार छात्र-छात्राओं की मृत्यु होने पर भी पालकों को बीमा राशि का लाभ नहीं मिल पाता।

    शिक्षा विभाग द्वारा पिछले 19 वर्षों में जिले के 250 पालकों को यह सहायता राशि दी जा चुकी है। पिछले साल (2023-24) जिले में 19 बच्चों की सड़क दुर्घटना, पानी में डूबने, सर्पदंश, और आकाशीय बिजली से मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके पालकों ने छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत आवेदन किया और प्रत्येक को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई।

    चालू सत्र (2024-25) में अब तक आठ विद्यार्थियों की मौत के बाद उनके पालकों द्वारा आवेदन किया गया है। इनमें नरियरा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र अक्षय निर्मलकर की ट्रेन दुर्घटना में मौत, सेंदरी की प्राथमिक शाला की छात्रा पूजा कश्यप की सर्पदंश से मौत, और कोलिहादेवरी के पूर्व माध्यमिक शाला के छात्र सोहन दास की सड़क दुर्घटना में मौत शामिल हैं। इन सभी मामलों में उनके स्वजनों ने छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत आवेदन कर, प्रत्येक को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त की है।

    बीमा योजना का महत्व

    छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत मामूली प्रीमियम के बावजूद, दुर्घटना की स्थिति में पालकों को महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता मिलती है। इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि और अधिक परिवार इसका लाभ उठा सकें। प्रशासन द्वारा अधिक से अधिक छात्रों और पालकों को इस योजना की जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे समय पर इसका लाभ उठा सकें।

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  • छत्तीसगढ़ में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाएं: रायगढ़ के वार्ड 30 में जघन्य हत्या

    छत्तीसगढ़ में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाएं: रायगढ़ के वार्ड 30 में जघन्य हत्या

    छत्तीसगढ़ में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाएं: रायगढ़ के वार्ड 30 में जघन्य हत्या

    रायगढ़ शहर में एक जघन्य हत्या की वारदात ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। वार्ड नंबर 30 अंधेरी पुलिया के पास रहने वाले रमेश उर्फ बब्बू तिवारी की अज्ञात हमलावरों ने गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी। हत्या की जानकारी मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में हत्या के पीछे आपसी रंजिश की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पूरी घटना के कारणों का खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो पाएगा।

    पुलिस की जाँच पड़ताल जारी

    पुलिस निरीक्षक मोहन भारद्वाज की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। फोरेंसिक टीम और खोजी कुत्तों की मदद से घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर यह पता चला है कि बब्बू तिवारी घर में अकेले रहते थे। उनकी पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था। आज सुबह काम करने वाली महिला जब उनके घर पहुंची, तो दरवाजा बंद देखकर उसे संदेह हुआ। बार-बार कॉल करने पर भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने पड़ोसियों को जानकारी दी। घर के अंदर झांककर देखने पर खून के छींटे नजर आए, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

    मृतक बब्बू तिवारी शहर में ब्याज पर रकम देने का काम करते थे, और माना जा रहा है कि हो सकता है रकम को लेकर कोई विवाद हुआ हो, जिसके चलते उनकी हत्या की गई। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और इस हत्याकांड के पीछे की साजिश को उजागर करने की कोशिश कर रही है। इलाके में इस घटना के बाद लोगों में दहशत का माहौल है और पुलिस हर कोण से मामले की जांच कर रही है।

    छत्तीसगढ़ में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाएं

    छत्तीसगढ़ में बीते कुछ दिनों से चाकूबाजी और हत्याओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अपराधियों के अंदर कानून का डर न होने के कारण वे निडर होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। सरकार और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस बढ़ते अपराध पर काबू पाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।

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