
व्यावसायिक शिक्षा से छात्रों में स्वरोजगार की भावना जागृत होगी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छठवीं कक्षा से ही व्यावसायिक शिक्षा देने का निर्णय लिया गया है। इससे छात्रों में स्वरोजगार से जुड़ने की भावना जागृत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत सारे कार्य ऐसे हैं जिन्हें युवा शहरों में जाकर तो करते हैं, लेकिन अपने गांव में नहीं। स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई करने से छात्रों के मन में शुरू से ही खुद का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा उत्पन्न होगी।
शिक्षा में हो रहे बदलाव

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसके तहत कई बदलाव हो रहे हैं:
- पाठ्यक्रम में बदलाव: पहली, दूसरी, तीसरी और छठवीं कक्षा का पाठ्यक्रम पूरी तरह से बदल जाएगा और नई किताबें पढ़ाई जाएंगी।
- व्यावसायिक शिक्षा की शुरूआत: अभी तक नौवीं कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा दी जाती थी, लेकिन अगले सत्र 2025-26 से यह छठवीं कक्षा से शुरू होगी।
- नई ट्रेड की पढ़ाई: स्कूलों में आइटी, हेल्थ केयर, आटोमोबाइल्स, रिटेल मैनेजमेंट, बैंकिंग, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, ब्यूटी एंड वेलनेस समेत अन्य आठ ट्रेड की पढ़ाई हो रही है। नई ट्रेड की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी भी चल रही है।
रोजगार के अवसर
छठवीं कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई से छात्रों में खुद का रोजगार शुरू करने की इच्छा जागृत होगी। वे नौकरी के पीछे न भागकर खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर सकते हैं।
नई व्यवस्था
एससीईआरटी के डायरेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा ने बताया कि पहली, दूसरी, तीसरी और छठवीं कक्षाओं की नई किताबें बनाने का काम शुरू हो गया है। अगले सत्र से इन कक्षाओं में एनईपी के तहत तैयार हो रहे पाठ्यक्रमों की पढ़ाई शुरू होगी।
बोर्ड परीक्षाओं में बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत माध्यमिक शिक्षा मंडल अब दो बार बोर्ड परीक्षा लेगा। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में और दूसरी जून-जुलाई में होगी। इसके अलावा स्कूलों में शनिवार को बैगलेस डे शुरू किया गया है, जिसमें अन्य गतिविधियां कराई जाएंगी। इस नई नीति से छात्रों में स्वरोजगार की भावना को बढ़ावा मिलेगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
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