छत्तीसगढ़ के पामगढ़ नगर पंचायत में हर सोमवार को लगने वाला साप्ताहिक बाजार पिछले 40 वर्षों से लोगों की जरूरतों को पूरा करता आ रहा है। यहां सुई से लेकर फर्नीचर तक हर प्रकार का सामान उचित दामों पर उपलब्ध होता है, और आसपास के लगभग 20 गांवों के लोग अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस बाजार पर निर्भर हैं। साप्ताहिक बाजार छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक सुधार का प्रमुख माध्यम है, जहां उन्हें किराया, बिजली बिल और सरकारी टैक्स जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।

हालांकि, पामगढ़ के इस पुराने बाजार की एक बड़ी समस्या इसकी अव्यवस्थित स्थिति है। बाजार मुख्य मार्ग के दोनों ओर लगाया जाता है, जिससे दिनभर भारी वाहनों और छोटी गाड़ियों की आवाजाही होती रहती है। दुकानदार और खरीदार सड़क पर खड़े होकर सामान खरीदते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। खासकर, बाजार के बीच से गुजरते वाहनों के चलते यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

बाजार में पार्किंग की कोई सुविधा न होने से लोग सड़क के दोनों ओर अपनी गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, जिससे जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। यह समस्या हर सोमवार को बड़ी संख्या में आने वाले खरीदारों के कारण और बढ़ जाती है। इसके अलावा, पुलिस या प्रशासन की ओर से बाजार में सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं किया गया है। बाजार में पुलिस की ड्यूटी तक नहीं लगाई जाती, जिससे यातायात और भीड़ को नियंत्रित करने में मुश्किलें आती हैं।
बाजार की स्थापना को 40 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने बाजार को व्यवस्थित करने और सुविधाएं बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही सुरक्षा और यातायात के मुद्दों को सुलझाया नहीं गया, तो यहां किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
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